मौत का डर कैसा...

मौत का डर कैसा

मौत ! मौत !! मौत !!!

जब देने लगे दस्तक  

ज़िन्दगी के द्वार पर 

तो

घबराना मत .

साथी बना लेना उसे

लगा लेना खुशी-खुशी गले

क्यों कि......?

ज़िन्दगी तो बेवफ़ा है

ठुकरा ही देगी एक दिन

मौत बेशक बावफ़ा है

वादा निभाती है ज़रूर


और

दुनिया का यही दस्तूर है

जिसने जन्म लिया 

इस धरती पर

उसे एक दिन

मरना ज़रूर है.

तो मौत से डर कैसा ?

बना लो मौत को

हमसफ़र जैसा.

हां साथियों......!

उठो 

छेड़ दो जंग 

ज़ुल्म और ज़ालिम के संग

सच्चाई से मुकर गये तो

डरते-डरते मर गये तो

जीवन बड़ा बदनाम होगा


गर बुराई के ख़िलाफ़ 

लड़ते- लड़ते मर भी गये तो

शहीदों में तेरा नाम होगा

देखते-देखते तेरे उसुलों का

सारा ज़माना ग़ुलाम होगा


नज़ीरुद्दीन खां ,सबनवां

पलामू झारखंड

7781994646

naziruddinkhan81@gmail.com