राहुल गांधी ने न्यूनतम आय योजना का जो मास्टर स्ट्रोक चला है, ठीक 48 वर्ष पूर्व यही मास्टर स्ट्रोक 1971 में उनकी दादी इंदिरा गांधी ने चला था।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने न्यूनतम आय योजना का जो मास्टर स्ट्रोक चला है, ठीक 48 वर्ष पूर्व यही मास्टर स्ट्रोक 1971 में उनकी दादी इंदिरा गांधी ने चला था। तब इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया था। इसी नारे के बल पर वह देश की सत्ता पर काबिज हुई थीं। उस समय पूरा विपक्ष उनके खिलाफ लामबंद था। लेकिन, उनके इस एक नारे ने सभी राजनैतिक अनुमानों को धराशायी कर दिया था। कांग्रेस पार्टी की झोली में लोकसभा की 352 सीटें आयी थीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में अब उसी तर्ज पर भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को घेरने के लिए राहुल गांधी ने 25 मार्च को न्यूनतम आय योजना की घोषणा कर डाली। कहा, इससे देश के 25 करोड़ गरीबों का उत्थान होगा। कांग्रेस अध्यक्ष की इस प्रस्तावित योजना के तहत देश के 20 प्रतिशत गरीबों को हर वर्ष 72 हजार रुपये मिलेंगे। यह न्याय योजना धरातल पर किस तरह उतरती है, यह तो समय ही बतायेगा। लेकिन, एक बात तो स्पष्ट है कि सत्ता पक्ष के लिए इसकी काट करना मुश्किल साबित हो रहा है। पिछले वर्ष तीन राज्यों के चुनाव में किसानों की कर्जमाफी योजना के परिणाम से उत्साहित कांग्रेस अध्यक्ष ने गरीबों के उत्थान के निमित्त न्यूनतम आय योजना की घोषणा दी है। राहुल गांधी ने वादा किया है कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वह देश के 20 प्रतिशत सबसे गरीब पांच करोड़ परिवारों को सीधे उनके खाते में सालाना 72 हजार रुपये देगी, ताकि उनकी आय 12 हजार रुपये महीने हो सके। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है कि इस योजना को तैयार करने के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था का गहन अध्ययन किया गया है। देश की अर्थव्यवस्था इसका भार उठा सकती है। न्यूनतम आय योजना के लिए देश में पर्याप्त धन उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस देश के लोगों को न्याय और उनका हक देगी। अब संदर्भ पर भाजपा भी भला कहां चुप रहनेवाली थी। उसने कांग्रेस की योजना की काट करने के लिए वित्तमंत्री अरुण जेटली को मैदान में उतारा। जेटली ने गांधी की न्याय योजना में फौरन खामियां गिनानी शुरू कर दीं। साथ ही, मोदी सरकार की वर्तमान योजनाओं का जिक्र कर यह समझाने की कोशिश की, कि मोदी सरकार अभी भी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना के तहत गरीबों के खाते में सरकारी सहायता दे रही है। जेटली ने दलील दी कि भाजपा के नेतृत्ववाली केन्द्र सरकार विभिन्न योजनाओं व कार्यक्रमों के जरिये गरीबों को 5.34 लाख करोड़ रुपये दे रही है। उन्होंने कांग्रेस की न्याय योजना को विशुद्ध रूप से धोखा और छलावा बताया। अरुण जेटली ने कहा, 'कांग्रेस की नीति रही है कि चुनाव जीतने के लिए गरीब को धोखा दे। उसका इतिहास रहा है कि गरीब को नारे दो, लेकिन साधन मत दो।' ऐसे में इसकी जवाबी प्रतिक्रिया भी स्वाभाविक थी। सो, कांग्रेस ने Twitter पर इसकी काट करने के लिए अभियान चलाया। उसने कहा, 'भाजपा गरीबों को न्यूनतम आय देने का विरोध कर रही है। जबकि, स्वयं अमीरों को करोड़ों रुपये की मदद कर चुकी है।' बहरहाल, वाद-प्रतिवाद से अलग हट कर देखा जाये, तो न्यूनतम आय योजना कांग्रेस की एक अच्छी योजना है। यह गरीबों को न्यूनतम आय की गारंटी देगी। लेकिन, यक्ष प्रश्न यह है कि पांच करोड़ परिवार को सालाना 72 हजार रुपये देने के लिए लगनेवाली 3.6 लाख करोड़ की राशि आयेगी कहां से ? इसके अलावा गरीब की आय का आंकड़ा क्या कांग्रेस के पास है? आखिर वह कैसे तय करेगी कि गरीब कौन है। इसी तरह ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इसका निर्धारण कैसे होगा कि किसकी आय कितनी है? देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की इस न्याय योजना का देश के मतदाताओं पर कितना प्रभाव पड़ता है।