रांची: पांच राज्‍यों में चुनाव के नतीजे आने के बाद झारखंड में सियासी फेरबदल की चर्चा उफान पर है। चर्चा इसे लेकर हो रही है कि सीएम रघुवर दास को बदला जा सकता है और भाजपा 2019 के चुनावों के पहले किसी आदिवासी चेहरे को सीएम के तौर पर आजमा सकती है।

रांची: पांच राज्‍यों में चुनाव के नतीजे आने के बाद झारखंड में सियासी फेरबदल की चर्चा उफान पर है। चर्चा इसे लेकर हो रही है कि सीएम रघुवर दास को बदला जा सकता है और भाजपा 2019 के चुनावों के पहले किसी आदिवासी चेहरे को सीएम के तौर पर आजमा सकती है। इन सबके बीच भाजपा में राज्‍य के पूर्व मुख्‍यमंत्री अर्जुन मुंडा का भी कद बढ़ गया है। श्री मुंडा अज्ञातवास में रह रहे थे लेकिन चुनाव के नतीजे आने के बाद अमित शाह की बैठक में उन्‍हें बुलाया गया। इससे पहले पार्टी में उन्‍हें अहमियत मिलनी लगभग बंद सी हो गई थी। हालांकि छत्‍तीसगढ़ में हुए चुनावों में उन्‍हें पार्टी के स्‍टार प्रचारक की जिम्‍मेवारी सौंपी गयी थी।

                                                    सफल नहीं हुआ गैर आदिवासी सीएम का प्रयोग

झारखंड भाजपा में अर्जुन मुंडा का कद अचानक बढ़ने की कई वजहें हैं। एक बड़ी वजह तो अर्जुन मुंडा का झारखंड की राजनीति का लंबा अनुभव है। दूसरी वजह पार्टी में उनकी स्‍वीकार्यता है। आदिवासी विधायकों और सांसदों की वह पहली पसंद रहे हैं। भाजपा ने वर्ष 2014 में गैर आदिवासी सीएम का प्रयोग झारखंड में किया था पर अब भाजपा को जो रिपोर्ट मिल रही है उसके अनुसार गैर आदिवासी सीएम का प्रयोग झारखंड में सफल नहीं हुआ। वहीं ब्‍यूरोक्रेसी में भी रघुवर दास बहुत लोकप्रिय नहीं रह पाये। जबकि अर्जुन मुंडा को जनता के साथ ब्‍यूरोक्रेसी को भी साधने में महारत हासिल है। इसलिए पार्टी 2019 के चुनावों में अर्जुन मुंडा को फिर से आजमाने पर भी विचार कर रही है।

                                                                        सर्वे का निष्कर्ष भाजपा को निराश करनेवाला

गौरतलब है कि भाजपा के एक कद्दावर नेता ने मुंबई की एक एजेंसी से यहां का चुनावी सर्वेक्षण कराया गया था। उसका जो निष्कर्ष निकला वह भाजपा को निराश करने वाला था। भाजपा विरोधी मोर्चा के सक्रिय होने की वजह से भाजपा की जीत के लिए दिल से काम करने वाले संभावित चुनौतियों का सामना करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। यह तय है कि अगर यहां भाजपा विरोधी मोर्चा में झामुमो, कांग्रेस, राजद और झाविमो शामिल हो जाते हैं तो भाजपा के लिए हर लोकसभा और विधानसभा सीट पर बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी। दूसरी तरफ आजसू के बिगड़े तेवर की वजह से भी महतो प्रभुत्व वाले इलाकों में भाजपा को अप्रत्याशित विरोध का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही मौका देखकर चौका लगाने की चाह रखने वाले कई भाजपा नेता भी झामुमो सहित दूसरे दलों से टिकट की तलाश में जुट गये हैं। ऐसे में भाजपा ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर अपनी रणनीति बना रही है।