चैनपुर जलापूर्ति योजना के कामगारों को नहीं मिल रहा मानदेय, सभी ने छोड़ा कामकाज

                                    चैनपुर जलापूर्ति योजना के कामगारों को नहीं मिल रहा मानदेय, सभी ने छोड़ा कामकाज  

डालटनगंज, 6 दिसम्बर (थर्ड आई): चैनपुर जलापूर्ति योजना से जुड़े कामगारों को लगातार आश्वासन देकर अवैतनिक काम कराया जा रहा है। जलकर का लाखों रूपया बकाया रहने के बावजूद उन्हें सिर्फ छलावा देकर काम पर रखा गया था, लेकिन बुधवार को उनका धैर्य जवाब दे दिया और सारे कर्मी कामकाज ठप कर हड़ताल पर चले गए। 

चैनपुर जलापूर्ति योजना के लिए शुरूआत में छह से सात कर्मियों को रखा गया था, लेकिन मानदेय नहीं मिलने के कारण एक-एक कर्मी काम छोड़ते चले गए। चार कर्मियों के भरोसे इंटकवेल से लेकर जलापूर्ति केन्द्र तक काम कराया जा रहा था, लेकिन इसी बीच मानदेय नहीं मिलने पर दो कर्मियों ने श्रम कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज करायी। शिकायत के बाद दोनों कर्मियों को कुछ भुगतान किया गया, लेकिन उन्हें काम से हटा दिया गया। 

इसके बाद बचे दो कर्मियों के भरोसे किसी तरह काम खींचा गया। 24 घंटे उनसे सेवा ली गयी, लेकिन मानदेय नहीं दिया जा रहा था। इससे लगातार आर्थिक संकट झेल रहे दोनों कर्मियों का सब्र जवाब दे दिया और वे हड़ताल पर चले गए। 

                                                               बहुपंचायत भंग होने पर वार्ड पार्षद और मुखिया देख रहे कामकाज

जलापूर्ति केन्द्र का संचालन पूर्व में बहुपंचायत करा रही थी, लेकिन जैसे ही बहुपंचायत की अध्यक्ष पूनम सिंह ने पद से इस्तीफा दिया, वार्ड पार्षद और तीन मुखिया की नयी कमिटी बनायी गयी। कर्मियों का आरोप है कि नयी कमिटी भी उन्हें मानदेय देने से परहेज करती दिख रही है, ऐसे में काम करना मुश्किल लग रहा था।

कौन करेगा कर्मियों के मानदेय भुगतान?

अब सवाल उठता है कि कर्मियों के मानदेय का भुगतान आखिर कौन करेगा? असहयोग का हवाला देकर बहुपंचायत की अध्यक्ष पूनम सिंह ने पीएचइडी के कार्यपालक अभियंता को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में इतना जरूर बताया था कि जलकर का तीन लाख रूपया से अधिक का बकाया है, लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी नहीं दी थी कि किस कर्मी का कितना बकाया है। अगर इसका हवाला दिया गया होता तो जलकर वसूल कर कर्मियों को उनके बकाये मानदेय का भुगतान किया जाता।

इधर, कर्मियों के अनुसार नयी कमिटी द्वारा मानदेय भुगतान तीन-चार माह बाद से करने का निर्णय भी अटपटा लगता है। अगर किसी से काम लेकर उसे चार माह बाद मानदेय दिया जायेगा तो वह अपना गुजारा कैसे करेगा?