जीवन अमूल्य है, सीट बेल्ट व हेलमेट का करें इस्तेमाल

जीवन अमूल्य है, सीट बेल्ट व हेलमेट का करें इस्तेमाल

दिनाक 24-December-2018 को पलामू जिला परिवहन पदाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी की अध्यक्षता मे प्रिन्सिपल और नोडल टीचर के साथ सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई/ 

जिला परिवहन पदाधिकारी के द्वारा बतया गया कि विश्व में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं का 12.5 प्रतिशत (एक वर्ष में 1.45 लाख से अधिक मौतें) भारत में होती है. चौंका देने वाली बात यह है कि ऐसी सड़क दुर्घटनाओं का शिकार 72 प्रतिशत लोग 15-44 आयु वर्ग के है जो तेज गति, असावधानी और शराब पीकर गाड़ी चलाने के कारण दुर्घटना के शिकार हुए/ पलामू जिला में 2018 में लगभग 200 एक्सिडेंट हुए है जिसमे 140 लोगों कि मृत्यु हुई और 130 गंभीर घायल हुए/ 

सड़क पर होने वाली ऐसी दुर्घटनाओं का मुख्य कारण लोगों द्वारा सड़क यातायात नियमों की अनदेखी करना है। तेज़ गति में गाडी चलाना , नशे में ड्राइविंग और गलत दिशा में गाड़ी चलाना आदि दुर्घटनाओं की मुख्य वजय है।

जिला परिवहन पदाधिकारी ने स्कूल के प्रिन्सिपल और नोडल टीचर को अवगत कराया कि सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की मदद करने हेतु विद्यार्थियों को प्रेरित किया जाए कि किसी सड़क दुर्घटना के प्रत्यक्षदर्षी सहित कोई भी गुड सेमेरिटन ,अच्छा मददगार किसी घायल व्यक्ति को निकटतम अस्पताल में लेकर जा सकता हे, उस गुड सेमेरिटन को तुरंत जान की अनुमति दे दी जाएगी एवं अच्छे मददगार से किसी भी प्रकार कोई पुछताछ नही की जाएगी।

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने पलामू जिला के सभी स्कूल के प्रिन्सिपल और नोडल टीचर को निर्देश दिया की सभी स्कूल में सप्ताह में एक क्लास सड़क सुरक्षा जागरूकता की लिया जाएगा/ साथ ही विध्यार्थीयों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए सड़क सुरक्षा पर निबंध प्रतियोगिता, पेंटिंग प्रतियोगिता, और नुक्कड़ नाटक कराया जाएगा/

पलामू जिले मे प्रतिनियुक्त ROAD SAFETY PIU के द्वारा बताया गया कि सड़क सुरक्षा को लेकर हमारा व्‍यवहार बहुत पिछड़ा हुआ है। विकसित देशों में सड़क सुरक्षा की शिक्षा किसी न किसी तरह से स्‍कूल में ही शुरू कर दी जाती है। तो जब तक बच्‍चा स्‍नातक होता है, उसे सड़क और यातायात सुरक्षा के बारे में अच्‍छी जानकारी हो जाती है। वे सड़क कानूनों का बेहतर निर्वाह कर पाते हैं। यह सड़क दुर्घटनाओं की संख्‍या में भारी कमी होने से जाहिर भी हो जाता है। तो, आखिर हम क्‍यों नहीं अपने बच्‍चों को सड़क सुरक्षा की अहमियत सिखा सकते? इसका जवाब बहुत आसान है। हम ऐसा इसलिए नहीं कर पाते, क्‍योंकि हमने अभी तक इसके महत्‍व को पहचाना नहीं है। जब हमने अपना लाइसेंस बनवाया था तब किसी ने हमें नहीं समझाया। लेकिन, उस समय और आज के हालात में अंतर है।

ROAD SAFETY PIU के द्वारा बताया गया कि भारत में मोटर क्रांति के बाद तो सड़कों की हालत काफी बदल गयी है। सड़क सुरक्षा के प्रति हमारी लापरवाही को स्‍कूलों के स्‍तर पर रोके जाने की जरूरत है, न कि इस कहानी का अंत अस्‍पताल में आकर होना चाहिए। क्‍योंकि, अगर हमने अभी बदलाव करने नहीं शुरू किये, तो काफी देर हो जाएगी। 

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा (रोड सेफ्टी) को लेकर निर्देश जारी कर कहा है कि तमाम राज्यों के स्कूल के कोर्स में रोड सेफ्टी को एजुकेशन में शामिल किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से कहा है कि मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट के सुझाव पर जल्दी से जल्दी अमल का प्रयास करें। 

ROAD SAFETY PIU के द्वारा सड़क सुरक्षा,ट्रैफिक लाइट, साइनेज, रोड, जंक्शन, वाहन चलाने के सही तरीके, हेलमेट सीटबेल्ट के उपयोग, तथा यातायात नियमो  के बारे मे विस्तार पुर्वक जानकारी दी/ ROAD SAFETY PIU के द्वारा बताया गया कि हेलमेट पहनने के बाद चिन स्ट्रेप लगाना कभी न भूलें। दुर्घटना होने पर चिन स्ट्रेप हेलमेट को आपके सिर के ऊपर बनाये रखता है।  हेलमेट के उपयोग से गम्भीर चोट लगने की संभावना 70% तक कम हो जाती है।वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग बेहद खतरनाक है। यह ध्यान भटकाता है तथा प्रतिक्रिया समय कर देता है जिससे चालक जोखिम को नहीं पहचान पाता। 

ROAD SAFETY PIU के द्वारा बताया गया कि जिला मै 108 एम्ब्युलेन्स सर्विस को Accident Prone Area के आधार पर नजदीकी ब्लॉक मे रखा गया है, जिसमे उसकी सर्विसेस Services Golden Hour period मे ली जा सके/ जिला मे हो रही सड़क दुर्घटनाओं को को डायल 100 कि सहायता प्रदान कि गयी है, डायल 100 कि उपयोग से PCR Van कि सहायता से समय पर Accident Spot पर पहुँच कर सहायता प्रदान कि जा रही हैं/