झामुमो महिला मोर्चा जिला कमेटी का हुआ विस्तार अध्यक्ष बनी सरिता भगत व नासरीन अंजुम बनी सचिव।

झामुमो महिला मोर्चा जिला कमेटी का हुआ विस्तार अध्यक्ष बनी सरिता भगत व नासरीन अंजुम बनी सचिव।

लोहरदगा -झामुमो जिला अध्यक्ष मोजम्मिल अहमद की अनुशंसा पर महिला मोर्चा की केंद्रीय अध्यक्ष डॉक्टर महुआ मांझी ने झामुमो जिला कमेटी का विस्तार करते हुए अध्यक्ष सरिता भगत जिला सचिव नसरीन अंजुम जिला उपाध्यक्ष सरोज देवी जिला उपाध्यक्ष मनीषा कच्छप जिला सह सचिव फूलकुमारी केरकट्टा जिला कोषाध्यक्ष अनिता मिंज को प्रमाण पत्र दीया तथा जिले में झामुमो महिला कमेटी की जिम्मेवारी सौंपी। डॉक्टर महुआ मांझी ने सभी को दिशा निर्देश देते हुए कहा की झामुमो के सिद्धांतों में रहकर पार्टी का काम करे। और लोहरदगा जिला में झामुमो को  मजबूत बनाएं। जिले में  ज्यादा से ज्यादा महिलाओ को झामुमो में जोड़ने का प्रयास करें। और जल्द ही प्रखण्ड से लेकर पंचायत तक का गठन करके झामुमो को पंचायत स्तर से लेकर पंचायत तक मजबूत करने का काम करें। इस दौरान झामुमो के जिला अध्यक्ष मोज़म्मिल अहमद जिला सचिव रानथु उराँव अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला अध्यक्ष एनुल अंसारी आदि उपस्थित थे।

ठंढ की ठनक से घरों में दुबके पेशरार वासी।

पेशरार/लोहरदगा: मौशम का करवट लेना पेशरार वासीयों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। बता दें कि पिछले एक सप्ताह से ठंढ का प्रकोप जैसे ही बढ़ी है पेशरार क्षेत्र के लोगों में दहशत पैदा कर दी है। लोग अपने अपने दिनचर्या व रोजी रोजगार छोड़कर अपने अपने घरों में दुबके हुए रहने को मजबुर हैं। पेशरार क्षेत्र में नदी नलों व पहाड़ों का विहंगम दृश्य के कारण ठंढ और भी अधिक होती है। पेशरार जैसे इलाके में ठंढ से निजात पाने के लिए ग्रामीणों को घास फूस का सहारा लेना पड़ता है। कनकनी भरी इस मौसम से छुटकारा पाने के लिए ग्रामीणों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रखंड प्रसासन की ओर से ठंढ से बचाव कार्य के लिए अबतक कोई भी प्रकार के व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि प्रखंड प्रशासन के अलावा जनप्रतिनिधि भी ग्रामीणों की इस भयावह समस्या को दूर करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं सभी चुप्पी साधे हुए हैं। ग्रामीणों की माने तो इस कनकनी भरी ठंढ से राहत पाने के लिए जंगलों से घास फूस व पेड़ पौधों के गिरे पत्तों को जलाकर रात बिताना बेबसी बन गई है। ज्ञात हो कि प्रखंड प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की चुप्पी इस बढ़ती ठंढ में कई सवालों को जन्म देने लगी। ग्रामीणों का कहना है कि अबतक बढ़ती ठंढ से बचाव के लिए न तो प्रखंड प्रशासन की ओर से अलाव व गर्म वस्त्र की व्यवस्था की गई है और न ही जनप्रतिनिधियों की ओर से अबतक कोई ठोस कदम उठाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अगले एक सप्ताह तक प्रखंड प्रशासन की ओर से ठंढ से बचाव कार्य के लिए कोई पहल नहीं किया गया तो कई लोग ठंढ के कारण समय से पहले काल के गाल में समा सकते हैं।