प्रियंका पाठक ने बाबा रामदेव के खिलाफ खोला मोर्चा कहा- आसाराम और रामरहीम का बाप है बाबा रामदेव


    भोपाल। अंग्रेजी पत्रकार प्रियंका पाठक नारायण पिछले कुछ सालो से बाबा रामदेव पर स्टडी कर रही है प्रियंका पाठक ने करीब 6 साल की कठोर मेहनत से बाबा रामदेव पर रिसर्च करती रही और उसपर एक बुक लिखी है जिसका नाम है 'गॉडमैन टू टाइकून' । इस बुक में बाबा रामदेव के फर्श से शीर्ष तक के सफर को बड़े ही सहज तरिके से बताया है प्रियंका पाठक के अनुसार यह सब इनफार्मेशन उसने बाबा रामदेव के आसपास व उसके निजी रहे लोगो से ली है |

प्रियंका पाठक ने अपनी बुक में बाबा के खिलाफ ऐसे रहस्यों से पर्दा उढ़ाया है जो बाबा के समर्थकों को शायद गवारा नहीं होगा लेकिन एक बार निष्पक्ष होकर यदि सोचेंगे तो शायद पाठक की बातो पर आप विश्वास करेंगे ।

प्रियंका पाठक के अनुसार बाबा रामदेव के गुरु शंकर देव एक दिन सुबह की सैर के वक्त से गायब है या हो गए । आपको बता दे की गुरु शंकर देव वही शख्स है जिन्होंने ही हरिद्वार में बाबा रामदेव को दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट और अपनी अरबों रूपए की ज़मीने दान की ।

लगातार कई साल से बाबा रामदेव पर स्टडी कर रही प्रियंका पाठक ने इस किताब में बाबा के कई भेद खोलें हैं उसके अनुसार यह एक इत्तफाक था या साजिस का हिस्सा , आखिर बाबा रामदेव ने जिससे भी कुछ गुर सीखा वह कुछ समय बाद क्यों एक रहस्मयी मौत का शिकार हो गया ।

जब गुरु शंकर देव रहस्मयी तरीके से गायब हुए तो बाबा रामदेव उस वक्त जुलाई 2007 में ब्रिटेन यात्रा पर थे अपने प्रमुख गुरु के लापता होने के बाद भी रामदेव ने अपने ब्रिटेन यात्रा चालू रखी और गायब होने के दो महीने बाबा रामदेव भारत वापिस लौटे।

बाबा रामदेव के एक ओर गुरु व मित्र आयुर्वेद के जाने माने वैद्य स्वामी योगानंद की हत्या भी कम रहस्मयी नहीं है 1995 में स्वामी योगानंद ने ही बाबा रामदेव को आयुर्वेद दवा बनाने का लाइसेंस उपलब्ध कराया था या यह कहे की आयुर्वेद की दुनिया में स्वामी योगानंद की छाव में ही बाबा रामदेव ने चलना सीखा था । अगले 8 सालो तक बाबा रामदेव ने स्वामी योगानंद के लाइसेंस पर दवाइया बनाता रहा लेकिन 2003 में बाबा रामदेव ने स्वामी योगानंद के साथ अपनी साझेदारी ख़त्म कर ली और कुछ ही महीने बाद स्वामी योगानंद का शरीर खून से लथपथ उसके ही घर में मिला । कुछ समय बाद 2005 में हत्या की छानबीन बंद कर दी ।

मार्च 2005 ट्रस्ट के व्यवसायीकरण को लेकर बाबा रामदेव का विवाद कर्मवीर से हो गया था कर्मवीर उस समय दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष थे इसके बाद कर्मवीर ने हमेसा के लिए ट्रस्ट को अलविदा कह दिया।

इसी तरह कुछ समय बाद सन 2009 में में बाबा रामदेव का का विवाद आस्था टीवी के संस्थापक सदस्य किरीट मेहता से हुआ मेहता के प्रयास और मेहनत से ही बाबा रामदेव को आस्था टीवी के ज़रिये ही अपना नाम कमाया और लोगो में पॉपुलर हुए । किरीट मेहता ने तो बाबा के खिलाफ अपहरण का केस भी दर्ज करवा दिया था।

राजीव दीक्षित, जिसके स्वदेशी अभियान पर आज पतंजलि का सम्पूर्ण करोबार चल रहा है 2010 में राजीव दीक्षित लोगो को सम्बोधित करने गए , उस वक्त बाथरूम में उनकी लाश मिली लेकिन अगर उस वक्त मरने के उपरांत उनका पोस्टमार्डर होता तो शायद उसकी मौत के रहस्य से पर्दा उठ जाता लेकिन उसकी मौत के तुरंत बाद राजीव दीक्षित के पार्थिव शरीर को बाबा के आश्रम में लाया गया व उसके शरीर को अग्नि देने में बहुत ही ज्यादा जल्दबाजी की गई और लोगो को कहा गया की उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई है लेकिन राजीव दीक्षित की शव यात्रा में शामिल लोगो के अनुसार राजीव दीक्षित के होठो का रंग नीला पड़ने लगा था । अक्सर ऐसा शरीर, जहर के होने से होता है।