अल्लाह को खुश करने के लिए 4 साल की मासूम बेटी की कुर्बानी। इस्लाम तो ऐसी शिक्षा नहीं देता तो फिर कौन लोग कर रहे हैं दुष्प्रचार

अल्लाह को खुश करने के लिए 4 साल की मासूम बेटी की कुर्बानी। इस्लाम   तो ऐसी शिक्षा नहीं देता तो फिर कौन लोग कर रहे हैं दुष्प्रचार। 

राजस्थान के जोधपुर जिले के पीपाड़ सिटी कस्बे के नवाब अली कुरैशी का कहना है कि पवित्र रमजान माह में अल्लाह को खुश करने के लिए मैंने अपनी 4 साल की मासूम बेटी रिजवाना की कुर्बानी दे दी। यह दर्दनाक घटना 8 व 9 जून की रात की है। नवाब ने आधी रात को रिजवाना को तब जगाया, जब वह अपनी मां के साथ छत पर सो रही थीं। नीचे बरामदे में लाकर रिजवाना को अपनी गोद में बैठाया और कलमा सुनाया तथा तेज धार वाले हथियार से हत्या कर दी। चूंकि नवाब इसे अल्लाह के लिए कुर्बानी मान रहा था इसलिए आराम से सो गया। हालांकि अब पुलिस ने नवाब को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन सवाल उठता है वे कौन लोग हैं कि धर्म के नाम पर ऐसी शिक्षा देते हैं। नवाब ने भी किसी धर्मगुरू, विद्वान आदि से अल्लाह को खुश करने वाले तरीके सुने ही होंगे। तभी तो अपनी 4 साल की बेटी की हत्या कर दी। जहां तक इस्लाम का सवाल है तो कहीं ऐसी शिक्षा का उल्लेख नहीं है। पवित्र कुरान और इस्लाम को जानने और समझने वाले ख्वाजा साहब की दरगाह के खादिम सैय्यद अब्दुल गनी गुरदेजी ने पीपाड़ सिटी की घटना पर अफसोस जताते हुए कहा कि कुरान का अनुसरण करने वाला मुसलमान कभी भी अपनी बेटी की कुर्बानी नहीं  दे सकता। इस्लाम में किसी को दुःख पहुंचाने और हत्या जैसा जघन्य अपराध करने की कोई गुंजाईश नहीं हैं। इस्लाम तो कहता है कि यदि आपका पड़ौसी भूखा है तो आपको भरपेट खाना खाने का अधिकार नहीं है। इस्लाम में तो महिलाओं और बच्चिओं को बहुत ही सम्मान की निगाह से देखा गया है। वैसे भी जब रमजान माह इबादत का महिना है तो हत्या की बता तो जहन मे आनी ही नहीं चाहिए। कुछ लोग इस्लाम को लेकर दुष्प्रचार करते हैं, ऐसे लोगों को अल्लाह कभी माफ नहीं करेगा। धर्मगुरूओं और मुस्लिम विद्वानों को भी कुरान के अनुरूप ही शिक्षा देनी चाहिए। आज दुनिया में जो माहौल है उसका मुकाबला सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के सूफीवाद से ही किया जा सकता है। इस मुद्दे पर और अधिक जानकारी मोबाइल नम्बर 9829071897 पर गुरदेजी से ली जा सकती है। 

सहभार-:एस.पी.मित्तल) (10-06-18)