पलामू-जल संरक्षण के लिए मेग्सेसे अवार्ड से सम्मानित जलपुरुष डॉ राजेंद्र सिंह ने कहा है कि पानी बचाने के लिए अगर लोग समय रहते नहीं जागे तो हालात बिगड़ जाएंगे। पानी के लिए गली गली संघर्ष होगा और दुनिया में तीसरे युद्ध की नौबत आएगी। इसलिए सरकार और समाज को मां गंगा के साथ छोटी नदियों, तालाब और झील से लेकर एक-एक बूंद पानी बचाना होगा। श्री सिंह शुक्रवार को टाउन हॉल में आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे । कार्यक्रम की अध्यक्षता पंकज श्रीवास्तव ने किया । गोष्ठी में स्थानीय लोगों ने भी अपनी व्यथा को उजागर किया ।

पलामू -जल संरक्षण के लिए मेग्सेसे अवार्ड से सम्मानित जलपुरुष डॉ राजेंद्र सिंह ने कहा है कि पानी बचाने के लिए अगर लोग समय रहते नहीं जागे तो हालात बिगड़ जाएंगे। पानी के लिए गली गली संघर्ष होगा और दुनिया में तीसरे युद्ध की नौबत आएगी। इसलिए सरकार और समाज को मां गंगा के साथ छोटी नदियों, तालाब और झील से लेकर एक-एक बूंद पानी बचाना होगा। श्री सिंह शुक्रवार को टाउन हॉल में आयोजित गोष्ठी  को संबोधित कर रहे थे । कार्यक्रम की अध्यक्षता पंकज श्रीवास्तव ने किया । गोष्ठी में स्थानीय लोगों ने भी अपनी व्यथा को उजागर किया । 

 राजेन्द्र सिंह ने कहा कि गंगा इस देश के लिए सिर्फ एक बहती हुई,भौगोलिक जलधारा नहीं है। यह एक तहजीब, एक संस्कृति की पहचान है । जो लोग गंगा के किनारे बसे इलाहाबाद या बनारस नहीं गए,वे गंगा-जमुनी तहजीब नहीं समझ सकते। उन्होंने कहा कि नील नदी के किनारे मिश्र की सभ्यता का विकास हुआ तो टीबर नदी के किनारे रोम की सभ्यता का विकास हुआ।हमारी धरती पर सिन्धु नदी के किनारे सिन्धु घाटी की सभ्यता का विकास हुआ। मसलन कि सभ्यताओं के विकास की जननी नदी ही है , लेकिन दुर्भाग्य के साथ यह कहना पड़ रहा है कि आज ये शहर और मनुष्य की अपसंस्कृति ने गंगा की नैसर्गिकता, अविरलता के सामने चुनौती पेश कर दी है। आज देश की सभी प्रमुख नदियों का हाल वही है । उन्होंने कहा कि आज जरूरत है सभी लोगों को अपनी पुरानी और पारम्परिक साझी विरासत की सोच को विकसित करने और उसे अपनाने की। तभी हमारा और हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रह सकेगा ।

जलपुरुष  राजेन्द्र सिंह कहते हैं कि नदियाँ नहीं रहेंगी तो सभ्यताएँ विनष्ट हो जाएँगी। वह विभिन्न शहरों में नदी-नालों का अतिक्रमण किए जाने को सिर्फ वैधानिक मसला नहीं मानते, उसे सभ्यता के सामने एक चुनौती के रूप में देखते हैं । सिर्फ देखते नहीं, एक सार्थक हस्तक्षेप करते हैं । वह गंगा के  उद्गम स्थल गोमुख ये गंगासागर तक की 'गंगा सद्भावना यात्रा' पर निकल पड़े हैं । अपनी गंगा सद्भावना यात्रा के क्रम में वह आज मेदिनीनगर में थे । उन्होंने स्थानीय जीवन रेखा कोयल को एक प्रतीक के  रूप में लिया और सैकड़ों पुरूष और नारी के  साथ मार्च किया। कोयल तट पर श्री सिंह ने सभी को संकल्प दिलाया कि वह न तो स्वयं कोयल को गंदा करेंगे और न किसी को करने देंगे और सब मिलकर कोयल को साफ रखने के अभियान में जुट जाएंगे । इस दौरान सभी ने एक साथ मिलकर "कोयल बचाने की जंग में, हम सब तेरे संग में" का  नारा भी लगाया । 

कार्यक्रम में नगर निगम के उपमहापौर  राकेश कुमार सिंह उर्फ मंगल सिंह, वरिष्ठ पत्रकार मधुकर, समाजसेवी राम नरेश नरेश स्वर्णकार, अरुण तिवारी, हसमत रब्बानी, युवा जागृति केंद्र के राजन सिन्हा, नई संस्कृति सोसायटी के अजीत पाठक, मिशन समृद्धि शीला श्रीवास्तव, स्वर्णलता रंजन, इप्टा से उपेंद्र मिश्रा, आलोक वर्मा,  केडी सिंह, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अविनाश वर्मा, गोकुल बसंत, शिवशंकर प्रसाद, शालिनी श्रीवास्तव, दीप्ति शरण, परशुराम ओझा हरिवंश प्रभात, अर्जुन कुमार, हेमंत कुमार मिश्रा, रंजीत कुमार के अलावे इग्नू में ग्रामीण विकास और जल संरक्षण की पढ़ाई कर रहे छात्र छात्राओं समेत काफी संख्या में लोग उपस्थित थे ।