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उधार पर चल रहा पोषाहार, आपूर्तिकर्त्ता मालामाल और उपायुक्त भी हैं लाचार- राजमुनी

उधार पर चल रहा पोषाहार, आपूर्तिकर्त्ता मालामाल और उपायुक्त भी हैं लाचार- राजमुनी

    मेदिनीनगर(पलामू): जिले के समाज कल्याण विभाग में पोषाहार खरीद में 11 करोड़ रुपये के गबन के मामले में बिश्रामपुर एवं हरिहरगंज सीडीपीओ के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी जिले की कई परियोजनाओं में आज भी आपूर्तिकर्ता(संवेदक) के खाता में ही पोषाहार की राशि भेजी जा रही है। इस आशय का आरोप  झामुमो के केन्द्रीय नेता एवं आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका अधिकार संघर्ष मोर्चा के प्रमंडलीय प्रभारी राजमुनी मेहता ने उपायुक्त को लिखे पत्र में लगाया है।   

     उपायुक्त को लिखे पत्र में श्री मेहता ने कहा है कि पाटन बाल विकास परियोजना में वर्ष 2015 से फरवरी 2019 तक संवेदक अमूल्य ट्रेडर्स, अंकित ट्रेडर्स एवं श्रीराम ट्रेडर्स(सभी पाटन) के खाता में ही पोषाहार की राशि भेजी गयी है। जबकि आंगनबाड़ी सेविकायें उधार पोषाहार खरीदकर राशि के लिए भटक रही हैं और दूसरी तरफ आपूर्तिकर्ता(संवेदक) मालामाल हो रहे हैं।अभी भी बिश्रामपुर परियोजना की सेविकाओं को एक साल से पोषाहार की राशि नहीं मिली है।श्री मेहता ने आरोप लगाया है कि इस समस्या के निराकरण हेतु वे कई बार जिला समाज कल्याण पदाधिकारी से मिले, किन्तु बकाये पोषाहार की राशि भुगतान हेतु कोई कार्रवाई नहीं की गयी। झामुमो नेता ने उपायुक्त से आग्रह किया है कि पोषाहार राशि के भुगतान के मामले स्वयं संज्ञान लेते हुए अविलंब भुगतान करायें।साथ ही जिन 74 आपूर्तिकर्ताओं(संवेदकों) के मामले में गबन की प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है, उन्हें अविलंब गिरफ्तार कराने की कार्रवाई की जाये।

        उपायुक्त का आदेश ठंढ़े बस्ते में                                                            विगत 11दिसंबर 2018 को पलामू के उपायुक्त के वेश्म में आयोजित जनता दरबार में जिला समाज कल्याण कार्यालय से संबंधित शिकायतों की झड़ी लग गयी।तब उपायुक्त ने उक्त सभी मामलों में दोषी जिला समाज कार्यालय में प्रतिनियुक्त सहायक शंकर विश्वकर्मा को विभागीय कार्य संपादन में शिथिलता बरतने के मामले को लेकर विरमित करने का निदेश दिया था। साथ ही जिला समाज कल्याण पदाधिकारी को शंकर विश्वकर्मा को निलंबित करने के लिए प्रमण्डलीय आयुक्त के पास प्रस्ताव भेजने का निदेश दिया था। आश्चर्य की बात तो यह है कि तीन माह बीत जाने के बाद भी कार्यवाहक सहायक शंकर विश्वकर्मा को जिला समाज कल्याण कार्यालय से न तो विरमित किया गया और न ही निलंबन का प्रस्ताव प्रमंडलीय आयुक्त के पास भेजा गया।

     गौरतलब तो यह है कि झामुमो नेता राजमुनी मेहता की पहल पर एवं माननीय लोकायुक्त के आदेश पर जब पोषाहार राशि के गबन की जांच करायी गयी, तब भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु  अधिकारी कुमार ताराचंद के नेतृत्व में गठित जांच टीम ने भी समाज कल्याण कार्यालय के कार्यवाहक सहायक शंकर विश्वकर्मा को विभिन्न संचिकाओं के संधारण के मामले में दोषी पाया था।जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट उल्लेख है कि श्री विश्वकर्मा की भूमिका सेविका- सहायिका से संबंधित संचिका/ पंजियों के संधारण में संदिग्ध है।ऐसे ही आरोप में कार्यालय नाजिर सतीश उरांव के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर दी गयी, जबकि शंकर विश्वकर्मा को क्लीन चीट दे दी गयी। आखिर क्या कारण है कि प्रभारी जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, सहायक शंकर विश्वकर्मा पर इतने मेहरबान क्यों हैं कि उपायुक्त के आदेश और जांच टीम के प्रतिवेदन को ठंढ़े बस्ते में डाल दिया ?