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तो अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए शिवसेना संसद में कानून बनाने का प्रस्ताव क्यों नहीं लाती? सिर्फ मांग करने से क्या होगा?

16 जून को शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी के सभी 18 सांसदों के साथ अयोध्या में रामलला के दर्शन किए। दर्शन के बाद ठाकरे ने मीडिया से कहा कि भगवान राम का भव्य मंदिर बनवाने के लिए केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को संसद में कानून बनाना चाहिए। इस कानून के प्रस्ताव का शिव सेना सहयोग करेगी। 18 सांसदों के साथ अयोध्या आकर उद्धव ठाकरे राजनीति कर रहे हैं के सवाल पर ठाकरे ने कहा कि मैं राजनीति में हंू इसमें राजनीति करने की क्या बात है। ठाकरे ने कहा कि अयोध्या में राममंदिर के लिए देश भर के हिन्दुओं को एकजुट होना चाहिए। सवाल उठता है कि जो शिवसेना केन्द्र सरकार से कानून बनाने की मांग कर रही है वह संसद में कानून बनाने का प्रस्ताव पेश क्यों नहीं करती? जब लोकसभा में शिवसेना के 18 सांसद हैं तो फिर शिवसेना अपनी ओर से प्रस्ताव पेश कर सकती है। चूंकि शिवसेना भाजपा का सहयोगी संगठन है इसलिए शिवसेना का प्रस्ताव अपने आप में महत्वपूर्ण होगी। इस प्रस्ताव के माध्यम से यह पता चल जाएगा कि मंदिर बनाने के खिलाफ कौन कौन से दल हैं। जहां तक मंदिर निर्माण का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने का सवाल है तो यह मामला पिछले कई दशकों से न्यायालयों में लम्बित पड़ा हुआ है। इलाहबाद हाईकोर्ट ने जो आदेश दिया उसे किसी भी पक्ष ने स्वीकार नहीं किया। ऐसे में अब सरकार का ही दायित्व बनता है कि वह कानून लाकर अयोध्या में मंदिर निर्माण करवावे। इस मामले में शिवसेना अहम भूमिका निभा सकती है। यदि शिवसेना सिर्फ मांग करती रही तो यह मामला न्यायालयों में ही लम्बित रहेगा। जहां तक आपसी सहमति का सवाल है तो इस पर पहले भी बहुत मशक्कत हो चुकी है, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है। लोकसभा के हाल ही के चुनावों में जिस तरह भाजपा को सफलता मिली है उससे भाजपा पर मंदिर निर्माण का दबाव और बढ़ गया है।