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श्रीराम भारत भूमि के इसके बदले हुए स्वरूप देखकर आश्चर्यचकित थे। वे नहीं समझ नहीं पा रहे थे कि आख़िर मेरे नाम की आड़ में लोग क्यों हिंसा करने पर उतारू हो गये हैं...

विनोद सागर जपला    मॉब लिंचिंग (लघुकथा)

     भूलोक के देव-मुनियों की पावन भूमि भारत पर हर तरफ भगवान राम की जय-जयकार देखकर रावण से रहा नहीं गया। एक बार फिर उसने भूलोक पर अपनी सत्ता स्थापित करने पड़ा, पर इस बार उसके मन ने जो षड्यंत्र का रूप धारण किया था वह काफ़ी ख़तरनाक था। जब इसकी भनक मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम को लगी तो वे भी रावण की तलाश में भूलोक को चल पड़े। भूलोक के भारत भूमि पर कुछ हिंदू युवक क्रिकेट खेल रहे थे। बगल में अपनी मोटरसाइकिल से नमाज़ी टोपी लगाये एक मुस्लिम युवक अपने घर जाने ही वाला था कि रावण ने अपने षड्यंत्र की दाँव चल दी। वह ख़ुद को कई हिस्सों में विभक्त कर खेल रहे सभी हिंदू युवकों के शरीर में प्रवेश कर लिया। तत्पश्चात् सभी हिंदु युवकों ने मोटरसाइकिल वाले मुस्लिम युवक को रोका और उस हिंदू युवकों की भीड़ के एक सदस्य ने उस युवक का कॉलर को पकड़कर उससे पूछा, "क्या नाम है तुम्हारा...?"

  •      "शमशेर आलम।"  सहमते हुए उस मुस्लिम युवक ज़वाब दिया था।

     "साले...अकड़ता है...चल...जय श्री राम बोल...!"  तभी दूसरे हिंदू युवक ने शमशेर के गालों पर दो झापड़ लगा दिए। तभी रावण का पीछा करते हुए भगवान श्रीराम भी वहाँ पहुँच चुके। वे आगे का प्रकरण जानने को वटवृक्ष की आड़ में छुपकर सारे मंज़र का अवलोकन करने लगे। 

     "नहीं...! मैं नहीं बोल सकता...!" शमशेर ने असहमति जताई तो भीड़ बेक़ाबू हो गई। भीड़ 'जय श्री राम, जय श्री राम, भारत में रहना होगा तो जय श्री राम बोला होगा' आदि के नारे लगाते हुए शमशेर को तब तक पीटना नहीं छोड़ा, जब तक कि वह दुनिया नहीं छोड़ दिया। वह दुनिया छोड़ने से पहले अंतिम शब्द 'जय श्री रा...' ही बोल पाया था। उसके दुनिया छोड़ते ही भगवान श्रीराम भारत भूमि के इसके बदले हुए स्वरूप देखकर आश्चर्यचकित थे। वे नहीं समझ नहीं पा रहे थे कि आख़िर मेरे नाम की आड़ में लोग क्यों हिंसा करने पर उतारू हो गये हैं...! दूसरी तरफ रावण अपनी इस कूटनीतिक जीत पर ख़ुश होते हुए 'मॉब लिंचिंग' के अगले शिकार की तलाश में चल पड़ा था।-विनोद सागर, जपला।