पलामू जिले में सुखाड़ का जायजा लेने दिल्ली से आयी केन्द्रीय टीम को ने आज दूसरे दिन कई प्रखंडों का दौरा किया और खेतों में जाकर फसलों की वास्तविक स्थिति जांची।

डालटनगंज, 8 दिसंबर: पलामू जिले में सुखाड़ का जायजा लेने दिल्ली से आयी केन्द्रीय टीम को ने आज दूसरे दिन कई प्रखंडों का दौरा किया और खेतों में जाकर फसलों की वास्तविक स्थिति जांची। शुक्रवार को चैनपुर और रामगढ़ के कुछ इलाकों में जायजा लेने के बाद रात में टीम लौट गयी। शनिवार की सुबह से ही टीम चैनपुर के बचे हिस्से के साथ-साथ सदर प्रखंड के कई गांवों के खेतों की फसलों की वास्तविकता का आकलन किया।

                                                     पर्याप्त वर्षा का अभाव, चार वर्षों से मर जा रही धान फसलें 

टीम ने चैनपुर प्रखंड के नेउरा, गरदा, सेमरा, खुरा और सदर प्रखंड के सुआ पंचायत का दौरा किया। इस दौरान टीम के सदस्यों ने फसल का नमूना भी एकत्रित किया। टीम के सदस्यों ने किसानों से सुखाड़ के संबंध में चर्चा की। किसानों ने जिले के पदाधिकारियों के समक्ष केंद्रीय टीम के सदस्यों को बताया कि जिले में पर्याप्त मात्रा में वर्षा नहीं होने से पिछले तीन-चार सालों से धान मर जा रहा है। किसान नंदकेश्वर सिंह, नंदू सिंह और उपाध्याय सिंह ने कहा कि वे सभी पिछले तीन सालों से फसल बीमा करा रहे हैं, लेकिन अभी तक एक भी वर्ष फसल बीमा की राशि नहीं मिली है। 

                                                        वर्षा जल रोकने के साधनों पर कर लिया गया है अतिक्रमण 

केंद्रीय टीम के सदस्यों को किसानों ने बताया कि पंचायत में वर्षा आधारित जल को रोकने की कोई व्यवस्था नहीं है। पंचायत में जितना भी आहर, पोखर और तालाब है, उन सभी का अतिक्रमण कर लिया गया है। अगर प्रशासन उन सभी स्थानों से अतिक्रमण हटा देती तो इससे खेती करने में सुविधा होती। किसानों बताया कि सरकार के स्तर से गांव स्तर पर डोभा का निर्माण कराया गया है, लेकिन वह अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। डोभा के स्थान पर सरकार किसानों को कुंआ उपलब्ध करा देती, तो इससे खेती करने में सुविधा होती। टीम के साथ-साथ चल रहे जिला परिषद उपाध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि पलामू में लगातार सुखाड़ व अकाल की स्थिति बनी रहती है। सुखाड़ से निपटने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने की जरूरत है, ताकि किसानों का पलायन रूक सकें। 

                                                     मनरेगा से मिलती है काफी कम राशि, भुगतान का तरीका पेचिदा 

टीम के सदस्यों ने जब किसानों से पूछा कि मनरेगा में काम क्यों नहीं करते हैं ? तो किसानों ने बताया कि मनरेगा में काफी कम राशि मिलती है, साथ ही पैसों का भुगतान होने में भी काफी देर होती है। 

                                                                                  टीम में कौन-कौन?

टीम में वीरेंद्र सिंह, सुरेश मिंज, सुभाष सिंह (संयुक्त कृषि निदेशक झारखंड सरकार), आई.आर. एस चिंयाकी के डा. नजरूल के अलावा जिले के अधिकारियों में उपविकास आयुक्त बिंदुमाधव सिंह, सदर एसडीओ नंदकिशोर गुप्ता, बीडीओ जयकुमार राम, सीओ शिवशंकर पांडेय, अंचल निरीक्षक विकास पांडेय, प्रभारी प्रखंड कृषि पदाधिकारी इंद्रेश प्रजापति, जनसेवक वीरेंद्र कुमार, कुंदन कुमार, ई ब्लाॅक मैनेजर अभिषेक कुमार प्रखंड 20 सूत्री समिति सदस्य राजेश विश्वकर्मा के अलावा किसान उदय सिंह, राजदुलारा सिंह, शंकर राम, राजीव रंजन यादव, संजय रवि, मुखिया चिंता देवी, रिंकू पासवान, बसंत राम, अखलेश उरांव, पार्वती देवी, धर्मेंद्र कुमार, पिन्टू कुमार आदि उपस्थित थे।