इलाहाबाद की जिला कांग्रेस कमेटी ने भेजा इनका नाम .११ मार्च को होगा उपचुनाव.२० फरवरी है नामांकन की आखिरी तारीख,लखनऊ। इलाहाबाद के कांग्रेसियों ने एक बार फिर प्रियंका गांधी का नाम उछाला है।


लखनऊ। इलाहाबाद के कांग्रेसियों ने एक बार फिर प्रियंका गांधी का नाम उछाला है। इसके पहले भी यहां के कुछ कांग्रेसियों ने प्रियंका गांधी का नाम जिस तरीके से उछाला था, इस बार उसमें बडा फर्क नजर आ रहा है। पहले इस नाम को उछालने के पीछे इनका नारा रहता था कि प्रियंका गांधी लाओ और कांग्रेस को बचाओ। 


इसका अर्थ सामान्यतः यही लगाया जाता रहा है कि राहुल गांधी के रहते कांग्रेस का भट्ठा बैठ जाने के आसार है। ऐसे में नेहरू-गांधी परिवार में प्रियंका गांधी की एक मात्र ऐसी हैं, जो कांग्रेस की डूबती नैया को पार लगा सकती हैं। इसके लिये पोस्टर आदि भी छपवा कर मुहिम जैसा कुछ शुरू करने की कोशिश भी की गयी थी। लेकिन, ‘ऊपर‘ से सारा मामला टांय टांय फिस्स कर दिया गया था।


लेकिन, कांग्रेस में हालात अब पहले जैसे नहीं रह गये है। राहुल गांधी के हाथों में अब कांग्रेस की कमान आ गयी है। गुजरात के चुनाव में मोदी और शाह को पसीना छुडा देने के बाद आम आदमी की नजर में भी उनकी छवि अब पहले जैसी नहीं रह गयी है। वह जुझारू नेता माने जाने लगे हैं। इसलिये अब पहले जैसी कोई बात नहीं रह गयी है।


दूसरी बात यह कि फूलपुर कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है। पं0 जवाहर लाल नेहरू यहीं से चुनाव लडकर जीतते रहे हैं। इस क्षेत्र में उनकी इतनी ज्यादा लोकप्रियता रही है कि हिंदूकोड बिल जैसे मुद्दे को लेेेेेेेेेकर उनके खिलाफ चुनाव लडने वाले इलाहाबाद के प्रख्यात संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी भी हार गये थे। नेहरू के बाद उनकी बहन श्रीमती विजय लक्ष्मीपंडित भी यहां से चुनाव जीतकर सांसद बनी थी। उनके बाद इस सीट से नेहरू गांधी परिवार के ही किसी को चुनाव लडाने की सिर्फ चर्चा ही होती रही है। इससे ज्यादा नहीं। लेकिन, यह तो आज भी माना जाता है कि किंन्हीं कारणों से सोनिया गांधी को इलाहाबाद से भावनात्मक लगाव तो है ही।


अब राहुल गांधी की सियासी तासीर के बढने और तस्वीर बदलने से इस संभावना को बल मिल मिल रहा है कि 11 मार्च को इसी सीट पर होने जा रहे उपचुनाव में प्रियंका गांधी कांग्रेस की उम्मीदवार हो सकती है। इस संभावना को इसलिये भी बल मिल रहा है कि यदि ऊपर का संकेत न मिलता, तो इलाहाबाद कांग्रेस कमेटी की बैठक में ऐसा कोई प्रस्ताव पारित कर:ऊपर‘ भेजा ही नहीं जा सकता था। इसलिये कि लोग आज भी कांग्रेस को ‘जी हुजूर‘ वाली पार्टी ही मानते है।



इस संभावना को बल एक वजह यह भी है कि इस सीट से प्रियंका गांधी के खडी हो जाने से वह विपक्ष की साझा उम्मीदवार भी हो सकती हैं। यदि ऐसा न भी हो सका, तो भी प्रियंका गांधी की अपनी खुद की शख्सियत का जादू तो है ही। यह सीट भाजपा की कभी नहीं रही है। केशव प्रसाद मौर्य के यहां से सांसद होने की असल वजह नमो लहर ही रही है, उसकी कृपा से पंगु भी पहाड लांघ गये हैं। इसके आगे केशव प्रसाद मौर्य जैसी शख्सियत कहीं नहीं ठहर सकती हैं। सितारों ने उनका ज्यादा साथ दिया है।


बहरहाल, यहां से प्रियंका गांधी के चुनाव जीतने से 2019 में प्रदेश में कांग्रेस की फिजा ही एकदम बदल जायेगी। इसका  भरपूर और बडा अप्रत्याशित सियासी फायदा यहां की बुझती कांग्रेस को मिल सकता है। लगता है कि कुछ ऐसा ही सोचकर सोनिया गांधी ने प्रियंका गांधी के बारे में ऐसा कुछ करने का संकेत दिया होगा।


जो भी हो। इस संबंध में आज हुई इलाहाबाद की जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक में फूलपुर में होने वाले उप चुनाव में प्रियंका गांधी को पार्टी का उम्मीवार बनाये जाने के लिये एक प्रस्ताव पारित कर हाईकमान के पास भेज दिया गया है। 20 फरवरी को नामांकन की अंतिम तिथि है।


इस खबर की पुष्टि करते हुए इलाहाबाद जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव हसीब अहमद ने कहा है कि इस बैठक में कई पदाधिकारियों के साथ उन्होंने खुद जिला अध्यक्ष के सामने एक प्रस्ताव पारित कियाण् इस प्रस्ताव में फूलपुर उपचुनाव में प्रियंका गांधी को लड़ाने की बात पर सहमति बनीण् ताकि कांग्रेस के लिए संजीवनी प्रियंका साबित हो सकेंण् 


इस संबंध में पूर्व प्रदेश प्रवक्ता अभय अवस्थी बाबा ने भी कहा है कि कार्यकर्ताओं की भावना को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव आया हैण् इसे अगर कांग्रेस पार्टी स्वीकार कर लेती है तो 2019 के चुनाव का आगाज फूलपुर से हो जाएगा