पलामू: बाल विकास के 11 करोड़ गबन मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई में प्रशासन सुस्त

पलामू: बाल विकास के 11 करोड़ गबन मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई में प्रशासन सुस्त

पलामू, 15 जनवरी: समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग में 11 करोड़ रुपये के गबन के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने में जिला प्रशासन काफी शिथिलता बरत रहा है. आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, किन्तु पुलिस प्रशासन उन्हें गिरफ्तार करने में दिलचस्पी नहीं ले रही है.

लिपापोती कर रहा प्रशासनः झामुमो   

झामुमो नेता राजमुनी मेहता ने आरोप लगाया है कि पुलिस प्रशासन गबन मामले की लीपापोती करना चाहता है. जिला प्रशासन की नियत भी साफ नहीं है. श्री मेहता का कहना है कि उन्होंने एक आवेदन के माध्यम से माननीय लोकायुक्त को इस मामले की जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की मांग की थी. लोकायुक्त के आदेश पर ही केवल दो बाल विकास परियोजनाओं में व्याप्त अनियमितता की रैंडम जांच करायी गयी थी. वित्तीय अनियमितता उजागर होने पर जिला समाज कल्याण पदाधिकारी एवं दो बाल विकास परियोजना पदाधिकारी और एक नाजिर के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी.

अन्य सीडीपीओ पर नहीं हुई कार्रवाई 

झामुमो नेता का कहना है कि रैंडम जांच से यह स्पष्ट हो गया कि जिले के अन्य परियोजनाओं में भी वित्तीय अनियमितता बरती गयी है, लेकिन इसके बावजूद केवल दो ही सीडीपीओ के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर औपचारिकता पूरी की गयी. इस मामले में प्रशासन की शिथिलता यह साबित कर रही है कि गबन के आरोपियों को प्रशासन संरक्षण दे रहा है.

कार्रवाई के लिए भेजी गयी है संचिका 

पूर्व प्रभारी डीएसडब्ल्यूओ कुमारी रंजना, हरिहरगंज की पूर्व सीडीपीओ संचिता भगत और विश्रामपुर सीडीपीओ सुधा सिन्हा पर जहां प्रपत्र (क) गठित कर सरकार के पास अग्रेतर कार्रवाई के लिए संचिका भेज दी गयी है. वहीं नाजिर सतीश उरांव पर भी प्रपत्र (क) गठित कर निलंबन के लिए प्रमंडलीय आयुक्त के पास संचिका भेजी गयी है. 

पलामू के तत्कालीन डीएसडब्लू, सीडीपीओ और नाजिर पर हुई है प्राथमिकी  

उल्लेखनीय है कि पलामू जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार मद में 11 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता और गबन के आरोप में तत्कालीन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी कुमारी रंजना, हरिहरगंज बाल विकास परियोजना पदाधिकारी संचिता भगत, विश्रामपुर बाल विकास परियोजना पदाधिकारी सुधा सिन्हा और जिला नाजिर सतीश उरांव को दोषी मानते हुए गत 29 नवंबर को शहर थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. दर्ज प्राथमिकी के आलोक में सभी आरोपियों पर धारा 406, 409, 420 व 120 बी के तहत शहर थाना में मामला दर्ज किया गया था. जांच के लिए जिले के उपायुक्त द्वारा गठित जांच दल द्वारा पोषाहार मद में सरकार से प्राप्त राशि के व्यय में बड़े पैमाने पर गबन और वित्तीय अनियमितता बरतने की बात सामने आयी थी.

कार्रवाई के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी 

झामुमो नेता राजमुनी मेहता ने कहा है कि जांच दल ने भी अपने प्रतिवेदन में उल्लेख किया है कि पूरे जिले में 2595 आंगनबाड़ी केंदों के लिए 74 दुकानों में पोषाहार की लगभग 11 करोड़ रुपये की राशि खातांरित कर सरकारी राशि का गबन किया गया है. उन्होंने कहा कि ये 74 दुकानें केवल दो ही परियोजना की नहीं हैं, बल्कि अन्य परियोजनाओं की भी हैं. फिर अन्य सीडीपीओ के विरुद्ध कार्रवाई करने में जिला प्रशासन आखिर मौन क्यों है? श्री मेहता ने कहा है कि अगर अविलंब सभी दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गयी तो वह माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे.