क्या_हम और हमारा सिस्टम_तैयार_हैं? लॉक_डाउन_फ्लॉप_होने_के_मायने

#Stop_Corona क्या हमारे राजधानी का स्वास्थ्य महक़मा कोरोना से लड़ने को तैयार है? राँची ज़िला प्रशासन, राँची का नगर निगम क्या कोरोना का मुक़ाबला कर पायेगा? क्या संसाधनों की कमी से सूबे के कराहते पीएचसी और अनुमंडलीय अस्पताल सम्भाल पाएंगे कोरोना की सुनामी? कुदरत ने हमें चाइना, इटली और अन्य देशों की हुई भयावह हालात से बचने के लिए पर्याप्त समय दिया है। कुछ दिन हैं हमारे पास। लेकिन यक्ष प्रश्न यही है कि क्या हम तैयार हैं? सूबे का सबसे बड़ा हॉस्पिटल रिम्स राज्य के विभिन्न इलाकों से आने वाले मरीज़ों से पहले से ही अटा पड़ा है। सारे सदर हॉस्पिटल भी कब से खुद ही लाचार हैं। ऐसे में खेलगांव में अरबो की लागत से बने इन-डोर इंफ्रास्ट्रक्चर कब काम आएंगे? क्यों नहीं स्वास्थ्य महक़मा उन्हें आइसोलेशन वार्ड में तब्दील कर रहा? सरकार द्वारा ढेर सारे पत्र जारी हो रहे हैं, सीमाओं को सील करने की भी बातें हुई, लेकिन सवाल है कि लॉक डाउन के बाद भी फिर कंधे पर अपना बोरिया बिस्तरा लादे राजधानी की सड़कों पर रोज भागते दौड़ते हज़ारो लोग कौन हैं? पता नहीं कल क्या होने वाला है? मैं ये भी नहीं जानता कि कोरोना की इस सुनामी में मैं भी रहूंगा या नही? चाइना, यूरोप और ईरान के हालात देखने के बाद निराशा दिखने लगी है कि हम इसके लिए तैयार नहीं हैं। सुरक्षा के लिए सरकार के भरोसे बैठे लोग लॉक-डाउन को नकार रहे हैं। आज देश के हर तबके के लोग, मुफ्त में भी अपनी रक्षा नहीं कर सकने की स्थिति में नहीं दिख रहे हैं।

तब तो अब कहना ही पड़ेगा कि हमारा भगवान ही मालिक है। वैसे भी देश पर जब जब भी विपत्ति आई है  मुल्क में तब-तब कुछ संस्थानों की भूमिका बेहद एहम हो जाती है, जिनमे मीडिया भी एक महत्वपूर्ण इकाई है। मैं भी पूरी ईमानदारी के साथ कोशिश कर रहा हूं कि मीडिया के कई सन्नोतो के माध्यम से आप तक खबरें पंहुचा पाउं, लेकिन अब हालात देखने के बाद अब तो हर पोस्ट यह सोच कर लिख रहा हूं कि शायद ये मेरी ज़िंदगी का आख़री पोस्ट न साबित हो जाये। लेकिन फिर भी मुझे पूरी उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा। हम जिएंगे, हम और हमारे बच्चे, अपने मुस्कुरायेंगे, देश के लोग एक दूसरे को शिद्दत से फिर देख पाएंगे एक दूसरे को गले लगा कर जरूर कहेंगे 'थैंक यू'।क्योंकि 'कोरोना हारेगा और हम जीतेंगे'

जय हिंद