मेदिनीनगर से करीब 25 किलोमीटर दूर रामगढ़ प्रखंड के बाघी गांव में शुक्रवार को वनवासी कल्याण केन्द्र का घर वापसी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

मेदिनीनगर से करीब 25 किलोमीटर दूर रामगढ़ प्रखंड के बाघी गांव में शुक्रवार को वनवासी कल्याण केन्द्र का घर वापसी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पलामू जिले के सुदूरवर्ती व जनजातीय बहुत प्रखंड रामगढ़ के इस बाघी गांव में ईसाई धर्म अपना चुके 28 घरों के 125 लोग पुन: अपने मूल धर्म (सरना और हिन्दू धर्म) में वापस लौट गए। वनवासी कल्याण केन्द्र के जनजाति धर्म संस्कृति सुरक्षा मंच के तहत आयोजित घर वापसी कार्यक्रम में बाघी, लरगहिया, चपलसी और उलडंडा के महिला-पुरूष और बच्चों का पैर प्रछालन कर अपने मूल धर्म में स्वागत किया गया। मूल धर्म में वापस लौटने वाले परिवारों में एक परिवार उरांव, तीन परिवार खरवार और 24 परिवार भुईयां जनजाति व जाति से संबंधित हैं। मूल धर्म में लौटने पर सभी लोगों को गंगा जल ग्रहण कराते हुए शुद्धिकरण कर हवन कराया गया। उसके पश्चात सभी लोगों को तिलक और भगवान शिव का लॉकेट पहनाया गया। मौके पर भारत माता की जय और सरना माता की जयकारा भी लगाया गया। तत्कालीन रंका इस्टेट के वर्तमान राजा गुलाब सिंह, सुरक्षा मंच के प्रांतीय संयोजक संदीप उरांव, वनवासी कल्याण केन्द्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री महरंग उरांव, प्रांत संगठन मंत्री सत्येन्द्र सिंह, मेघा उरांव, भिखा उरांव, कैलाश उरांव,  अमलेश्वर दुबे, वैद्य शिवनारायण पाठक, अश्विनी मिश्रा,भाजपा नेता श्याम नारायण दुबे, विभाकर नारायण पांडेय, भाजपा के प्रदेश मंत्री मनोज सिंह, आरएसएस के विभाग संघचालक अजय कुमार आदि मूल धर्म में लौटे परिवारों का का स्वागत किया। हवन और पूजा पाठ पाहन उदेश्वर  सिंह और नथू सिंह की अगुवाई में हुआ। सरना धर्म में वापस लौटने वाले लोगों को धोती, साड़ी और कपड़ा भी बतौर उपहार दिया गया