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कश्मीर में धारा 370 और 35A हटने से डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान सार्थक हुआ -कर्नल संजय

कश्मीर में धारा 370 और 35A हटने से डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान सार्थक हुआ -कर्नल संजय 

17 अक्टूबर 1949 को "टेम्परेरी प्रोविंजन फॉर द स्टेट ऑफ द जम्मू और कश्मीर" के रूप में जम्मू कश्मीर राज्य को विशेषाधिकार राज्य का दर्जा दिलाने हेतु  संसद में गोपाल स्वामी आयंगर ने धारा 370 का प्रस्ताव लाया था जिसका डॉ॰ मुखर्जी ने पुरजोर विरोध किया था क्योंकि वे जम्मू कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाना चाहते थे। उस समय जम्मू कश्मीर का अलग झण्डा और अलग संविधान था। वहाँ का मुख्यमन्त्री (वजीरे-आज़म) अर्थात् प्रधानमन्त्री कहलाता था। संसद में अपने भाषण में डॉ॰ मुखर्जी ने धारा-370 को समाप्त करने की भी जोरदार वकालत की। अगस्त 1952 में जम्मू की विशाल रैली में उन्होंने अपना संकल्प व्यक्त किया था कि या तो मैं आपको भारतीय संविधान प्राप्त कराऊँगा या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये अपना जीवन बलिदान कर दूँगा। उन्होंने तात्कालिन नेहरू सरकार को चुनौती दी तथा अपने दृढ़ निश्चय पर अटल रहे। अपने संकल्प को पूरा करने के लिये वे 1953 में बिना परमिट लिये जम्मू कश्मीर की यात्रा पर निकल पड़े। वहाँ पहुँचते ही उन्हें गिरफ्तार कर नज़रबन्द कर लिया गया। 23 जून 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गयी।

भारतीय संविधान के 21वें भाग का 370 एक अनुच्छेद है। 21वें भाग को बनाया ही गया अस्थायी प्रावधानों के लिए था जिसे कि बाद में हटाया जा सके। इस धारा के 3 खंड हैं। इसके तीसरे खंड में लिखा है कि भारत का राष्ट्रपति जम्मू और कश्मीर की संविधान सभा के परामर्श से धारा 370 कभी भी खत्म कर सकता है। हालांकि अब तो संविधान के अनुसार विधानसभा रही नहीं, ऐसे में राष्ट्रपति को किसी से परामर्श लेने की जरूरत नहीं थी और अपने किये हुए वादा के अनुसार भाजपा ने धारा 370 हटा दिया। 

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान का सुखद परिणाम आज भारत वर्ष के प्रधान मंत्री मोदी जी ने धारा 370 को हटा कर दिया है। पूर्व सैनिक सेवा परिषद के प्रदेश अध्यक्ष कर्नल संजय ने कहा कि इसी धारा का गलत उपयोग कर वहाँ के अलगाववादी संगठनों ने हमारे काफी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया है ये उन सैनिकों के आत्मा को शांति भी मिल रही होगी। हम सभी पूर्व सैनिक भाजपा और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी को उनके साहसिक निर्णय के लिए धन्यवाद दे रहे है।