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निर्माण कार्य में अपने हुनर का लोहा मनवा रही हैं रानी मिस्त्री ,शांति के हौसले को मिली उड़ान, बना डाले 150 मकान

 निर्माण कार्य में अपने हुनर का लोहा मनवा रही हैं रानी मिस्त्री ,शांति के हौसले को मिली उड़ान, बना डाले 150 मकान

    कुंदन वर्मा की कलम से---

डालटनगंज 07 मार्च: पलामू में महिला तरक्की की नयी इबारत लिखी जा रही है। इसकी एक नजीर है शांति देवी, जिसने अब तक 150 से ज्यादा मकानों की नीव गढ़ी है।

स्थानीय सुदना की रहने वाली 44 वर्षीया शांति देवी की पहचान आज एक कुशल रानी मिस्त्री के रूप में होती है। देखते ही देखते यह नाम हर किसी की जुबां में चढ़ गया है। यही वजह है कि चाहे  शहर में शौचालय का निर्माण कराना हो या गगनचुम्बी इमारतों का, लोग शांति देवी की सेवा लेना चाहते हैं। रानी मिस्त्री शांति देवी भी एक नयी पहचान पाकर ‘रानी की तरह उत्साहित है। इसी का नतीजा है कि उसके हौसले बुलंद हैं औ वह सामाजिक बंधनों तथा परंपराओं से निकलकर खूबसूरत इमारतों को गढ़ने में जुटी हैं।

छत्तरपुर इलाके में रहने वाले राजेन्द्र प्रसाद की पत्नी शांति देवी रानी मिस्त्री के तौर पर अपने को स्थापित कर अपने तीन बच्चों का भरण-पोषण कर रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि शांति देवी एक-दो वर्ष से नहीं, बल्कि पूरे 19 साल से मकानों-भवनों का निर्माण कर रही हैं। फिलवक्त वह टीओपी-3 में एक चबूतरे के निर्माण में जुटी है। शहर के सुदना इलाके में अधिकतर घरों-मकानों का निर्माण शांति के हाथांे ही हुआ है।

पलामू जैसे जिले, जहां मानव तस्करी हमेशा से अभिशाप रहा है, वहां की महिलाओं के हौसलों को अगर इस प्रकार उड़ान मिलती रहे तो निश्चित तौर पर राज्य के दूसरे जिलों के लिए भी यह एक बेहतर उदाहरण हो सकता है।

मुझे गर्व है कि मैं अपने पंचायत की

अकेली रानी-मिस्त्री हूं। अच्छा लगता है कि जो

काम पहले केवल पुरूषों के वर्चस्व में था, वह

अब महिलायें भी कर रही हैं। इससे जहां

महिलाओं को नयी पहचान मिली है, वहीं उन्हें

आर्थिक रूप से सशक्त होने का मौका भी मिला है।

शांति देवी

रानी मिस्त्री, डालटनगंज