पलामू में वैश्य समाज के कई दिग्गज जुटे, वैश्य समाज ने दहेज प्रथा के खिलाफ लिया संकल्प, राजनीति में भी वैश्य को मिले बड़ी भागीदारी के अलावा पलामू की अन्य महत्वपूर्ण खबरें।

पलामू में वैश्य समाज के कई दिग्गज जुटे

वैश्य समाज ने दहेज प्रथा के खिलाफ लिया संकल्प

राजनीति में भी वैश्य को मिले बड़ी भागीदारी

मेदिनीनगर : अखिल भारतीय रौनियार वैश्य महासभा की पलामू इकाई की प्रमण्डलीय बैठक आज शंकर साहु की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक का सफल संचालन वैश्य नेता अमित आनंद ने किया। मौके पर महासभा की महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष व जिला परिषद सदस्य लवली गुप्ता ने भी हिस्सा लिया और कहा कि समाज से दहेज का नामोनिशान मिट जाना चाहिए और वैश्य समाज को राजनीति में बड़ी भागीदारी मिलनी चाहिए। मौके पर शंकर साहु ने कहा कि वैश्य समाज के साथ-साथ संपूर्ण समाज में आदर्श विवाह का बड़ा उदाहरण प्रस्तुत करने की कोशिश समाज की हरेक व्यक्ति को करने की  जरूरत है। इस महासभा के प्रदेश अध्यक्ष श्रवण गुप्ता ने भी दहेज को समाज का सबसे बड़ा कुरिती बताया है। वहीं महासभा के महासचिव विनोद बिहारी ने कहा कि वैश्यों की एकजुटता दहेज हटाव अभियान के लिए आवश्यक है। इधर, वैश्य समाज के युवा नेता अमित आनंद ने कहा कि एकजुटता के साथ वैश्य समाज को अपने हक और अधिकार की लड़ाई लड़ने के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहना पड़ेगा, तब ही समाज में वैश्य को संपूर्ण अधिकार का दर्जा प्राप्त हो पायेगा। इस बैठक में अहिल्या गुप्ता, मंजू गुप्ता, मनोज गुप्ता, विजय गुप्ता, जय गुप्ता, श्यामसुंदर गुप्ता, ब्रजेश गुप्ता, कुंदन गुप्ता, अवधेश गुप्ता, अनुज गुप्ता, शंभू गुप्ता, उदय गुप्ता समेत कई उपस्थित थे। 

अनुकंपा शिक्षकों की समस्या को लेकर आंदोलन करेगा शिक्षक संघ

मेदिनीनगर : झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ पलामू ईकाई की बैठक आज सुदना मध्य विद्यालय में हुई। इसकी अध्यक्षता हरिद्वार महतो ने की तथा संचालन जीतेन्द्र कुमार दुबे ने किया। बैठक में संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र शुक्ला मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि अगर अनुकंपा शिक्षकों की समस्याओं का सामाधान जल्द नहीं निकाला गया तो संघ राज्य स्तर पर आंदोन करेगा। इस मामले में संघ का एक प्रतिनिधिमंडल शिक्षा सचिव से मुलाकात करेगा। प्रधान सचिव जितेन्द्र कुमार ने कहा कि संघ अनकंपा शिक्षकों की समस्या के प्रति गंभीर है। संगठन पूर्व में दो बार इस समस्या को लेकर राज भवन के समझ धरना-प्रदर्शन कर चुका है। जिला उपाध्यक्ष समीर कुमार पाण्डेय ने कहा कि अनुकंपा शिक्षकों के मान-सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए संगठन किसी भी हद तक जा चुका है। बैठक में वशिष्ठ नारायण दुबे, अजित कुमार तिवारी, शिवध्यान तिवारी, महताब हसन, परमानन्द उपाध्याय, अमरेन्द्र पाठक, विकास कुमार राय, संजीव तिवारी, आलोक रंजन, पंकज दुबे समेत कई शिक्षकों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये।

चपरासी की नियुक्ति को लेकर बेरोजगारों में आक्रोश

267 पद आज भी रिक्त, द्वितीय काउंसिलिंग शुरू करे प्रशासन

प्रशासन ने सरकार के विधि शाखा से मांगी है राय

मेदिनीनगर : पलामू के चर्चित चपरासी नियुक्ति मामले का द्वितीय काउंसिलिंग झारखण्ड हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा नहीं किये जाने पर पलामू के बेरोजगारों में अच्छा-खासा आक्रोश है। चतुर्थवर्गीय कर्मचारी के अभी  भी 267 पद रिक्त है जिसके लिए सरकार के निर्देशानुसार जिला प्रशासन ने बहाली प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाया था लेकिन बहाली में अनियमितता बरते जाने को लेकर यह मामला हाईकोर्ट की दहलीज तक जा पहुंची थी। जब माननीय हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया कि शेष रिक्तियों को पूरा किया जाय तब जिला प्रशासन भी द्वितीय काउंसिलिंग के जरिए बहाली की प्रक्रिया को अंजाम देने की मुहिम शुरू कर दी लेकिन कहीं न कहीं अंदेशा को देखते हुए जिला प्रशासने ने इस मामले को अंतिम रूप से जमीन पर उतारने के लिए यानी 267 रिक्त पदों को भर देने के लिए सरकार की विधि शाखा से परामर्श मांग डाली। सूत्रों की माने तो अभी तक विधि शाखा से राय प्रशासन को प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए चपरासी शेष 267 पदों की बहाली अटकी व लटकी हुई है। इधर, बेरोजगार संघर्ष मोर्चा की पलामू इकाई भी इस बहाली को अंतिम रूप देने की मांग को लेकर प्रशासन पर दबाव बनाये जाने की राजनीति को बरकरार रखे हुए है। आज भी मोर्चा के अध्यक्ष उदय राम की अध्यक्षता में उक्त बहाली के आशय को लेकर एक बैठक की गयी, जिसमें बहाली में प्रशासन की शिथिल भूमिका पर मोर्चा के सदस्यों ने चर्चा की और कहा कि इस मामले को स्थानीय विधायक आलोक चौरसिया ने भी विधानसभा के पटल पर उठाकर इस पर त्वरित कार्रवाई करने की मांग सरकार से की थी। इसके बावजूद अभी तक बहाली की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं होना खेद जनक है। मोर्चा ने बैठक में निष्कर्ष निकाला कि निकट भविष्य में प्रशासन इस विषयक पर सजगता से पहल नहीं किया तो एक बार फिर पलामू के बेरोजगारों को मोर्चा के बैनर तले आंदोलित होना पड़ेगा।

हुसैनाबाद विधायक-सीओ प्रकरण का कड़वा सच

पलामू के अफसर बेलगाम, माननीय हाशिये पर 

मेदिनीनगर : हुसैनाबाद विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता और सीओ विपीन कुमार दुबे के बीच हुए वाक्ययुद्ध एवं उसके बाद थाना में एफआईआर की शक्ल में पहुंचे मामला की चर्चा आज राजनैतिक गलियारों में जोरों पर चल रही है। पक्ष-विपक्ष की राजनीतिज्ञों द्वारा विधायक पर अंगुली उठायी जा रही है तो दबी जुबां से अफसर घराने में सीओ के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही चर्चाओं का बाजार गरम है लेकिन मोबाईल फोन पर कई मिनटों तक दोनों के बीच हुई गरमा-गरमी बातों के रिकॉर्डिंग को सुनकर समीक्षा करेंगे तो ज्ञात होगा कि पलामू के अफसर माननीयों के सामने जरूरत से ज्यादा बेऔकात, बेलगाम और बदमिजाज हो गए हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर उपरोक्त किस्से का जो ऑडियों रिकॉर्डिंग डाला गया है वह कहीं न कहीं आधा-अधूरा रिकॉर्डिंग है किन्तू इस रिकॉर्डिंग में भी जितने संवाद सुनाई पड़ रहे हैं, उसमें हुसैनाबाद के सीओ विपीन कुमार दुबे मनबड़ु पदाधिकारी के रूप में बात करते हुए नजर आ रहे हैं। उन्हें बात करने के दौरान तनिक भी यह ख्याल नहीं है कि वे किसी माननीय से बात कर रहे हैं, वे किसी जनप्रतिनिधि से बात कर रहे हैं, वे किसी सरकार के प्रतिनिधि से बात कर रहे हैं। ऐसे में सीओ साहेब को कम से कम माननीय के तुम का जवाब तुम से तो नहीं ही दिया जाना चाहिए। ऐसा करके सीओ ने अवश्यसंभावी तौर पर माननीय के विशेषाधिकार का हनन किया है। ऑडियों रिकॉर्डिंग में सीओ ने इतना अधिक सुपरसीड करने की कोशिश की है मानों वह सीओ नहीं बल्कि वे जिले का डीसी हों। उन्होंने अपने विधायक से वार्ता के क्रम में डीसी को भी नजर अंदाज करते हुए यह कहा है कि अंचल कार्य में डीसी के आदेश की कोई आवश्यकता नहीं है, जबकि विधायक श्री मेहता बार-बार फोन पर सीओ से कहते हुए सुने गए कि अतिक्रमण की कार्रवाई मुंह देखली नहीं होनी चाहिए। रिकॉर्डिंग को सुनने के बाद यह स्पष्ट सुनाई पड़ रहा है कि विधायक से कोसों उंची दूर अवाज सीओ की है, जबकि विधायक वार्ता के क्रम में सीओ से डिमाण्ड मुद्रा यानी हो रहे अतिक्रमण पर विराम की मांग करते हुए एवं सीओ को विधायक की गरिमा की रक्षा करने की नसीहत देते हुए बचाव मुद्रा में सुने जा रहे है, मगर सीओ काहे को मानने जाय, क्योंकि उन्हें तो रघुवर सरकार की छत्रछाया मिली हुई है। आव न ताव देखा, सीओ ने तुरंत बिना उपायुक्त से आदेश व निर्देश लिए कलम उठायी और कर दिया थाने में विधायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज। हालांकि एफआईआर में जो लब्बो-लब्ज सीओ ने अपनाया है वह आगे जाकर महज प्रथम दृष्ट्या अनुसंधान में ही टूट जायेगा, क्यांकि उनके द्वारा दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि विधायक ने सरकारी काम में बाधा पहुंचाया है, वह सरासर गलत है क्योंकि विधायक दिल्ली में है और दिल्ली में रहकर हुसैनाबाद के कार्यालय में कोई कैसे सरकारी काम में बाधा पहुंचा सकता है। जहां तक विधायक द्वारा सीओ साहेब को धमकी दिये जाने का सवाल है तो पूरे रिकॉर्डिंग में धमकी देने के मामले में विधायक की तुलना में सीओ ही बीस दिख रहे हैं। निष्कर्षतः अगर हम यूं कहे कि पलामू में अफसर बेलगाम हो गए हैं तो शायद यह अतिश्योक्ति नहीं होगी। विधायक का एक अपना दर्जा है और विधायक जनता की परेशानियों को लेकर अफसर से कैफियत करने की हैसियत हर समय रखता है, जिसका जवाब शालीनता से एक पदाधिकारी और अधिकारी को देना ही है और यदि विधायक विपरीत परिस्थितियों में ऑफिसर से उरेब भाषा में पेश आता है तो ऑफिसर की यह ड्यूटी है कि उसकी शिकायत अपने सीनियर अधिकारी यानी जिले के उपायुक्त से करते हुए उनसे अनुमति प्राप्त कर संबंधित विधायक की शिकायत विधानसभा अध्यक्ष से करें न कि थाने में रपट लिखाये और थाना का धौंस दिखलाकर विधायक को हाशिये पर पहुंचाये। अतिक्रमण हो रहा है, इस पर लगाम लगाने का सीओ को पूरा पावर है लेकिन कहीं पर निगाहे और कहीं पर निशाना की तर्ज पर अतिक्रमण पर नकेल कसना सीओ के किसी कानूनी अधिकार में नहीं लिखा गया है। हां लेकिन विधायक का अधिकार है कि वे इसकी कैफियत पदाधिकारी से पूछे। आपको बतला दें कि हुसैनाबाद के विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता भी कुछ कम नहीं हैं। हमेशा अपने आक्रोशपूर्ण कार्यशैली से विवादों में घिरा रहना उनके शौक में शामिल है। वे भी पूरे दूध के धुले हुए नहीं हैं लेकिन इस प्रकरण में विधायक ने इतनी बड़ी गलती नहीं की है कि सीओ द्वारा मामला थाना तक ले जाया जाय। अभी कुछ महीने पहले ही पांकी के विधायक बिट्टू सिंह के साथ भी लेस्लीगंज के बीडीओ ने विधायक की कार्यशैली पर अंगुली उठाते हुए उनके द्वारा दी गयी नसीहत को राजनीतिक शक्ल देकर बीडीओ बना लिया और उसे सोशल साईट पर जारी कर दिया। जबकि सच यह है कि जनता के विकास में अफसर बाधक बनेंगे तो जनप्रतिनिधि उसे काम करने का पाठ तो सिखायेंगे ही क्योंकि जनता से उन्होंने विकास कराने के लिए ही वोट लिया है। इससे पहले भी पांकी के विधायक की झड़प सीओ से हुई थी, उस पर सरकार ने संज्ञान लेकर उसे निलंबित भी कर दिया था। ऐसे में अब यह जगजाहिर है कि पलामू के अफसर माननीयों पर हावी होने के लिए लगातार अव्वल दिख रहे हैं। अगर समय रहते इस टकराव पर विराम नहीं लगा तो आने वाला समय लोकतंत्र पर भारी पड़ सकता है। बहरहाल, इससे बचने के लिए पदाधिकारियों को भी सावधान मुद्रा में रहते हुए अदब की परिभाषा सीखनी होगी। वहीं माननीयों को भी यह ख्याल रखना होगा कि उनके सामने कोई चतुर्थवर्गीय कर्मचारी नहीं बल्कि वह एक सम्मानित अफसर है जिससे वे विकास की काम कराते हैं।

विक्टर कंपनी ने अपने विक्रेताओं को सम्मानित किया 

मेदिनीनगर : पाईप बनाने वाले विक्टस कंपनी ने पलामू के अपने कई विक्रेताओं को सम्मानित करने के साथ साथ बैनकॉक की शैयर भी कराई। सम्मानित होने वालों में चैनपुर के कश्यप सेनेटरी, डालटनगंज के शेरा सेनेटरी के साथ साथ मोहम्मदगंज, पांकी, मनीका और लातेहार के विक्रेताओं को सम्मानित किया गया। कंपनी के झारखंड प्रमुख विवेक जयसवाल ने कहा कि कंपनी ने विक्रेताओं के बीच विदेश टूर प्रतियोगिता रखी थी, जिसमें जितने वाले विक्रेताओं के साथ-साथ विदेश का टूर कराया गया। उन्हांने कहा कि कंपनी हमेशा अच्छी क्वालिटी की पाईंप उपलब्ध करात है। उन्होंने कहा कि इस तरह के टूर प्रोग्राम का आयोजन आगे भी करती रहेगी।

चैनपुर प्रमुख का स्कॉर्पियो गायब

थाने में एफआईआर दर्ज

मेदिनीनगर : पलामू जिले के चैनपुर प्रखण्ड प्रमुख विजय कुमार गुप्ता के आवास के बाहर लगी स्कॉर्पियो को कल रात अज्ञात चोरों ने गायब कर दिया है। गायब स्कॉर्पियो का नम्बर 003क्यू 7295 है। बताया जाता है कि हरेक दिन के भांति श्री गुप्ता अपना स्कॉर्पियो अपने घर के बाहर खड़ा रखते थे। आज सुबह जब वे जगे तो देखा कि उनका स्कॉर्पियो यहां से गायब है तो उन्होंने तुरंत इसकी जानकारी चैनपुर थाना को दी। सूचना मिलते ही चैनपुर थाना प्रभारी सुनील कुमार और विधायक आलोक चौरसिया प्रमुख के घटनास्थलीय आवास पर पहुंचे। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और प्रमुख को यह विश्वास दिलाया है कि जल्द ही पुलिस गायब स्कॉर्पियो को चोरों के साथ धरने में कामयाब होगी। 

18 से 20 दिसम्बर तक टैब बंद करके बीआरपी/सीआरपी करेंगे काम

26-27 को विधानसभा का घेराव

मेदिनीनगर : आगामी 18 से 20 दिसम्बर तक विद्यालय में काम करने वाले बीआरपी और सीआरपी अपना हाजिरी बनाने वाले ऑनलाईन टैब को डाउन रखकर सरकार के खिलाफ आंदोलन का आगाज करेंगे। उसके बाद 26 एवं 27 दिसम्बर को दो दिवसीय धरना कार्यक्रम का आयोजन विधानसभा का घेराव करते हुए किया जायेगा। यह ऐलान आज बीआरपी-सीआरपी महासंघ की पलामू इकाई की बैठक में किया गया है। बैठक आज जिला स्कूल के प्रांगण में महासंघ के जिलाध्यक्ष किशोर कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में इस बात की भी चर्चा की गयी कि बीआरपी/सीआरपी की सेवा स्थायी के साथ वेतनमान की समुचित व्यवस्था, भविष्य निधि एवं इनलोगों के जीवन बीमा को सरकार द्वारा सुनिश्चित की जाय। बैठक में कहा गया कि इस मांग को लेकर हमलोग लगातार आंदोलित है लेकिन झारखण्ड शिक्षा परियोजना द्वारा इसकी अनदेखी की जा रही है जो अब सहनशीलता से बाहर है। ऐसे में सभी बीआरपी/सीआरपी ने यह निर्णय लिया कि चट्टानी एकता के साथ आंदोलन को सफल बनावे। बैठक में अरूण मिश्रा, अश्विनी सिंह, संतोष सिंह, मुकेश तिवारी, मनोज पाठक, सुजीत तिवारी, राजन कुमार, प्रभात कुमार दुबे, विजय कुमार दुबे, कुश कुमार पाण्डेय, पंकज कुमार सिंह, ऐजाज अहमद, नंद कुमार पाठक, अमिताभ रंजन, पंकज कुमार दुबे, राधेश्याम मंडल, रामबचन कुमार, सुरेन्द्र कुमार, उपेन्द्र पाठक, अब्दुल अहद, कामख्या तिवारी, सुरेन्द्र सिंह, कन्हैया तिवारी और जयप्रकाश समेत कई बीआरपी/सीआरपी उपस्थित थे।


विद्यार्थी परिषद की मेदिनीनगर इकाई का हुआ गठन

शैलेश बने अध्यक्ष तो महासचिव की बागडोर राजकिशोर को 

मेदिनीनगर : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मेदिनीनगर की इकाई का आज विस्तार किया गया। वहीं छात्र नेता राहुल दुबे एवं राज पाण्डेय ने आज विद्यार्थी परिषद का दामन थामा। इस नये विस्तार में प्रो. शैलेश मिश्रा को परिषद का अध्यक्ष घोषित किया गया जबकि  राजकिशोर सिंह को पुनः अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मेदिनीनगर महानगर के मंत्री का दायित्व सौंपा गया। उपाध्यक्ष के रूप में धीरज उपाध्याय व प्रो. अजित सेठ का चयन किया गया। सह मंत्री के रूप में आनंद पाण्डेय, शिवम सिंह, अमित तिवारी, सुभाष राम, राहुल देव दुबे और प्रियरंजन तिवारी चुने गए। इस नये टीम में आशीष ओझा कार्यालय मंत्री तो मीडिया प्रभारी प्रभात सिंह बनाये गए हैं। सत्यम सिंह सह प्रभारी तो मुहल्ला संपर्क प्रमुख रंजीत तिवारी को नियुक्त किया गया है। जनजातीय कार्य प्रमुख का कार्य रामजीत कुमार एवं छात्रावास कार्य  प्रमुख का काम अमन मिंज देखेंगे। अमरेश कुमार छात्रावास कार्य के सह प्रमुख बनाये गए हैं। पीजी विभाग के कार्य प्रमुख प्रकाश राय  होंगे। प्लस-टू कार्य प्रमुख बिट्टू कुमार रहेंगे। वहीं प्लस-टू कार्य के सह प्रमुख अमित दुबे को बनाया गया है। इस तरह से पंकज पासवान, जयंत राज, गोविन्द मेहता, गौरव दुबे, आरती पाठक और स्नेहा भारती को भी कई जिम्मेदारियां सौंपी गयी है। प्रो. सुधांशु तिवारी, डॉ. केसी झा, पप्पू जायसवाल, राज पाण्डेय, नीतीश दुबे, धर्मेन्द्र विश्वकर्मा और हरिवंश सिंह परिषद के विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे। इस परिषद महानगर कार्यसमिति सदस्य के रूप में मंदीप कुमार, आदित्य कुमार और अभिषेक मिश्रा का नाम रखा गया है। इस बैठक में चुनाव प्रभारी श्वेतांक गर्ग, आकांक्षा गुप्ता, ब्यूटी वर्मा, श्रुति दुबे, प्रीति, मनीषा, आरती, निशा, चांदनी पाण्डेय, विकास मेहता और आलोक पाण्डेय समेत कई उपस्थित थे।