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बकोरिया कांड, झारखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, खारिज हुई सरकार की एसएलपी याचिका. समेत अन्य मह्त्वपूर्ण खबरें।

                                                                   बकोरिया कांड 

                     झारखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, खारिज हुई सरकार की एसएलपी याचिका

नयी दिल्ली, 22 फरवरी (एजेंसियां): पलामू जिले के सतबरवा थाना क्षेत्र अंतर्गत बकोरिया में हुई कथित मुठभेड़ कांड में झारखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। बकोरिया मुठभेड़ कांड की सीबीआई जांच रोकने के लिए झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पीटिशन (एसएलपी) दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान खारिज कर दिया। राज्य सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट की स्टैंडिंग काउंसिल तापेश कुमार सिंह ने एसएलपी दायर की थी। 22 अक्तूबर को झारखंड हाईकोर्ट ने बकोरिया मुठभेड़ कांड की सीबीआई जांच के आदेश दिये थे। हाईकोर्ट ने सीआईडी अनुसंधान के कई बिंदुओं पर संदेह जताया था। इसके बाद 19 नवंबर को सीबीआई दिल्ली की स्पेशल सेल ने एफआईआर दर्ज की थी। आठ जून 2015 को बकोरिया के तथाकथित मुठभेड़ में माओवादी कमांडर डॉ अनुराग, पारा टीचर उदय यादव, एजाज अहमद, योगेश यादव समेत 12 लोग मारे गए थे। उदय यादव के पिता जवाहर यादव ने मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए हाईकोर्ट में मामला दायर किया था। मामले को लेकर झारखंड ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी याचिका दाखिल कर कहा कि झारखंड पुलिस ने 12 नक्सलियों को मार गिराया था। इसी वजह से पुलिस को सताने की कोशिश हो रही है, लेकिन कोर्ट ने सरकार की इस बात को खारिज कर दिया और सीबीआई जांच को सही मानते हुए सरकार की याचिका खारिज कर दी।  विदित हो कि आठ जून 2015 की रात एक नक्सली और 11 निर्दोष लोगों को कथित पुलिस मुठभेड़ में मार दिया गया था। इस कांड की जांच सीआईडी पहले ही कर चुकी है, जिसमें इसने झारखंड पुलिस की कार्रवाई को क्लीन चिट दे दी। इसके बाद 22 अक्टूबर 2018 को झारखंड हाई कोर्ट ने इस फर्जी मुठभेड़ की सीबीआई जांच का आदेश दिया था।

            पलामू: सेंटल जेल के विचाराधीन कैदी की मौत, परिजनों ने मुआवजा के लिए किया हंगामा 

पलामू 22 फरवरी: मेदिनीनगर सेंट्रल जेल में शुक्रवार को एक विचाराधीन कैदी ज्ञानी सिंह (22 वर्ष) की मौत हो गई। ज्ञानी सिंह पिछले आठ महीने से डालटनगंज सेंट्रल जेल में बंद था। सीने में दर्द होने के बाद उसकी हालत खराब हो गयी। आनन-फानन में उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया जा रहा था कि रास्ते में ही उसकी मौत हो गयी। बाद में शव सदर अस्पताल में रखा गया। शव को पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। ज्ञानी प्रेम-प्रसंग के मामले में जेल में बंद था।   जेल अधीक्षक प्रवीण कुमार ने बताया कि ज्ञानी चैनपुर थाना कांड संख्या 80/2017 आईपीसी की धारा 376/420 का आरोपी था। उसे गत 2 जुलाई 2018 से सेंट्रल जेल में लाया गया था। उन्होंने बताया कि तड़के तीन बजे भोर में उसकी छाती में दर्द की शिकायत हुई। तत्काल उसे जेल चिकित्सक डा. वीरेन्द्र कुमार से इलाज कराया गया। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी। जेल अधीक्षक ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम के बाद रिपोर्ट आने पर मौत के कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा। विचाराधीन कैदी की मौत की सूचना मिलने के बाद उसके परिजन सदर अस्पताल पहुंचे और हंगामा करने लगे। परिजनों ने जिला प्रशासन से उचित मुआवजा की मांग की है। ज्ञानी चैनपुर थाना क्षेत्र के कुई गांव का रहने वाला था।

पलामू: कालेजों के नैक एक्रीडिएशन की तैयारी तेज, अगले सत्र से ऑनलाइन एडमिशन एवं सूचना तकनीकि व्यवस्था को करने पर बल 

पलामू 22 फरवरी: नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय के काॅलेजों के नैक एक्रीडिएशन और अगले सत्र 2019-20 से आॅनलाइन एडमिशन की तैयारी तेज कर दी गयी है. इस सिलसिले में शुक्रवार को योध सिंह नामधारी महिला महाविद्यालय में कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एसएन सिंह उपस्थित थे.   

कार्यशाला में मुख्य रूप से सरकार के उच्च तकनीकि शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के निर्देशानुसार राज्य के महाविद्यालयों के नैक एक्रीडिटेशन पर चर्चा की गई. एनपीविवि के कुलपति डाॅ. एसएन सिंह ने कार्यशाला आयोजन के अवचित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नैक कराने कि दिशा में जो काॅलेज शिथिल हो चुके हैं, उन्हें गति बनाने की जरूरत है. सत्र 2019-2020 से सभी काॅलेजों द्वारा आॅनलाईन एडमिशन किये जायेंगे. सीटों की संख्या निर्धारित होगी. ऐसी स्थिति में सभी लोगों को सरकार की नीतियों के अनुरूप अपने काॅलेजों को उन्नत बनाना होगा.

नैक कराना सिर्फ अंगीभूत काॅलेजों को ही नहीं, बल्कि एफलियेटेड काॅलेजों के लिए भी अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि नैक के लिए काॅलेज में पहले सारी उच्च कोटि की सुविधाएं डेवलप किये जाएं, बल्कि आधारभूत संरचना को दुरूस्त कर के भी नैक कराय