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आए दिन हो रही सड़क दुर्घटनाओं में किसी की गोद हो रही है सुनी,तो उजड़ रहा है किसी के मांग का सिंदूर...तो कोई हो रहा अनाथ...

सड़क हादसों की कैसे थमेगी रफ्तार..?

देश में हर मिनट एक सड़क दुर्घटना होती है, हर चार मिनट में एक मौत हो जाती है।सालाना करीब 1.35 लाख सड़क हादसों का शिकार होते हैं। सड़क दुर्घटनाओं का यह आंकड़ा दुनिया में सबसे बड़ा है।देश इस बड़ी चुनौती से कैसे निपटेगा...?

देश की सड़कों पर आए दिन होने वाले ये हादसे कुछ नए नहीं है। हर मिनट पर देश में एक सड़क दुर्घटना होती है। हर चार मिनट में इसके चलते एक मौत होती है।शराब पीकर गाड़ी चलाना इन सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण हैं।

दुर्घटनाओं के मामले में सिमडेगा जिला भी कुछ कम नहीं है...यहां हर रोज कोई ना कोई सड़क दुर्घटना हो रही है...

जिले में इन दिनों हो रही सड़क दुर्घटनाओं में मुख्यतः कारण रहा है तेज रफ्तार, शराब पीकर गाड़ी चलाना, हेलमेट और सीट बेल्ट की अनदेखी इन दुर्घटनाओं में बड़े जिम्मेदार हैं।हालांकि खराब सड़कें, कम रखरखाव वाले वाहन, निम्न दर्जे की सड़क डिजाइन और इंजीनियरिंग क्वालिटी भी ऐसे कई कारण हैं जो इन एक्सीडेंट्स को बढ़ावा देते हैं।_

जहाँ तक देखा जाए तो जिले में कुछ दिनों पूर्व हेलमेट ना पहनने वाले वाहन चालकों पर परिवहन विभाग खासा मेहरबान थी।जिस तरह लगातार वाहन चेकिंग अभियान चल रही थी उसका असर ये हुआ था कि लोग हेलमेट पहनना अपनी आदत बना बैठे थे।परन्तु चेकिंग अभियान खत्म तो लोगों ने अपनी आदतें भी बदल लीं...

पहले तो हमें ये समझना होगा और हमें खुद इसके प्रति जिम्मेवारी लेनी होगी कि आखिर हम कैसे कोई पहल कर इन सड़क दुर्घटनाओं में कमी ला सकते हैं...ये केवल विभाग की या हमारे अधिकारीयों की जिम्मेदारी नहीं है कि वो आपको या हमें हेलमेट पहनने पर मजबूर करें आपको और हमें ही अपनी जीवन शैली में इस महत्वपूर्ण चीज को जोड़ना होगा,अपनी आदत बनानी होगी।हम जागरूक होंगे तो हमें देखकर ही आस पास के लोग जागरूक होंगे...

हेलमेट किस तरह किसी की जान बचा सकता है यह शायद मुझसे बेहतर और कोई नहीं बता सकता

जिले में अभी हाल की हुई सभी सड़क दुर्घटनाओं को अगर आप गहनता से देखें तो सभी में आपको एक बात जरूर समान दिखेगी कि सभी के सभी चालक नशे में होते हैं। कोई अंग्रेजी शराब की नशे में तो कोई अवैध शराब की नशे में तो कोई मादक पदार्थ के नशे में।नशा बहुत लोग करते हैं परंतु वे सभी इन सड़क दुर्घटनाओं के शिकार नहीं होते वे समय के अनुकूल इसका सेवन करते हैं।

अधिकतर सड़क दुर्घटनाओं में यह भी देखा जाता है अधिकतर जो चालक नशे में होते हैं वह या तो आसपास के किसी ढाबे या होटलों से पीकर आ रहे होते हैं या तो फिर किसी झोपड़ी से अवैध शराब का नशा कर कर आ रहे होते हैं...और इसमें अधिकांश लोगों की आयु 16 से 35 के बीच होती है...

प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद,लाख छापामारीयों के बावजूद जिले में अवैध शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी है तो वहीं मुख्य सड़क(NH) पर स्थित अधिकांशतः होटलों एवं ढाबों में शराब परोसे जा रहे हैं...

ऐसा नहीं है कि प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है,जब एक हत्या होने पर प्रशासन सालों साल तक उसकी जांच कर हत्यारे तक पहुंचती है तो क्या जिले में अवैध तरीके से जो अवैध शराब के कारोबारी हैं उनतक नहीं पहुंच सकती...

कल के हुए माननीय उपायुक्त महोदया के जनता दरबार में भी लोगों ने शिकायत की, कि सिमडेगा शहरी क्षेत्र के आसपास के इलाकों में जो अवैध शराब की बिक्री होती है वह मुख्यतः सांयपुर इलाके से आई होती है।सांयपुर एक ऐसा इलाका है जो अवैध शराब की चुलाई का गढ़ माना जाता है...और बस कल के ही जनता दरबार मे ही नहीं... अवैध शराब की चुलाई एवं बिक्री की शिकायत पिछले 2 वर्षों से जिले के उपायुक्त महोदय के समक्ष जनता दरबार मे पहुंचती है।चाहे वो कोलेबिरा क्षेत्र की हो,जलडेगा की हो या फिर किसी अन्य क्षेत्रों की...शिकायत पर कार्यवाही की भी जाती है परन्तु प्रशासन को चकमा देकर पहले ही मुख्य-मुख्य लोग फरार हो जाते हैं...प्रशासन के पहुंचने की जानकारी पता नहीं कैसे उनतक पहले ही प्राप्त हो जाती है...और अक्सर ये शिकायतें गाँव घर की महिलाएँ लेकर आई हुई होती हैं।क्योंकि आज महिलाएं इसके प्रति जागरूक हो चुकी है,वे भी समझ चुकी हैं कि अवैध शराब ही मुख्य कारण है अधिकांश घरों में कलेश का कारण।यही कारण है कि वे खुद इकठ्ठा होकर इस अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाती हैं।

तो क्या प्रशासन या हमारी जिम्मेवारी नहीं बनती की हम उन महिलाओं का सहयोग करें...?क्या हम इतने मजबूर हैं कि हम इसे रोक नहीं सकते...!अवैध शराब की बिक्री के रोकथाम से सड़क दुर्घटनाओं में कैसे कमी आ सकती है इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं जिस कुरडेग-सिमडेगा मुख्य पथ पर आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती थी उन दुर्घटनाओं में काफी कमी आई है...

समूह के माध्यम से ही हमने उस सड़क पर हो रहे अवैध शराब की बिक्री के संबंध में कुरडेग थाना प्रभारी एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी का ध्यानाकर्षण कराया था।आग्रह पर कार्यवाही हुई।सभी झोपड़पट्टी ध्वस्त किए गए और आज आप देख सकते हैं कि उस सड़क पर दुर्घटनाओं में कितनी कमी आई है...

ऐसा हर क्षेत्र में हो सकता है...बस इसके प्रति हमें गम्भीर होना होगा...जरूरत है एक अभियान की,एक पहल की जिसमें हम सभी को अपनी सहभागिता निभानी होगी तभी जाकर इन सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है...

✍lअंकित...