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महामहिम राष्ट्रपति ने लातेहार की रानी मिस्त्री सुनीता को वर्ष 2018के नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया

महामहिम राष्ट्रपति ने लातेहार की रानी मिस्त्री सुनीता को वर्ष 2018के नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर लातेहार की सुनीता देवी को देश भर से चयनित ४३ अन्य महिलाओं के साथ यह उपाधि एवं पुरस्कार स्वरुप एक लाख रुपये प्रदान किये गए।

भारत के महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक समारोह में *झारखण्ड के सुनीता देवी को वर्ष 2018 के प्रतिष्ठित नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।* कार्यक्रम में मुख्य रूप से केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गाँधी भी मौजूद थीं। 

लातेहार के सदर प्रखंड अंतर्गत उदयपुरा ग्राम में रहने वाली सीधी सादी आदिवासी महिला सुनिता देवी का चयन भारत की महिलाओं को दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान "नारी शक्ति पुरस्कार" के लिए स्वच्छता के क्षेत्र अति उल्लेखनीय कार्य करने के लिए किया गया।

भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा यह सम्मान महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में असाधारण कार्य करने के लिए प्रत्येक वर्ष देश भर की चुनिंदा महिलाओं को दिया जाता है।

सुनीता की सफलता की कहानी समाज के लिए एक मिसाल है:

बालूमाथ के तेतरियाखाड़ से वर्ष 2010 में अशोक भगत से शादी होने के बाद अपनी ससूराल उदयुपरा आई सुनीता देवी की हालत बहुत खराब थी।

शादी में खर्च के लिए ससूराल वालों के द्वारा सूद पर 

लिए कर्ज के कारण काफी परेशानी आई। कोई काम नहीं होने के कारण परिवार के साथ कड़ी मेहनत कर फसल उगाई और फसल बेचकर थोड़े रूपये जमा किए ताकि रूपये की कमी से घर का काम बाधित न हो। इसके बाद विकास आजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी। अच्छे काम को देखकर उसे टीम लीडर बना दिया गया। तभी सरकार की ओर से शौचालय निर्माण योजना की शुरूआत की गई और शौचालय निर्माण के लिए प्रेशर आना शुरू हुआ मगर राजमिस्त्री की कमी से परेशानी बढ़ने लगी। लिहाजा वर्ष 2017 में सुनीता रानी मिस्त्री बन गई और महिलाओं को रानी मिस्त्री के रूप में जोड़ना शुरू किया। इससे शौचालय निर्माण ने गति पकड़ ली और रानी मिस्त्री की संख्या भी बढ़ने लगी। इसके बाद सरकार की ओर से सुनीता को रानी मिस्त्री का प्रशिक्षण देने के लिए मास्टर ट्रेनर के रूप में चुन लिया गया।

सुनीता की गई तंगी, महिलाओं को कर रहीं जागरूक:

रानी मिस्त्री कहलाना कैसा लगता है, इस सवाल पर सुनीता देवी ने कहा कि आज मुझे रानी मिस्त्री के रूप में पुकारे जाने पर गर्व की अनुभूति होती है। स्वच्छ भारत कार्यक्रम के तहत शौचालय बनाने का काम मिलने से उनकी आर्थिक तंगी जाने लगी है। शादी में लिया कर्ज चुकाने के बाद उन्होंने जमीन को समतल कराया है और पानी के लिए बोरिंग भी कराई है ताकि सालों भर ठीक ढंग से खेती कर सकें। सुनीता ने बताया कि उसने जिले भर में 675 महिलाओं को रानी मिस्त्री बनाया है। सुनीता देवी इकलौती नहीं हैं, इन दिनों जिले के कई गांवों में महिला मिस्त्रियां सुर्खियों में हैं। आदिवासी इलाकों में गरीबी से जुझने वाली ये महिलाएं चुनौतियों को अवसर में बदलने लगी हैं।

रानी मिस्त्री को बुलाकर समझाओ की होती है चर्चा:

गांवों में महिलाओं की बड़ी तादाद अब पुरूषों के लगभग एकाधिकार वाले राजमिस्त्री का काम संभालने लगी हैं। नारी शक्ति पुरस्कार के लिए चयनित सुनीता देवी बताती हैं कि कई महिलाएं खुद की मेहनत और लगन से ये काम सीखने में सफल हुईं जबकि बहुतों को झारखंड राज्य आजीविका कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण दिलाया गया। फिर एक महिला ने दूसरी को जोड़ा जिससे कारवां बनता चला गया और जब महिलाएं यह काम बखूबी संभालने लगीं तो गांवों में किसी योजना के निर्माण या काम में यह चर्चा जरूर होती है कि रानी मिस्त्री को बुलाकर समझाओ। 1571 रानी मिस्त्रियों पर जमने लगा भरोसा : फुर्ती से ईंटों की जुड़ाई करती, छड़ बांधती और दीवारों पर ढलाई करती देख लोगों का भरोसा रानी मिस्त्रियों पर सीमेंट की मजबूती जैसा जमने लगा है। यही वजह है कि सरकारी व गैर सरकारी स्तर पर कार्यक्रम कर इन रानी मिस्त्रियों को सम्मानित किया जाने लगा है। *फिलवक्त जिले भर में 1571 रानी मिस्त्रियों की टीम काम कर रही है।*