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बड़ी उपलब्धि: रिम्स में मुफ्त हुई ओपेन हार्ट सर्जरी, बाहर चार लाख तक का खर्च आता

बड़ी उपलब्धि: रिम्स में मुफ्त हुई ओपेन हार्ट सर्जरी, बाहर चार लाख तक का खर्च आता

रांची,  ब्यूरो

रिम्स के सीटीवीएस डिपार्टमेंट ने रविवार को एक बच्चे को न सिर्फ जीवन दान दिया, बल्कि ओपन हार्ट सर्जरी के क्षेत्र में रिम्स का नया इतिहास भी लिख दिया। धनबाद निवासी एक 15 वर्षीय बच्चे के दिल के चार वॉल्व में से एक माईट्रल वॉल्व जहां आर्टिफिशयल वॉल्व से रिप्लेस कर दिया गया। वहीं दूसरा ट्राइकस्पिड वॉल्व से नियमित रूप से हो रहे लीकेज को भी पूरी तरह ठीक कर दिया गया। यही नहीं, दिल के लेफ्ट आट्रियम में जमे लगभग 100 ग्राम खून के थक्के को भी हटा दिया गया। ओपन हार्ट सर्जरी की यह पूरी प्रक्रिया एम्स, नई दिल्ली के प्रख्यात कार्डियक सर्जन डॉ देवगुरु व एम्स के ही कार्डियेक एनेस्थेटिक डॉ पराग के कुशल निर्देशन में डॉ राकेश चौधरी व उनकी टीम में शामिल डॉ सुमेघा, डॉ तुषार, डॉ कुंदन व डॉ बिमलेश ने किया। 

डॉ राकेश चौधरी ने बताया कि मरीज की सर्जरी यदि शीघ्र ही नहीं की जाती तो उसकी जान का भी खतरा था। खून का जमाव होने के कारण उसके दिल का आकार लगभग दो गुना हो गया था। एक वाल्व के खराब होने से शुद्ध खून को शरीर में भेजने की प्रक्रिया बंद हो चुकी थी। जबकि, दूसरा वाल्व लीक होने से दिल में खून का जमाव हो रहा था। उन्होंने बताया कि किसी बड़े अस्पताल में ही यह सर्जरी संभव है।  इसमें तीन से चार लाख तक का खर्च आता, लेकिन रिम्स में यह सर्जरी बिलकुल मुफ्त की गई। विभागाध्यक्ष डॉ अंशुल कुमार ने बताया कि शनिवार को शुरू हुआ यह वर्कशॉप सोमवार तक चलेगा। 

               क्या है माइट्रल वॉल्व

डॉ सुमेघा ने बताया कि पूरे शरीर में खून का प्रवाह दिल के बायीं तरफ से ही होता है। माइट्रल वॉल्व खून को उल्टी दिशा में जाने से रोकता है। इसके सिकुड़ जाने से खून का प्रवाह बाधित हो जाता है। मरीज को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।थोड़ा काम करने पर भी थकावट हो जाती है। मरीज के दिल में जमे खून के बारे में डॉ सुमेघा ने बताया कि यह खून यदि शरीर के किसी हिस्से में चला जाए तो वह अंग काम करना बंद कर देता है, मरीज की जान भी जा सकती है। डॉ राकेश चौधरी ने बताया कि माइट्रल वाल्व का सिकुड़ना एक रूमैटिक बीमारी है, जो बचपन में होता है। बच्चों को लगातार सर्दी-खांसी व गला में संक्रमण होने पर यह वाल्व सिकुड़ जाता है। इस बच्चे में भी यही समस्या थी जो समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण बढ़ती ही जा रही थी।