मंडल डैम परियोजना : जानिये मंडल डैम परियोजना का पूरा गणित और आखिर क्यों झारखंड में मचा है परियोजना पर बवाल ?

मंडल डैम परियोजना : जानिये मंडल डैम परियोजना का पूरा गणित और आखिर क्यों झारखंड में मचा है परियोजना पर बवाल ?


जिस मंडल डैम का शिलान्यास करने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झारखंड आये, उसे लेकर राज्य में बड़ा सियासी बवाल मचा हुआ है. विभिन्न राजनैतिक और सामजिक संगठन डैम परियोजना का विरोध कर रहे है. मगर आखिर क्यों इस डैम परियोजना पर बड़ा बवाल मचा हुआ है और क्या है पूरी परियोजना का गणित. सवाल जवाब के जरिये समझिये. 


*सवाल : कब शुरू हुई मंडल डैम परियोजना ?*


जवाब : मंडल डैम परियोजना  की शुरुआत 1972 में हुई. डैम में गेट नहीं होने की वजह से प्रोजेक्ट लटका हुआ है. गेट निर्माण के लिए फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट नहीं मिल पाया था.


सवाल : डैम बनने से झारखंड को कितना फायदा होगा ?


जवाब : मंडल डैम परियोजना से झारखंड को ज्यादा फायदा नहीं होगा. इस परियोजना से ज्यादा फायदा बिहार को होगा. झारखंड की केवल 19,604 हेक्टेयर भूमि और बिहार की 92,000 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई के लिए पानी मिलेगा.


 सवाल : झारखंड की कितनी जमीन जलमग्न होगी ?

जवाब : मंडल डैम परियोजना से बिहार को सबसे ज्यादा फायदा होगा. मगर इसके लिए झारखंड को बड़ी कीमत चुकानी होगी. डैम के निर्माण से झारखंड की 38,508.21 एकड़ भूमि जलमग्न होगी, जिसमें 3,044.38 एकड़ रैयती जमीन, 12,756.51 एकड़ गैर मजरुआ जमीन तथा 2,266.72 एकड़ वनभूमि शामिल है. फॉरेस्ट क्लीयरेंस के तहत स्टेज वन का क्लीयरेंस हो चुका है. जिसमें पलामू टाइगर रिजर्व के आठ गांवों को हटाया जाना है.


सवाल : झारखंड के कितने गांव प्रभावित होंगे ?


जवाब : सरकार का कहना है कि डैम के निर्माण से 15 गांव ही प्रभावित होंगे. जबकि 1972 के सरकारी सर्वे में 17 गांवों को डूब क्षेत्र में बताया गया था. इसमें झारखंड के स्वतंत्रता सेनानी नीलांबर-पीतांबर का गांव चेमोसरिया भी डूब क्षेत्र में आ गया है. डूब क्षेत्र में आनेवाले गांवों में भंडरिया प्रखंड के कुटकू, मतगड़ी, खुर्रा, खाड़ीमहुआ व तुबेर, लातेहार के बरवाडीह प्रखंड के मेराल, करमडीह, सेलदाग, बेरे, तनवाई सहित अन्य गांव डूब क्षेत्र में शामिल हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी दावे से दोगुने गांव प्रभावित होंगे.


सवाल : झारखंड के कितने लोग विस्थापित होंगे ?

जवाब : डैम निर्माण से 6000 से अधिक लोग विस्थापित होंगे. इनमें 5000 आदिवासी, 300 दलित सहित 681 अन्य जातियों के लोग शामिल हैं. 

सवाल : डैम निर्माण में कुल लागत कितनी आएगी ?


जवाब : इस योजना को पूरा करने में कुल 1622 करोड़ रुपये की लागत आयेगी. इसमें भारत सरकार 1378.61 करोड़ रुपये खर्च करेगी. बिहार सरकार को 213 और झारखंड सरकार को 31 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे.

          सवाल : क्यों मचा है बवाल?

जवाब : जैसा की आंकड़ों से साफ़ है की मंडल डैम परियोजना से झारखंड को कम और बिहार को अप्रत्याशित फायदा हो रहा है. मगर इस योजना के लिए जमीन से लेकर गांव और वन भूमि तक झारखंड का जाएगा. यहां तक की झारखंड के महान स्वतंत्रता सेनानी नीलांबर-पीतांबर का गांव चेमोसरिया और झारखंड का गौरव पलामू टाइगर रिज़र्व के दस गांव भी पूरी तरह डूब जायेंगे. इस परियोजना से झारखंड के 5000 आदिवासी, 300 दलित सहित 681 अन्य जातियों के लोग विस्थापित होंगे. मगर डैम का ज्यादा फायदा बिहार को होगा. डैम का पानी सिचाई के लिए बिहार भेजा जाएगा. जानकार इसे आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर बिहार को साधने के लिए बीजेपी की सियासी रणनीति का हिस्सा बता रहे है. इसी कारण से मंडल डैम परियोजना को लेकर राज्य में बवाल मचा हुआ है. राजनैतिक दल और सामाजिक संगठन डैम परियोजना को रद्द करने की मांग कर रहे है.