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रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है,जानें इससे जुड़ी बाते

*रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है,जानें इससे जुड़ी बाते

Writer-विवेक चौबे

आपको बता दें कि रक्षाबंधन हिन्दुओं का महत्वपूर्ण पर्व है, जो भारत के कई हिस्सों में मनाया जाता है।भारत के अलावा भी विश्व भर में जहाँ पर हिन्दू धर्मं के लोग रहते हैं, वहाँ इस पर्व को भाई -बहनों के बीच मनाया जाता है। इस त्यौहार का आध्यात्मिक महत्व के साथ साथ ऐतिहासिक महत्त्व भी है।

    रक्षाबंधन के त्यौहार का महत्व.                   

रक्षाबंधन भाई बहनो के बीच मनाया जाने वाला पर्व है। इस दिन बहन अपने भाइयों को रक्षाधागा बांधती हैं और भाई अपनी बहनों को जीवन भर उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं।इस त्यौहार के दिन सभी भाई बहन एक साथ भगवान की पूजा आदि करके आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

              रक्षाबंधन सम्बंधित मिथक 

रक्षाबंधन सम्बंधित कुछ पौराणिक कथाएं जुडी हुईं है। इन कथाओं का वर्णन नीचे किया जा रहा है।

           इंद्रदेव सम्बंधित मिथक :

भविष्यत् पुराण के अनुसार दैत्यों और देवताओं के मध्य होने वाले एक युद्ध में भगवान इंद्र को एक असुर राजा, राजा बलि ने हरा दिया था।इस समय इंद्र की पत्नी सची ने भगवान विष्णु से मदद माँगी।भगवान विष्णु ने सची को सूती धागे से एक हाथ में पहने जाने वाला वयल बना कर दिया। इस वलय को भगवान विष्णु ने पवित्र वलय कहा।सची ने इस धागे को इंद्र की कलाई में बाँध दिया तथा इंद्र की सुरक्षा और सफलता की कामना की।इसके बाद अगले युद्द में इंद्र बलि नामक असुर को हारने में सफ़ल हुए और पुनः अमरावती पर अपना अधिकार कर लिया। यहाँ से इस पवित्र धागे का प्रचलन आरम्भ हुआ।इसके बाद युद्द में जाने के पहले अपने पति को औरतें यह धागा बांधती थीं।इस तरह यह त्योहार सिर्फ भाइयों बहनों तक ही सीमित नहीं रह गया।

           राजा बलि और माँ लक्ष्मी

भगवत पुराण और विष्णु पुराण के आधार पर यह माना जाता है कि जब भगवान विष्णु ने राजा बलि को हरा कर तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया, तो बलि ने भगवान विष्णु से उनके महल में रहने का आग्राह किया।भगवान विष्णु इस आग्रह को मान गये। हालाँकि भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी को भगवान विष्णु और बलि की मित्रता अच्छी नहीं लग रही थी, अतः उन्होंने भगवान विष्णु के साथ वैकुण्ठ जाने का निश्चय किया।इसके बाद माँ लक्ष्मी ने बलि को रक्षा धागा बाँध कर भाई बना लिया। इस पर बलि ने लक्ष्मी से मनचाहा उपहार मांगने के लिए कहा।इस पर माँ लक्ष्मी ने राजा बलि से कहा कि वह भगवान विष्णु को इस वचन से मुक्त करे कि भगवान विष्णु उसके महल मे रहेंगे। बलि ने ये बात मान ली और साथ ही माँ लक्ष्मी को अपनी बहन के रूप में भी स्वीकारा।

बताते चलें कि रक्षाबंधन हजारों साल प्राचीन त्योहार है।प्यार का प्रतीक है रक्षाबंधन।बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है।इसके भी कुछ विधि हैं।बहन अपनी राखी की थाली में रोली,कुमकुम,चावल,दीपक,मिठाई व राखी से सजाती है।

सर्वप्रथम भाई को सबसे पहले तिलक लगाती है,जहां अग्नि चक्र कहलाता है।उसके पश्चात दाहिने हाथ के कलाई पर राखी बांधती है।राखी बांधने के पश्चात बहन भाई की आरती उतारती है।आरती के बाद मिठाई खिलाती है।भाई बड़ा है तो बहन पैर छूकर आशीर्वाद लेती है और यदि बहन बड़ी है तो भाई उसके पैर छूकर आशीर्वाद लेता है।भाई इस मौके पर पसंदीदा उपहार देकर बहन को प्रसन्न करता है।