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वाहन चलाते समय सेल्फी या फेसबुक लाइव लेना हो सकता है जानलेवा

वाहन चलाते समय सेल्फी या फेसबुक लाइव लेना हो सकता है जानलेवा

गोबाराम चौहान सांगाणा।

आजकल सेल्फी लेना लोगों का एक शौक बन गया हैं।हर कोई अपने आप को सोशल मीडिया पर देखना चाहता है। हाल ही के कुछ वर्षों में मोबाइल कैमरे के जरिए सेल्फी या अपनी तस्वीर खुद उतारने के शौक  को लोगों ने आम बना दिया है। हैरानी की बात तो यह होती हैं कि लोग अपनी जान की परवाह किए बिना ही इस प्रकार से सेल्फी लेते हैं कि वह उनकी जिंदगी का अंतिम क्षण हो जाता है। रोजाना की एक रस जिंदगी में मनोरंजन या नएपन को स्वास्थ्य के लिए जरुरी माना जाता है। लेकिन इस तरह की गतिविधियां जानलेवा शौक में बदल जाए तो उस शौक से तौबा कर लेना ही उचित है। सेल्फी लेना एक इस प्रकार की बीमारी बन गई हैं कि खतरनाक जगह पर अलग-अलग स्टाइल में अपनी तस्वीर उतारने में उसकी जान भी जा सकती है। मैंने कुछ वर्षों पहले एक वायरल वीडियो देखा था जिसमें एक युवक पीछे से आ रही ट्रेन के आगे वीडियो बना रहा है और चंद सेकंड में वह ट्रेन से टकरा जाता है। कुछ वर्षों पहले जोधपुर के मसूरिया पहाड़ी पर एक व्यक्ति अपनी सेल्फी लेते गिर गया और मर गया। मोटरसाइकिल चलाते हुए अपने एक हाथ में स्टैंड और एक हाथ से अपना वीडियो उतारना या सेल्फी लेना कितना खतरनाक साबित हो सकता है, यह आजकल हम सब देखते और सुनते ही हैं। अभी दो-तीन दिन पहले ही एक वीडियो आया फेसबूक लाइव का। वीडियो बालोतरा का बताया जा रहा है। जिसमे तेज स्पीड में गाड़ी चला रहे एक युवक का फेसबुक लाइव चल रहा है। वही बारिश भी हो रही है। उसके साथ में 3लोग और बैठे हुए है। और थोड़ी ही देर में उस गाडी का खतरनाक एक्सीडेंट हो जाता है। जिसमे ड्राईवर की मौत हो जाती है और साथ बैठे 3लोग भी गम्भीर घायल हो जाते है। इन घटनाओं से आप अंदाजा लगा सकते है कि किस प्रकार आज का युवा अपने जान की परवाह किये बगैर ऐसे खतरनाक शौक रखता है।ऐसे अनेकों उदाहरण हमारे सामने हैं जिसमें सेल्फी या फेसबुक लाइव ने लोगों की जान ली। आजकल सेल्फी का तो इतना क्रेज हो चुका है कि व्यक्ति सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर अपलोड ना कर ले तब तक उसे बेचैनी होती है। एक अध्ययन से पता चला है कि दुनिया भर में सेल्फी लेने के क्रम में हुई मौतों में साठ फीसदी अकेले भारतीय है।विडम्बना  यह है कि जो आदत इस कदर एक मौत का रूप ले रही हैं उसका कोई हल तो सामने नहीं आ रहा है लेकिन बाजार इसे भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। जिस प्रकार सेल्फी अपनी जान को जोखिम भरा बना रही हैं मुझे लगता है कि हमें सेल्फी के इस खतरनाक जानलेवा शौक से उबरकर आगे बढ़ने की जरुरत है।