विविध

Sahity

कविता

नेताओं का वैचारिक स्थानांतरण..!         -----------------------------          उन्हें शर्म तक नहीं आती          हम उनके लिए    ...

सबके घरों में रोशनी एक सी आती नहीं अबसूरज बड़ी इमारतों में अटक गया है कहींपेड़,पक्षी,नदी,नाले हैं ...

कुछ प्यासी चिड़िया भी यहाँ आती हैंअपनी छतों पे कुछ पानी भी भरके रखिएये बच्चे खिलौनों से कब तक खेल...