बोरा पर बैठकर पढ़ने वाले गुप्तेश्वर पांडेय कैसे बने बिहार के DGP

जानिए ,बोरा पर बैठकर पढ़ने वाले गुप्तेश्वर पांडेय कैसे बने बिहार के DGP

 बिहार में डीजीपी की खोज पूरी हो चुकी है और आज शाम पुलिस महकमे के नए मुखिया के नाम की घोषणा कर दी गई. 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय बिहार के नए डीजीपी होंगे. बिहार पुलिस अकादमी एवं बिहार सैन्य पुलिस के डीजी गुप्तेश्वर पांडेय को बिहार का नया DGP नियुक्त किया गया है. वे पूर्व DGP के.एस द्विवेदी की जगह लेंगे.

1987 बैच के आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडे का जन्म बक्सर जिले के छोटे गांव गेरुआ में 1961 में हुआ था. बिजली, सड़क, अस्पताल और स्कूल जैसी मूलभूत सुविधाओं से कटे इस गांव के बच्चों को प्रभावी शिक्षा के लिए नदी नाला पार कर दूर के गांव जाना होता था. दूसरे गांव की स्कूल में भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था कोई बेंच, डेस्क, कुर्सी नहीं थी. गुरु जी की बैठने के लिए चारपाई और छात्रों के लिए बोरा या जूट की टाट  थी. पढ़ाई का मध्यम ठेठ भोजपुरी था.

ऐसे माहौल के बावजूद गुप्तेश्वर के दिल में कुछ बड़ा करने का जज्बा था. यही कारण रहा कि तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद बिहार पुलिस के शीर्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. परीक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण करने के बाद इन्होंने पटना विश्वविद्यालय में नामांकन कराया और अपनी मेधा परिश्रम और दृढ़ संकल्प के जरिए बिना किसी कोचिंग के बल पर 1996 में IRS  बने. लेकि संतुष्ट नहीं हुए तो दोबारा परीक्षा दी और आईपीएस बने. उनको बिहार में ही सेवा करने का मौका मिला.

बताते चलें कि अपने सेवा काल में गुप्तेश्वर पांडेय कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं. बेगूसराय और जहानाबाद में एसपी के रूप में उनका कार्यकाल आज भी लोग याद करते हैं. जीतन राम मांझी की सरकार के वक़्त वे पुलिस हेडक्वार्टर में भी काफी महत्वपूर्ण भूमिका में थे. DGP बनने से पहले वे बिहार पुलिस अकादमी एवं बिहार सैन्य पुलिस के डीजी पद पर कार्यरत थे.

पांडेय की पहचान कड़क अधिकारी के तौर पर होती है और वो पोस्ट क्राइसिस मैनेजमेंट और काम्यूनल वॉयलेंस को संभालने में माहिर माने जाते हैं. बिहार के औरंगाबाद जिले में हाल ही में हुए हिंसक झड़प और तनाव की खबरों के बीच सरकार ने उन्हें ही स्थिति को नियंत्रित करने का टास्क सौंपा था जिसमें वो सफल भी हुए थे. बिहार पुलिस में पांडेय की पहचान विशेष और स्मार्ट पुलिसिंग के लिए होती है.