क्या भजपा को झारखंड के नेताओ की काबिलियत पर भरोसा नही? जाँच दूसरे राज्यों के नेताओं को सौपा

बड़ा सवाल : बीजेपी ने झारखंड में हुई घटना की जांच का जिम्मा 'दुसरे राज्यों के नेताओ' को सौपा, बड़ा सवाल - क्या बीजेपी को अपने झारखंडी नेताओ और उनकी काबिलियत पर भरोसा नहीं ? 

अपने कार्यकाल के दौरान झारखंडी युवाओ को 'अयोग्य' बताने वाली बीजेपी को शायद अब अपने झारखंडी नेताओ पर और उनकी काबिलियत पर भी भरोसा नहीं रह गया है। यही वजह है की बीजेपी ने झारखंड के चाईबासा में हुए नरसंहार के लिए गठित जांच टीम में दुसरे राज्यों के नेताओ को तरजीह दी है। बीजेपी ने झारखंड में हुई घटना की जांच का जिम्मा महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ सरीखे दुसरे राज्यों के नेताओ के जिम्मे सौपा है। चाईबासा में हुए नरसंहार के लिए बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने छह सदस्यीय टीम का गठन किया था, जिसमे से आधे से ज्यादा सदस्य दुसरे राज्यों से शामिल किये गए है। बीजेपी की इस जांच टीम में जहां केवल 2 नेता झारखंड से है, तो वही चार नेता दुसरे राज्यों से बुलाये गए है। साफ़ है की बीजेपी को झारखंड में अपने ही नेताओ पर अब भरोसा नहीं रह गया है। बीजेपी की जांच टीम में गुजरात के सांसद जसवंत सिंह भाभोर, महाराष्ट्र की सांसद भारती पवार, छत्तीसगढ़ के सांसद गोमती साय, पश्चिम बंगाल के सांसद जॉन बारला, झारखंड से केवल दो नेता (नीलकंठ सिंह मुंडा और समीर उरांव) शामिल है। झारखंड में अपने नेताओ को अपनी ही जांच टीम में जगह नहीं दिए जाने से जहां एक ओर झारखंड के बीजेपी नेताओ में नाराजगी है तो वही विरोधी भी मान रहे है की बीजेपी अब झारखंड में ना केवल 'नेतृत्व विहीन' है, बल्कि अब उसके पास 'योग्य नेताओ' की भी कमी हो गयी है। यही वजह है की बीजेपी को दुसरे राज्यों से नेता 'इम्पोर्ट' कराने पड़ रहे है। बीजेपी को दुसरे राज्यों के नेताओ के जिम्मे झारखंड में हुई घटना की जांच करानी पड़ रही है। ऐसे में बड़ा सवाल है की क्या बीजेपी को अपने झारखंडी नेताओ और उनकी काबिलियत पर भी भरोसा नहीं है ?