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विशेष- अटल बिहारी वाजपेयी की जिंदगी का सफर

समीर हुसैन(हिन्दुस्तानसवेरा)अटल बिहारी  वाजपेयी भरत के पूर्व प्रधानमंत्री थे। वे जीवन भर राजनीति में सक्रिय रहे। नेहरू के बाद वाजपेयी ही एक ऐसे नेता थे जिन्होने लगातार चुनाव जित कर  तिन बार प्रधानमंत्री का पद संभाला था।वाजपेयी ने कई विभिन्न संगठन के सदस्य बन कर अपनी सेवाए दि है। वह सिर्फ नेता नही एक प्रभवशाली कवि और प्रखर वक्ता भी थे।वह अपनी साफ छवी  व लोकतांत्रिक उदार विचारो के लिए जाने जाते थे उन्हे 2015 मे भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित भी किया गया।

अटल विहारी का शुरवाती जीवन

वाजपेयी जी का जन्म मघ्य प्रदेश के ग्वालीयर में 25 दिसंबर 1927 को एक साधारन परिवार में हुआ उनके पिता एक शिक्षक थे वह एक स्कुल में पढाते थे। अटल बिहारी अपने माता पिता के सात बच्चो में एक थे।वह अनी प्रारम्भीक शिक्षा पूरी करने के बाद वह आगे की पढाई करने के लिए लक्ष्मी बाई काॅलेज और कानपूर में डीएवी काॅलेज चले गए। यहा उन्होने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त किया। वह इतना में रूकने वाले नही  थे यहा पढाई पूरी होने के बाद वह लखनउ से एक काॅलेज में आवेदन भरा मगर किसी कारण वह अपनी पढाई जारी नही रख पाए और उन्हे पढाई छोडनी पडी। अब वह किसी नौकरी की तलाश करने लगे तभी उनहे  एक पत्रिका में बतौर संपादक नौकरी मिली..  उन्होने  शादी नही कि थी मगर बी एन कौल की दो बेटियो नमिता और नंदिता को गोद लिया था।

राजनैतिक सफर

वाजपेयी की राजनैतिक सफर की शुरूवात एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप् में हुई। 1942 में भारत छोडो आंदोलन केे दौरान वाजपेयी भी इस आंदोलन के हिस्सा थे अन्य नेताओं के साथ उन्हे भी गिरफतार कर लिया गया था।इस आंदोलन के दौरान उनही मुलाकात शयामा प्रसाद मुखर्जी से हुई, जो उस समय भरतीय जन संघ बी.जे.एस  के नेता थे।  वाजेपेयी उनके राजनैतिक एजेंडे में भी खुब साथ दिया स्वास्थ्य समस्या के कारण मुखर्जी की ज्ल्द मृत्यु हो गई अब बी.जे.एस में कोई नेतृत्व करने वाला  नेता नही था  तो इसकी  कमान वाजपेयी ने संभाली और संगठन के विचार और उद्देश्य को आगे बढाया वह अपने विचार और काम से सभी का दिल जित लिया था और वह बलराम पुर सीट से पहली बार सासंद चुने गए।1977 में जब मेरारजी देसाइ की सरकार बनी वाजपेयी  को विदेश मेंत्री बनाया गया।दो वशों बाद चीन के साथ संबंध पर चचो करने के लिए वह चिन गए।1971 में भरत -पाकिस्तान युद्ध के कारण प्रभावीत हुए व्यपारिक संबंध को सुधारने के लिए वाजपेयी ने पाकिस्तान की यात्रा कि।जब जनता पाट्री ने  आर एस एस  पर हमला किया त बवह मंत्री पद से इस्तेफा दे कर सन 1980 में नई राजनेतिक पाट्री भारतीय जनता पाट्री की निव रखने की पहल बीजेएस व आरएसएस से आए लालकृष्ण आडवाणी और भैरो सिंह शेखावत समेत कई लोगो ने रखी थी।पाटी बनने के बाद पाट्री का अध्यक्ष वाजपेयी को बनाया गया और वह पांच साल अध्यक्ष के पद पर रहे।

  • प्रधानमंत्री के पद पर

 1996 के लोकसभा चुनाव में पहली बार बीजेपी को सत्ता में आने का मौका मिला और अटल बिहारी वाजेपयी को प्रधानमंत्री चुना गया। लेकिन बहुमद सरकार मात्र 13 दिनो में गिर गई औश्र वाजेपयी को इस्तेफा देना पडा क्योकि बीजेपी बहुमद साबित करने में असफल होगयी थी।

1998 में फिर लोक सभा का चुनाव हुआ और विभिन्न पार्टियो के सहयोग से गठबंधन नेशनल डेमोक्रेटिक अलायन्स के साथ सरकार बनाने में सफल रही मगर  इस बार 13 महिने में सरकार गिर गई आॅल इंडिया द्रविड मुन्नेत्र काजगम ने सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था। 1999 में फिर एक बार लोक सभ का चुनाव हुआ और एनडीए  को बहुमत मिला व सरकार बनाने में सफलता हाशील हुई इस बार भी अटल बिहारी वाजपेयी प्रधान मंत्री पद के लिए चुने गए।अटल बिहारी कि सरकार ने सफल पांच वर्श पुरे किय। पांच साल पूरे करने वानी गैर कांग्रेसी पहली सरकार बनी जो पांच वर्षों का कार्यकाल पूरा किया हो।अपने पांच साल पूरे करने के बाद 2005 में एनडीए गठबंधन ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में पूरे आत्म विशवास के साथ चुनाव मैदान में उतर गए मगर इस बार निराषा हाथ लगी इस बार कांग्रस के यू.पी.ए गठबंधन ने प्रचम लहराया और सरकार बनाने में सफल रहे।

दिसंबर 2005 में अटल बिहारी वाजपेयी ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दि।

 उन्होने अनपे जिवन की आखरी सांस एम्स दिल्ली में लि 11 जून 2018 को उन्हे एम्स दिल्ली मे भर्ति कराया गया था लंबी बिमारी के बाद डनहोने 16 अगस्त 2018 को दुनिया को अलविदा कह दिया वे परलोक सिघार गये।17 अगस्त  को उनकी गोद लि हुई पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्या ने मुखाग्नि दी। राज घाट के पास शांति वन में स्मृति स्थल में उनकी समाधि बनायी गयी है 

           पुरस्कार और सम्मान

  •  देश के लिए अपनी अभूतपूर्व सेवाओ के चलते वर्श 1992 में पद्म विभूशण से सम्मानीत किया गयाा।
  • 1993 में उन्हे कानपुर विष्वविद्यालय से डाॅक्ट्ररेट की उपाधि का सम्मान प्राप्त हुआ।
  • 1994 में अटल बिहारी को लोकमान्य तिलक अवार्ड से सम्मानित किया गया।
  • 1994 सर्वश्रेश्ठ सांसद के सम्मान से नवाजा गया।
  • 2018 में देश के सबसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया।
  • 2015 में बंग्लादेश के द्वारा निबरेशन आवार्ड से नवाजा गया।