संगोष्ठी गुरुवार को दीनदयाल उपाध्याय नगर भवन में उद्घाटित,जुटे देश विदेश के विद्वान, दो दिनों तक होगा मंथन।

अनुप्रयुक्त विज्ञान में हो रहे शोधों की अद्यतन प्रवृतियों पर  भौतिक विज्ञान विभाग ,जी एल ए कॉलेज,नीलाम्बर पीताम्बर विश्वविद्यालय की ओर से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी गुरुवार को दीनदयाल उपाध्याय नगर भवन में उद्घाटित,जुटे देश विदेश के विद्वान, दो दिनों तक होगा मंथन।

 उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने कहा-अन्तर अनुशासनिक अध्ययन आज के सन्दर्भ में अत्यंत प्रासंगिक: डॉ नितिन चटटोपाध्याय 

विशिष्ट अतिथि जाधवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता के डॉ नितिन चट्टोपाध्याय ने कहा कि आज का समय विज्ञान और तकनीक का समय है और इस समय मे अन्तःनुशासनिक शोधों की प्रासंगिकता बढ़ी है।यह बिश्वविद्यालय इस दिशा में अच्छा कार्य कर रहा है।इसमें सभी के सहयोग की आवश्यकता है।

विज्ञान को और विशेषीकृत किये जाने की जरूरत:डॉ फिरोज अहमद

विशिष्ट अतिथि नीलाम्बर पीताम्बर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ एम फिरोज अहमद ने कहा कि विज्ञान के विभिन्न विषयों को विशेषीकृत कर पढ़ाये जाने की जरूरत है।जिस प्रकार चिकित्सा विज्ञान में विशेषीकृत पढ़ाई के लिए अलग अलग विभाग हैं,वैसे ही भौतिकी,रसायन,गणित,प्राणी विज्ञान,वनस्पति विज्ञान में भी विशेषीकृत विभाग खोले जाने की जरूरत है।

आज की तकनीकी क्रांति भौतिकी और गणित के मेल से हुई है: डॉ गौरीशंकर सिंह

विज्ञान में हो रहे शोध की अद्यतन प्रवृत्तियों पर भौतिक विज्ञान विभाग की ओर से  आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में  बीज वक्तव्य देते हुए आई आई टी रूरकी के सेवानिवृत्त प्रोफेसर गौरीशंकर सिंह ने कहा कि

चुम्बक,बिजली और प्रकाश में खास संबंध है।जाड़े में ऊनी कपड़ों से भी कई बार बिजली कौंधती है।आवेशित कणों को हिलाने से एक तरह की तरंग निकलती है और इस तरंग को फैलने के लिए किसी माध्यम की जरूरत नहीं होती है ।आसमान से बिजली जब धरती की ओर आती है तो उसकी दिशा एक होती है।मोबाइल,कंप्यूटर,टेलीविजन आदि मैक्सवेथ के सिद्धांत के अनुसार तरंगों की तीव्रता के आधार पर कार्य करते हैं। आज की तकनीकी क्रांति भौतिकी में गणित के मिलान से हुई है।आज की पूरी सभ्यता इन दोनों अनुशासनों से काफी प्रभावित है।

 शून्य की अवधारणा सबसे पहले भारत मे आई,यह बात सबसे पहले अमेरिकी भौतिकशास्त्री जार्ज गैमो ने अपनी पुस्तक में बताई।

हमारा अभी का विज्ञान महाविस्फोट के सिद्धांत के आधार पर पृथ्वी और जीवन का काल तय करता है।ब्रह्मांड की काल गणना भारतीय संस्कृति के मिथकों में भी मिल जाती है।आज विकास के दौर में नई चीजों पर गहन शोध की आवश्यक्ता है।योग की वैज्ञानिकता पर भी शोध की आवश्यकता है।

आज का अनुप्रयुक्त विज्ञान परंपरागत विज्ञान का ही चेहरा है:कुलपति

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए नीलाम्बर पीताम्बर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एस एन सिंह ने कहा कि

 हमारी भारतीय विरासत अत्यंत समृद्ध रही है।विश्वविद्यालय का काम ऐसी विरासतों पर शोध को बढ़ावा देना है। इसी  दृष्टि से यह विज्ञान संकाय का यह पहला राष्ट्रीय सेमिनार है ।अनुप्रयुक्त विज्ञान विज्ञान का चेहरा है।अनुप्रयुक्त विज्ञान एक प्रकार की जुगाड़ टेक्नोलॉजी है।गैलीलियो पहले अप्लाइड साइंटिस्ट थे,उन्होंने टेलिस्कोप का अविष्कार कर तत्कालीन पारंपरिक मान्यताओं को चुनौती दी ।विद्युत ऊर्जा  एल ई डी के माध्यम बचाई जा रही है ,यह अप्लाइड साइंस की बड़ी उपलब्धि है।इलॉट्रॉनिक उपकरणों के विकास ने मनुष्य और समाज को अत्यंत गहराई से प्रभावित किया है,दुनिया रोज बदल रही है,चीजें नैनो और सुविधाजनक होती जा रही है ।

संगोष्ठी के शुरुआत में संयोजक डॉ आर के झा ने राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला । अतिथियों का स्वागत जी एल ए कॉलेज के प्राचार्य डॉ आई जे खलखो ने किया।उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ संजीव कुमार सिंह ने किया और धन्यवाद ज्ञापन साइंस डीन डॉ महेंद्र राम ने किया।

इस अवसर पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डॉ कुमार वीरेन्द्र, दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ एस के मंडल,दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ अमित कुमार वर्धन,बी एस आई कोलकाता के डॉ पी पी घोषाल ,इरीट्रिया नार्थ ईष्ट अफ्रीका के डॉ रामाशंकर, आई आई टी पटना के डॉ ओमप्रकाश ,रांची विश्वविद्यालय के डॉ आशीष कुमार झा,सिंडिकेट सदस्य अरुण कुमार सिंह,रेणुका पांडेय,प्रो सुभाष , मिश्र,प्रो के के मिश्र,डॉ एन के सिंह,डॉ ए एस उपाध्याय,प्रो अवध किशोर सिंह,डॉ एस पी सिन्हा, प्रो रामानुज शर्मा,डॉ अनिता सिन्हा, डॉ एस के सिंह,डॉ एस के मिश्रा, डॉ विमल कुमार सिंह,डॉ मोहिनी गुप्ता,डॉ धर्मेंद्र कुमार सिंह,डॉ राजेन्द्र सिंह,प्रो कुर्रतुल्लाह,डॉ सुवर्ण महतो, डॉ जसवीर बग्गा,डॉ सुनीता कुमारी,डॉ मंजू सिंह ,डॉ विभेष चौबे सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी,शोध छात्र आदि उपस्थित थे।