अजमेर में भाजपा के विधायकों और नेताओं का घमंड चूर। सत्ता पर इतनी मजबूत पकड़ होने के बाद भी आठों विधानसभा में हार गए। धरा रह गया स्मार्ट सिटी का काम भी। करीब एक लाख मतों से हारी भाजपा।

                                                【ये वक्त की पुकार है की कांग्रेस को वोट दो】   

                                                                राजस्थान में सिर्फ कांग्रेस   

SP Mittal                     

अजमेर में भाजपा के विधायकों और नेताओं का घमंड चूर। सत्ता पर इतनी मजबूत पकड़ होने के बाद भी आठों विधानसभा में हार गए। धरा रह गया स्मार्ट सिटी का काम भी। करीब एक लाख मतों से हारी भाजपा।

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अजमेर के लोकसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार रामस्वरूप लाम्बा की बुरी तरह हार हो गई है। लाम्बा की हार तब हुई है जब अजमेर में भाजपा मजबूत स्थिति में खड़ी थी। आठ में से सात भाजपा के विधायक हैं तथा जिला प्रमुख, अजमेर विकास प्राधिकरण, नगर निगम आदि पर भाजपा का कब्जा है। इतना ही नहीं पुष्कर, किशनगढ़, सरवाड़, केकड़ी, बिजयनगर आदि सभी स्थानीय निकायों पर भी भाजपा के सभापति और अध्यक्ष हैं। संसदीय क्षेत्र की सभी पंचायत समितियों पर भी भाजपा का कब्जा है। सात विधायकों में से दो स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री हैं तथा दो संसदीय सचिव बन कर राज्यमंत्री का सुख भोग रहे हैं। केन्द्र सरकार ने अजमेर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए भी करोड़ों रुपए की योजनाएं चला रखी हैं। लेकिन इसके बाद भी भाजपा की हार यह बताती है कि भाजपा के विधायकों और नेताओं की अपने क्षेत्रों में कोई पकड़ नहीं है। भाजपा ने गत लोकसभा का चुनाव अजमेर से 1 लाख 71 हजार मतों से जीता था। लेकिन इस बार इतनी बड़ी हार से जाहिर है कि भाजपा ने अपना जनाधार खो दिया है। उपचुनाव को जीतने के लिए सीएम वसुंधरा राजे ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी। सभी विधानसभा क्षेत्रों में मंत्रियों को प्रभारी नियुक्त किया गया था। इन मंत्रियों ने विधायकों के साथ मिल कर सत्ता का जम कर दुरुपयोग किया, लेकिन इसके बावजूद भी हार का ही सामना करना पड़ा। अजमेर संसदीय क्षेत्र का विधानसभा वार विश्लेषण इस प्रकार है।

किशनगढ़: किशनगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार लाम्बा को 4 हजार 732 मतों से हार का सामना करना पड़ा है, जबकि गत लोकसभा के चुनाव में भाजपा को किशनगढ़ से 23 हजार 984 मतों की बढ़त मिली थी, इसी प्रकार वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार भागीरथ चैधरी ने कांग्रेस के उम्मीदवार नाथूराम सिनोदिया को 31 हजार 74 मतों से पराजित किया था। इस विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश के चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने प्रभारी मंत्री की हैसियत से पूरी ताकत लगाई थी। विधायक चैधरी के कहने से ही किशनगढ़ नगर परिषद के पूर्व सभापति सुरेश टांक को भी किशनगढ़ में प्रचार से हटा दिया गया। पूरी रणनीति विधायक च ौधरी के इशारे पर ही बनी, लेकिन इसके बावजूद भी च ौधरी भाजपा को जीत नहीं दिलवा सके।

अजमेर उत्तरः- विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार रघु शर्मा 6 हजार 730 मतों की बढ़त ली हैं, जबकि गत लोकसभा के चुनाव में भाजपा को यहां से 35 हजार 778 मतों की बढ़त मिली थी और इससे पहले विधानसभा के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार वासुदेव देवनानी ने कांग्रेस को 20 हजार 479 मतों से हराया था। देवनानी यहां से लगातार तीसरी बार विधायक बने, इसलिए उन्हें स्वतंत्र प्रभार का स्कूली शिक्षा मंत्री बनाया गया। अपने विधानसभा क्षेत्र से बढ़त को बनाए रखने के लिए देवनानी ने कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन ब्राह्मण समुदाय और राजपूत समाज की नाराजगी के चलते देवनानी की लुटिया डूब गई। हालांकि देवनानी को बचाने के लिए केबिनेट मंत्री अरुण चतुर्वेदी ने जोर लगाया, लेकिन इस बार पूरे क्षेत्र में देवनानी का जमकर विरोध हुआ। लेकिन देवनानी के लिए यह संतोष की बात रही कि हाथीखेड़ा, बोराज, काजीपुरा, अजयसर, खरेकड़ी आदि ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा को करीब 2 हजार मतों की बढ़त मिली है। इन गांव की जिम्मेदारी भाजपा के वरिष्ठ नेता सुभाष काबरा के पास थी।

अजमेर दक्षिणः- इस विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार लाम्बा को 13 हजार 70 मतों का नुकसान हुआ है। जबकि गत लोकसभा के चुनाव में भाजपा को 28 हजार 760 मतों से बढ़त मिली थी और इससे पहले विधानसभा के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार श्रीमती अनिता भदेल ने 23 हजार 158 मतों से कांग्रेस के उम्मीदवार हेमंत भाटी को हराया था। भदेल भी लगातार तीसरी बार विधायक चुनी गई, इसलिए भदेल को भी महिला एवं बाल विकास विभाग का स्वतंत्र प्रभार का मंत्री बनाया गया। उपचुनाव को जीतने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी को इस विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया, लेकिन किरण माहेश्वरी की भी भाग दौड़ काम नहीं आई।

पुष्कर विधानसभाः- पुष्कर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार रघु शर्मा 11 हजार 288 मतों से आगे रहे हैं, जबकि गत लोकसभा के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार 13 हजार 141 मतों से आगे रहे। विधानसभा के चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार सुरेश रावत ने कांग्रेस की श्रीमती नसीम अख्तर को 41 हजार 290 मतों से पराजित किया था। पुष्कर से भाजपा को जीत दिलवाने के लिए परिवहन मंत्री यूनुस खान को प्रभारी मंत्री बनवाया गया। लेकिन इतनी बुरी हार से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस विधानसभा क्षेत्र के हालात कैसे हैं।

नसीराबादः- इस विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार ने 3 हजार 875 मतों की बढ़त हांसिल की है। जबकि गत लोकसभा के चुनाव में भाजपा को यहां से 10 हजार 992 मतों की बढ़त मिली थी। इसी प्रकार विधानसभा के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार सांवरलाल जाट 28 हजार 900 मतों से विजय हुए थे। गुर्जर मतदाताओं की संख्या को देखते हुए नसीराबाद में सरकार के मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर को प्रभारी बनाया गया था। नसीराबाद से भाजपा की हार इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि भाजपा उम्मीदवार रामस्वरूप लाम्बा के पिता और पूर्व सांसद स्वर्गीय सांवरलाल जाट का यह निर्वाचन क्षेत्र था। यानि लाम्बा को अपने घर में ही हार का सामना करना पड़ा है। 

मसूदाः- मसूदा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस को 6 हजार 86 मतों की बढ़त मिली है, जबकि गत लोकसभा के चुनाव में भाजपा को यहां से 8 हजार 968 मतों की बढ़त मिली थी। विधानसभा का चुनाव भी भाजपा की उम्मीदवार श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा ने 4 हजार 47 मतों से जीता था। हालांकि मसूदा में भाजपा के नेता भंवरसिंह पलाड़ा सक्रिय रहे लेकिन माना जा रहा है कि उनकी सक्रियता मन से नहीं थी। हालांकि पंचायतीराज मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने इस विधानसभा क्षेत्र से जीत के लिए पूरा जोर लगाया, लेकिन राठौड़ को भी सफलता नहीं मिली। मसूदा में जीत के लिए भाजपा के बागी नवीन शर्मा को भी शामिल किया गया, लेकिन फिर भी भाजपा की पार नहीं लगी। 

केकड़ीः- इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को 34 हजार 790 मतों से हार का सामना करना पड़ा है। जबकि गत लोकसभा के चुनाव में भाजपा को  13 हजार 813 मतों की बढ़त मिली थी। इसी प्रकार विधानसभा के चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार शत्रुघ्न गौतम ने कांग्रेस को 8 हजार 863 मतों से हराया था। तब भाजपा से हारने वाले रघु शर्मा ही थे, लेकिन लोकसभा के उपचुनाव में रधु ने अपनी पिछली हार का बदला चुका लिया है। केकड़ी में भी भाजपा की हार बहुत मायने रखती है।

दूदूः- इस विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार रघु शर्मा ने भाजपा को 5 हजार 831 मतों से हराया है। जबकि गत लोकसभा के चुनाव में भाजपा को 26 हजार 428 मतों की बढ़त थी। इसी प्रकार विधानसभा के चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार प्रेम चंद बैरवा ने कांग्रेस के हजारीलाल नागर को 33 हजार 720 मतों से पराजित किया था। 

एस.पी.मित्तल) AJMER