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स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड अम्बेसडर अमिताभ बच्चन के गाँव में, नहीं है एक भी शौचालय!


प्रतापगढ़. देश में स्वच्छता की अलख जगाने वाले के पैतृक गांव में एक भी शौचालय नहीं है। गांव की महिलाएं-पुरुष शौच के लिए बाहर जाते हैं। यूपी के प्रतापगढ़ जनपद का बाबूपट्टी गांव अमिताभ का पैतृक गांव है। इस गांव में इतनी गंदगी है कि लोगों का जीना मुहाल हो गया है। लोगों ने कई बार अधिकारियों से शौचालय की मांग की लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ।

218 परिवार के गांव में नहीं है एक भी शौचालय,

ग्रामीणों ने बताया - गांव में कुल 218 परिवार हैं। जिनके लिए शौचालय की अर्जी दी गई थी। स्वच्छ भारत मिशन की टीम के सर्वे में कुल 48 शौचालय स्वीकृत हुए। इसके बावजूद, आज तक गांव में एक भी शौचालय नहीं बनवाया जा सका है।

प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है गांव,

यह गांव भले ही सदी के अमिताभ बच्चन व हरिवंश राय बच्चन का रहा हो लेकिन बुनियादी जरूरतों की पूर्ति कभी नहीं हुई। बारिश होते ही सड़कों की हालत इतनी खराब हो जाती है कि उस पर चलना मुश्किल हो जाता है। शौच के लिए महिलाओं को बाहर जाना पड़ता है।

जल्द होगा खुले में शौच से मुक्त गांव,

डीएम प्रतापगढ़ शंभू कुमार बताया- पूरे जनपद में तकरीबन 500 गांव खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं। गांव ओडीएफ घोषित किए जा चुके हैं। जल्द ही बाबू पट्टी को भी खुले में शौच से मुक्त करवाया जाएगा। गांव सभी पात्र जरूरतमंदों को शौचालय उपलब्ध करवाया जाएगा।

अमिताभ कभी नहीं गए अपने गांव,

बिग बी के दादा स्व. लाला प्रताप नरायण श्रीवास्तव यहां रहते थे। बताया जाता है कि लाला प्रताप नारायण के कोई सन्तान नहीं हो रही थी। जिसके बाद एक पंडित ने उन्हें उपाय बताया। पंडित ने सुरसती देवी और लाला प्रताप को 3 बर्तन दिए और कहा- इसे लेकर अपने घर से दक्षिण की तरफ जाओ, जहां शाम हो जाए, वहीं रुक जाना। वहीं घर बनाकर हरिवंश पुराण सुनना तो संतान सुख मिलेगा।

वह दोनों बर्तन लेकर गांव से पैदल चले और शाम तक करीब 54 किमी दूर इलाहाबाद के चक जीरो रोड पहुंचे और रुक गए। यहां पर घर बनवा लिया और पत्‍नी सुरसती देवी के साथ रहने लगे।

सालों पहले लिया था गांव के विकास का जिम्मा,

साल 2006 में जया बच्चन बाबू पट्टी गांव में गई थी। इस दौरान ग्रामीणों ने उन्हें बहू का दर्जा देते हुए खूब सम्मान दिया था। जया के साथ भी थे। उन्होंने उस दौरान गांव के विकास का वादा किया था, साथ ही ससुर व प्रसिद्द कवि हरिवंश राय बच्चन की याद में गांव को एक पुस्तकालय की सौगात दी थी। लेकिन उसके बाद वह कभी लौट कर नहीं आई। ग्रामीण रामकुमार श्रीवास्तव बताते हैं- पुस्तकालय बन गया लेकिन उसमे आज तक किताबें नहीं आई।