सर्वे-खतियान में हुई भारी गड़बड़ी की त्रुटियों को दूर करने की मांग

सर्वे-खतियान में हुई भारी गड़बड़ी की त्रुटियों को दूर करने की मांग

मेदिनीनगर(पलामू): पलामू जिले के विभिन्न अंचलों में राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जिन भू-अभिलेखों का डिजिटलाईजेशन किया गया है, उसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गयी है।बगैर नये- पुराने दस्तावेजों एवं रजिस्टर-टू का सही मिलान किये बिना ही नये खतियान में प्रविष्टि कर दी गयी है।इस कारण जिले में भूमि विवाद की समस्या काफी विकराल हो गयी है जो धीरे-धीरे खूनी संघर्ष का रूप ले रही है। सबसे ज्यादा गड़बड़ी जिले के हुसैनाबाद, हैदरनगर, मोहम्मदगंज, हरिहरगंज और पीपरा अंचल में की गयी है।

   इस क्षेत्र में किये गये सर्वे के पश्चात वर्ष 2008 में प्रकाशित खतियान और रजिस्टर-टू में की गयी गलत प्रविष्टियों के कारण भूमि की समस्या काफी जटिल रूप से उलझ गयी है।हड़बड़ी में की गयी गड़बड़ी से किसी की रैयती भूमि को अनाबाद झारखंड सरकार दर्ज कर दिया गया है तो किसी का रकबा कम कर दिया गया है। इसी प्रकार जमीन किसी और की तथा नाम किसी दूसरे का, किसी अभिलेख में रैयत का नाम ही गलत है तो किसी का खाता-प्लॉट गलत अंकित कर दिया गया है। सबसे ज्यादा गड़बड़ी बिक्रीनामा जमीन में की गयी है।इसमें बीस से तीस साल पहले बिक्री की गयी भूमि को नये खतियान एवं रजिस्टर-टू में क्रेता के स्थान पर बिक्रेता का ही नाम दर्ज कर भूमि विवाद उत्पन्न कर दिया गया है।नये सर्वे के आधार पर पूर्व विक्रेता द्वारा बिक्री की गयी भूमि पर भी दावा किये जाने लगा और उनके द्वारा दंप्रसं की धारा-144 जैसे वाद दायर किया जाने लगा है।साथ ही त्रुटियों में सुधार के नाम पर भुक्तभोगी किसानों से बिचौलियों के माध्यम से मुद्राविमोचन भी किया जा रहा है। गौरतलब बात तो यह है कि पलामू जिला में हाल सर्वे की अधिसूचना के बाद सीएनटी की धारा-87 के अन्तर्गत भूमि बंदोबस्त पदाधिकारी के न्यायालय में उक्त पांच अंचलों से ही संबंधित 24 हजार 529 मामले दर्ज हैं जो लंबित है।

     सर्वे खतियान और रजिस्टर-टू में उक्त गड़बड़ी की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पलामू के तत्कालीन उपायुक्त ने विभागीय सचिव को वर्ष 2017 में दो-दो पत्र लिखकर उक्त परिपेक्ष्य में मार्गदर्शन देने का अनुरोध किया था।किन्तु आश्चर्य की बात है कि ऐसे संवेदनशील मामले में भी अबतक उक्त भारी त्रुटियों को दूर करने हेतु सचिव स्तर पर कोई निर्देश नहीं दिया गया। जबकि नये रजिस्टर-टू के आधार पर लगान वसूली एवं राजस्व कार्य के निष्पादन में कई प्रकार की कठिनाई हो रही है।

    भूमि की एक अन्य महत्वपूर्ण व गंभीर समस्या गैर मजरूआ मालिक जमीन की है।यह पूरी तरह से कानूनन रैयती जमीन है।इसके बावजूद इस किस्म की भूमि के निबंधन पर सरकार द्वारा रोक लगा दी गयी है। इस गैर लोकतांत्रिक आदेश ने किसानों को आत्महत्या करने पर विवश कर दिया है।

     भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यसमिति के पूर्व सदस्य ललन कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पलामू में सर्वे खतियान एवं रजिस्टर-टू में भारी गड़बड़ी की सुधार गांव-पंचायत स्तर पर मिनी सर्वे कैम्प लगाकर युद्धस्तर पर कराने का आग्रह किया है। भाजपा नेता श्री सिंह ने कहा है कि सर्वे-खतियान में बड़े पैमाने पर की गयी गड़बड़ी के कारण किसानों के बीच सरकार के प्रति गलत धारणा उत्पन्न हो रही है। साथ ही उन्होंने गैरमजरुआ मालिक किस्म की भूमि के निबंधन पर लगायी गयी रोक को किसानहित एवं जनहित में तत्काल हटाने का भी पुरजोर आग्रह किया है।