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पोषण पुनर्वास केंद्र में मिली कुणाल को नई जिंदगी और मां को सीख

पोषण पुनर्वास केंद्र में मिली कुणाल को नई जिंदगी और मां को सीख 

कोरबा| मार्च 4 ,2019|

पोषण पुनर्वास केंद्र न्यूट्रीशनल  हैबिटेशन  सेंटर (एनआरसी)  में अपने 14 माह के बच्चे के साथ बैठी  ललित यादव मानती है कि  गर्भावस्था में उसने अच्छी खुराक नहीं खाई और नियमित जांच भी नहीं करवाई जो जानकारी उसको मितानिन देकर जाती थी, उस पर भी अमल नहीं किया | जिसके कारण उसका पहला ही बच्चा कुणाल कुपोषण का शिकार हो गया | 

कुणाल का वजन बहुत ही कम था और उसकी तबीयत बिगड़ती ही जा रही थी तब मितानिन ने उसे पोषण पुनर्वास केंद्र के बारे में बताया और बच्चे को वहां लेकर जाने की सलाह भी दी `` अब कुणाल पहले से ठीक है उसका वजन भी बढ़ रहा है | यहां मेरे बेटे को मुफ्त खाने पीने के  अलावा  इलाज भी मिल रहा है और मैडम ने बताया कि यहां से छुट्टी के उपरांत हमें 15 दिन का मजदूरी क्षतिपूर्ति के रूप में 2250 रुपए का चेक दिया जाएगा,’’ ललित बताती हैं |कुछ ऐसी ही स्थिति बुधवारो बाई के बेटे संगीत कुमार की भी थी| विश्रामपुर की रहने वाली बुधवारो बाई ने बताया कि उनकी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने उसे  बताया कि उनका बच्चा गंभीर कुपोषण का शिकार है| ``उसके बाद मितानिन और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हमको एनआरसी लेकर आई यहां हमारे बच्चे का इलाज चल रहा है | यहां पर दूध दलिया खिचड़ी हलवा दाल का पानी दोनों टाइम दवाएं दी जा रही है | हमारे बच्चे का रोज वजन भी लिया जाता है,’’ वह बताती है|

कुणाल और संगीत कुमार जैसे बहुत से बच्चों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रहा है यह पोषण पुनर्वास केंद्र यहां पर कुपोषित और अति कुपोषित 5 साल से कम उम्र के बच्चों की देखभाल और इलाज सरकार द्वारा मुफ्त किया जाता है जब बच्चों को डिस्चार्ज किया जाता है तब उनके घर वालों को खासकर  उनकी माताओं को उनकी देखभाल करने के तरीके भी बताए जाते हैं| 

जिला अस्पताल कोरबा का एनआरसी केंद्र 10 बेड वाले केंद्र पर माह में लगभग 50 बच्चे को कुपोषण से सुपोषण की ओर लाया जा रहा है केंद्र की परामर्शदात्री हेमलता  कुम्भज ने बताया कि इस केंद्र में गंभीर कुपोषित बच्चों को लाया जाता है | मिड अपर आर्म सरकम्फ्रेंस (MUAC) से उसकी ऊंचाई और दोनों पैरों में सूजन देखकर उसका परीक्षण होता है उसके बाद उसकी भूख की जांच करते है | जिसे ऐपेटाइट टेस्ट कहते है |

केंद्र में कुपोषित बच्चों को खास प्रकार का पोषण दिया

 जाता है  जिसे  एफ 100 और एफ 75  कहते हैं | इसके अलावा खिचड़ी हलवा मूंगफली का पाउडर दलिया दोनो टाइम नियमित रूप से दवाएं 15 दिन तक उसका वजन लिया जाता है | आवक दर्ज रिकॉर्ड से जब तक 15% अधिक वजन नहीं बढ़ता तब तक  उसकी छुट्टी नहीं करते है |बच्चे की देखभाल करने वाली किसी एक सदस्य को 150 रुपए प्रतिदिन मजदूरी क्षतिपूर्ति के रूप में 15 दिन की क्षतिपूर्ति राशि बच्चे की छुट्टी वाले दिन चेक के माध्यम से दी जाती है, हेमलता ने बताया राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4  के अनुसार कोरबा जिले  में 5 वर्ष से कम 33.1% बच्चे बोनेपन का शिकार है यानी जिनकी लंबाई उम्र के अनुपात में कम है 25.7% बच्चों के वजन लंबाई के अनुपात में कम है 6.6% बच्चे ऐसे हैं जिनका वजन लंबाई के अनुपात में बहुत ही कम है और 36.5% बच्चे ऐसे हैं जिनका वजन उम्र के अनुपात में कब है 

बच्चों में कुपोषण का कारण कुपोषित मां ,खून की कमी और स्वास्थ्य आहार में कमी होता है| कुपोषित बच्चों में डायरिया और निमोनिया का खतरा ज्यादा रहता है जो कभी जानलेवा भी साबित हो सकता है|