127 Views

यादगार होगा अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य समागम.

यादगार होगा अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य समागम.

आगामी 9 एवं 10 मार्च को आयोजित होने वाले दो दिवसीय अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य समागम की तैयारी अंतिम चरण में है।इसके सफलता को लेकर डा.विजय प्रसाद की अध्यक्षता एवं उमेश कुमार पाठक 'रेणु' के संचालन में  स्थानीय 'रेलवे क्लब' में 'परिमल प्रवाह' की बैठक आयोजित की गयी,जिसमें श्रीधर प्रसाद द्विवेदी, सत्यनारायण तिवारी, रमेश सिंह, मिर्जा खलील बेग,डा.पुष्पलता,शिल्पा शालिनी, विजय मिश्र,सत्यनारायण पाण्डेय व परशुराम तिवारी सहित कई सदस्यों ने भाग लिया। बैठक में आगंतुक साहित्यकारों के स्वागत व उनके रहने आदि की व्यवस्था सहित समागम की तैयारी के प्रत्येक विन्दुओं पर विचार विमर्श किया गया। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि हिन्दी साहित्य समागम को यादगार बनाया जायेगा।

विदित है कि समागम का आयोजन स्थल मेदिनीनगर  प्रखंड अंतर्गत जी.जी.पी.एस.जमुने निर्धारित है,जहां देशभर के  पचास से अधिक ख्यातिनाम साहित्यकार हिन्दी विषयक परिचर्चा एवं कवि सम्मेलन में भाग लेंगे। इस बेहद खास आयोजन में पलामू के साहित्यकारों एवं सुधी जनों को 'आधुनिक हिन्दी काव्यों में राष्ट्रीय चेतना' तथा 'भारतीय सामाजिक समरसता व साहित्य' विषय पर हिन्दी मनीषियों के द्वारा विद्वतापूर्ण व शोधपरक विचारों का श्रवण व मनन करने का सुअवसर मिलेगा।

इन मनीषियों में जबलपुर के डा.संजीव वर्मा 'सलिल' ,केन्द्रीय विश्वविद्यालय रांची की पूजा शुक्ला, उत्तराखंड की रंजीता सिंह, नेपाल की श्वेता दीप्ति, लखनऊ के उमाशंकर शुक्ल व ओम अभिनव, दिल्ली के सत्यदेव तिवारी व विनय विनम्र, बक्सर के भगवान पाण्डेय, छत्तीसगढ़ के सुनील गुप्ता, रांची के संजय कृष्ण व सुधीर मिश्र,चतरा के रविकांत शुभम् एवं डा.रवीन्द्र प्रसाद, भोपाल के अशोक व्यग्र, रेणुकूट के लक्ष्मीनारायण 'पन्ना', गहमर के अखंड गहमरी,  जमशेदपुर के सोनी सुगंधा व शैलैन्द्र पाण्डेय 'शैल' तथा कैमूर के विनोद कैमुरी ने समागम में शरीक होने  की पूर्ण सहमति प्रदान कर दी है।

कार्यक्रम में एक फलक पलामू के साहित्यकारों के लिये भी है,जो काव्य पाठ के साथ 'पलामू का साहित्य,अतीत व वर्तमान' विषय पर समीक्षात्मक दृष्टि डालते हुये अपनी प्रतिभा व हुनर का नुमाया करेंगे तथा पलामू की समृद्ध साहित्यिक परंपरा से सबको अवगत करायेंगे।

चर्चा है कि ऐसे साहित्यिक आयोजन से हिन्दी में सृजन के लिये अनुकूल वातावरण का निर्माण होगा। साथ ही हिन्दी साहित्य के संवर्द्धन में लगे चितेरों की हौसला अफजाई भी होगी।