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बड़ी खबर : आजसू को गिरिडीह सीट दिये जाने के बाद पहली बार पार्टी के खिलाफ मुखर हुए सांसद रविंद्र पांडेय, कहा, धरती पर कोई ऐसा नहीं, जो मेरा टिकट कटवा दे, बाघ की बलि नहीं दी जाती, बलि हमेशा बकरे की दी जाती है, पार्टी ने मुझे बकरा जान बलि दे दी :

बड़ी खबर : आजसू को गिरिडीह सीट दिये जाने के बाद पहली बार पार्टी के खिलाफ मुखर हुए सांसद रविंद्र पांडेय, कहा, धरती पर कोई ऐसा नहीं, जो मेरा टिकट कटवा दे, बाघ की बलि नहीं दी जाती, बलि हमेशा बकरे की दी जाती है, पार्टी ने मुझे बकरा जान बलि दे दी :

लोकसभा चुनाव को लेकर झारखंड में भाजपा-आजसू पार्टी के बीच गठबंधन हुआ है। इसके चलते गिरिडीह सीट आजसू पार्टी को दी गई है। यहां से भाजपा के रवींद्र पांडेय वर्तमान में सांसद हैं। जब से ये सीट आजसू को दी गई है तब से सांसद रवींद्र पांडेय के बेरमो स्थित आवासीय कार्यालय का माहौल एकदम बदला-बदला सा है। यहां भीड़ है, पर वह खामोश है। कुर्सियां हैं, पर लोग खड़े हैं। गिरिडीह के सांसद रवींद्र पांडेय से जब इस विषय में बात की गई तो उन्होंने दो टूक कहा कि बाघ की बलि नहीं दी जाती, पार्टी ने मुझे बकरा जान बलि चढ़ा दी। रविंद्र पांडेय ने कहा की धरती पर कोई ऐसा नहीं है, जो मेरा टिकट कटवा दे। सांसद ने गुनगुनाते हुए कहा - मौसम बदलता है।

पढ़िए रविंद्र राय के साथ सवाल जवाब के अंश :

सवाल- गिरिडीह अगर आजसू के पास रही तो आप क्या करेंगे? क्या चुनाव लड़ेंगे? 

जवाब- क्या टिकट मिल गया, क्या नामांकन हो गया? मैं क्या करुंगा, यह आने वाला समय बताएगा। हम अभी क्यों बताएं। एक-एक ब्लॉक में लोगों व कार्यकर्ताओं से मिलेंगे। सभी का विचार जानेंगे। राय लेंगे। फिर देखते हैं, क्या होगा। 

सवाल- क्या पार्टी सीट बंटवारे पर विचार करना चाहती है? 

जवाब- देखिए, मुझे जो कहना था, दिल्ली जाकर कह चुका हूं। अब मैं दिल्ली जाकर इस मामले पर बात भी नहीं करुंगा। चाहे, जो हो जाए। कऐसा थोड़े न है कि मैं टिकट के बिना मर रहा हूं। पार्टी को जो लगता है करे। उन्हें लगता है कि मैं हार जाऊंगा और आजसू जीत जाएगी तो यही सही। 

सवाल- गिरिडीह भाजपा से छूटी तो क्या होगा? 

जवाब- अब देखिए, टुंडी में हमारे कार्यकर्ता कहां जाएंगे? मैं सांसद हूं, वह भी अब नहीं रहूंगा। डुमरी में भाजपा की स्थिति ठीक नहीं है। गोमिया भी हमारे हाथ में नहीं हैं। अब बच गया बेरमो, गिरिडीह और बाघमारा, यह तीन विधानसभा में भाजपा है। बाघमारा की स्थिति भी अच्छी नहीं है। 

सवाल- 5 बार गिरिडीह सीट जीती, फिर पार्टी ने यह सीट ही आजसू को क्यों दी? 

जवाब- बाघ की बलि नहीं दी जाती। बलि हमेशा बकरे की दी जाती है। मेरा कोई गाॅड फादर नहीं है। न तो दिल्ली में और न ही यहां। मैं कमजोर हूं। इसलिए पार्टी ने मुझे बकरा जान बलि दे दी। गठबंधन को सीट चला जाना, एक बड़ा मुद्दा हो गया है। 

सवाल- पार्टी को क्यों लगा कि आखिर आप चुनाव हार जाते? 

जवाब- मैंने विकास कार्यों का जो आंकड़ा नेतृत्व को दिया था, मेरे दावा है कि एक भी भाजपा का सांसद (पीएम को छोड़कर) ऐसा आंकड़ा नहीं दिया होगा। ये किताब देखिए (किताब दिखाते हुए) यह मेरे कार्य का हिसाब है। 100 काम किया है तो 99 ही लिखा है। पर अब इस किताब का कोई महत्व नहीं रहा। मेरा तो पैसा भी बेकार हो गया। मुझे दु:ख है कि मेरे साथ अन्याय हुआ। 

सवाल- क्या अब आप कुछ करेंगे? 

जवाब- अभी क्यों बता दें। मैं कोई पिंजरा में रहने वाला आदमी नहीं हूं। मेरा डीनए अन्याय सहने वाला नहीं है। जो करेंगे, सब देखेंगे। 

सवाल- अब क्या आप घर (पार्टी) छोड़ेंगे? 

जवाब- अभी न घर छोड़ने की और न अन्याय सहने की जरूरत है। अभी सिर्फ शांत रहना है। होली की पुआ-पुड़ी खा लूंगा। साल-संवत बदल जाएगा। फिर देखा जाएगा। वह गाना है न… (गुनगुनाते हुए) पतझड़ सावन, बसंत बहार…। मौसम बदलता है, जनवरी के बाद फरवरी आता है। 

सवाल- गिरिडीह अगर आजसू के पास रही तो आप क्या करेंगे? क्या चुनाव लड़ेंगे? 

जवाब- क्या टिकट मिल गया, क्या नामांकन हो गया? मैं क्या करुंगा, यह आने वाला समय बताएगा। हम अभी क्यों बताएं। एक-एक ब्लॉक में लोगों व कार्यकर्ताओं से मिलेंगे। सभी का विचार जानेंगे। राय लेंगे। फिर देखते हैं, क्या होगा। 

सवाल- क्या पार्टी सीट बंटवारे पर विचार करना चाहती है? 

जवाब- देखिए, मुझे जो कहना था, दिल्ली जाकर कह चुका हूं। अब मैं दिल्ली जाकर इस मामले पर बात भी नहीं करुंगा। चाहे, जो हो जाए। कऐसा थोड़े न है कि मैं टिकट के बिना मर रहा हूं। पार्टी को जो लगता है करे। उन्हें लगता है कि मैं हार जाऊंगा और आजसू जीत जाएगी तो यही सही। 

सवाल- गिरिडीह भाजपा से छूटी तो क्या होगा? 

जवाब- अब देखिए, टुंडी में हमारे कार्यकर्ता कहां जाएंगे? मैं सांसद हूं, वह भी अब नहीं रहूंगा। डुमरी में भाजपा की स्थिति ठीक नहीं है। गोमिया भी हमारे हाथ में नहीं हैं। अब बच गया बेरमो, गिरिडीह और बाघमारा, यह तीन विधानसभा में भाजपा है। बाघमारा की स्थिति भी अच्छी नहीं है। 

सवाल- 5 बार गिरिडीह सीट जीती, फिर पार्टी ने यह सीट ही आजसू को क्यों दी? 

जवाब- बाघ की बलि नहीं दी जाती। बलि हमेशा बकरे की दी जाती है। मेरा कोई गाॅड फादर नहीं है। न तो दिल्ली में और न ही यहां। मैं कमजोर हूं। इसलिए पार्टी ने मुझे बकरा जान बलि दे दी। गठबंधन को सीट चला जाना, एक बड़ा मुद्दा हो गया है। 

सवाल- पार्टी को क्यों लगा कि आखिर आप चुनाव हार जाते? 

जवाब- मैंने विकास कार्यों का जो आंकड़ा नेतृत्व को दिया था, मेरे दावा है कि एक भी भाजपा का सांसद (पीएम को छोड़कर) ऐसा आंकड़ा नहीं दिया होगा। ये किताब देखिए (किताब दिखाते हुए) यह मेरे कार्य का हिसाब है। 100 काम किया है तो 99 ही लिखा है। पर अब इस किताब का कोई महत्व नहीं रहा। मेरा तो पैसा भी बेकार हो गया। मुझे दु:ख है कि मेरे साथ अन्याय हुआ। 

सवाल- किसी ने षड्यंत्र किया? 

जवाब- धरती पर कोई ऐसा नहीं, जो मेरा टिकट कटवा दे। बस यही कहेंगे कि यह दुर्भाग्य मेरा है, जो पार्टी ने मुझे इस लायक नहीं समझा।