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रांची यूनिवर्सिटी के सभी शिक्षकों के डॉक्यूमेंट की होगी विजिलेंस जांच

रांची यूनिवर्सिटी के सभी शिक्षकों के डॉक्यूमेंट की होगी विजिलेंस जांच

आरयू में नियुक्ति के बाद नहीं कराया जाता है शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का वेरिफिकेशन


*रांची(राकेश) :* रांची यूनिवर्सिटी अपने शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहा है। कभी प्रमाण पत्र में टेम्परिंग को लेकर। तो कभी फर्जी प्रमाण प्रत्रों को लेकर। फर्जी प्रमाण पत्र की गूंज हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंची है। इसके बाद भी किसी कुलपति ने यूनिवर्सिटी शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच कराने के लिए कदम नहीं उठाया। नियुक्ति के समय अभ्यर्थी द्वारा दिए गए डॉक्यूमेंट का भी वेरिफिकेशन नहीं कराया गया। लेकिन आने वाले दिनों फर्जीवाड़ा करने वाले शिक्षकों की खैर नहीं है, क्योंकि रांची यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अपने अंतर्गत कार्यरत सभी शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच कराने की घोषणा की है।


*शीघ्र ही समुचित कदम उठाए जाएंगे*


    सोमवार को कुलपति प्रो. रमेश कुमार पांडेय ने कहा कि सभी शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच विजलेंस से कराई जाएगी। इसके लिए शीघ्र ही समुचित कदम उठाए जाएंगे। सरकार से भी बातचीत की जाएगी। बताते चलें कि थर्ड और फोर्थ ग्रेड में नियुक्ति के बाद संबंधित अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र का वेरिफिकेशन करने के बाद ही वेतन भुगतान किया जाता है। लेकिन लेक्चरर बने अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र का वेरिफिकेशन करना आरयू प्रशासन ने उचित नहीं समझा है।

इन वर्षों में सबसे अधिक गड़बड़ी

रांची यूनिवर्सिटी में वर्ष 1986 से 90 के बीच सबसे अधिक अंकों में हेराफेरी किया गया है। परीक्षा विभाग पर पैनी नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि उक्त अवधि के बीच टेबलेटिंग रजिस्टर पर स्याही तक गिरा दिया गया है। ताकि रजिस्‍टर में पोस्ट किया गया को कोई पढ़ नहीं सके। कई अभ्यर्थियों को जांच के लिए जब परीक्षा विभाग में उक्त अवधि का प्रमाण पत्र आता है तो इसका लाभ भी मिल जाता है।

एक व्यक्ति के तीन-तीन अंक पत्र

नव अंगीभूत कॉलेज के एक शिक्षक के तीन-तीन अंक पत्र सामन आ चुका है। इस कैटेगरी के कॉलेज शिक्षकों की सेवा समंजन का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। इस मामला पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा जस्टिस एसबी सिन्हा आयोग का गठन किया गया है। इस आयोग में भी शिक्षकों के फर्जीवाड़ा के कारनामे सामने आ चुके हैं। दो शिक्षक को फर्जीवाड़ा मामले और एक शिक्षक को नियम विरुद्ध इंप्रूवमेंट एग्जाम में बर्खास्त किया गया है। इसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा करने के लिए आरयू के रजिस्ट्रार डॉ. अमर कुमार चौधरी अभी दिल्ली में हैं। मंगलवार को अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में रिपोर्ट जमा करेंगे।

एक समय में कर रहे थे दो-दो जॉच

नव अंगीभूत कॉलेज में कुछ ऐसे शिक्षक भी हैं, जो एक समय पर दो-दो जॉब कर रहे थे। जानकार बताते हैं कि सरकार द्वारा टेकओवर करने से पहले कई शिक्षक दूसरी जगह जॉब करते हुए नव अंगीभूत कॉलेज में प्रोफेसर भी थे। वहीं दूसरे अंगीभूत कॉलेज में क्लर्क थे। लेकिन जब नवांगीभूत कॉलेज का सरकार द्वारा अधिग्रहण किया जाने लगा, तो दूसरी जॉब छोड़ दी। यह सब रिकाॅर्ड में है।


    *जांच हुई तो कई की जाएगी नौकरी*


    अभी सिर्फ तीन कॉलेज शिक्षकों की नौकरी हेराफेरी मामले में गई है। इस मामले की निष्पक्ष और सूक्ष्मता से जांच की गई तो फर्जीवाड़ा कर बने कई शिक्षकों की नौकरी जाना तय है। फर्जीवाड़ा कर बने शिक्षक प्रतिमाह भारी भरकम वेतन उठा रहे हैं। यूनिवर्सिटी के पुराने अधिकारी और कर्मचारी ऐसे शिक्षक को जानते भी हैं। क्योंकि फर्जीवाड़ा करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई फाइल तक सिमट कर रह गई है।