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मायनें, बीडी राम के पुनः टिकट मिलने के

     मायनें, बीडी राम के पुनः टिकट मिलने के 

पलामू संसदीय सीट से भाजपा नें बीडी राम पर भरोसा जताया है. तमाम राजनीति घेराबंदी के बीच बीडी राम ने भाजपा की टिकट झटक कर यह साबित कर दिया की अब राजनीति के पीच के माहिर बल्लेबाज हो चूके है. इस बार टिकट की दौड में शामिल नेताओ के समर्थकों ने शुरुआती दौर में जो माहौल बनाया उससे यह लगने लगा था कि इस बार बीडी राम का टिकट कट सकता है. इस चर्चा को बल तब मिला जब होली के एक दिन पहले रांची में भाजपा कार्यालय में आयोजित समारोह में प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा की मौजूदगी में झाविमो के प्रभात भुईया की भाजपा में इंट्री हुई. वैसे यह बात राजनीति हल्के में पहले से ही चर्चा में थी बीडी राम पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के गुट से जुडे हुए है. टिकट की दौड में सासंद श्री राम का कई बार पूर्व मुख्यमंत्री श्री मुंडा से मुलाकात भी हुई, और मुलाकात की यह खबर सर्वाजनिक भी हुई, इस बीच भाजपा में प्रभात की इंट्री से यह लगा की उसकी इंट्री कही न कही मुख्यमंत्री रघुवर दास की इच्छा पर हुई है इसलिए प्रभात के इंट्री के साथ इस चर्चा को बल मिलने लगा की इस बार बीडी राम की टिकट कटा तय है. क्योकि पलामू संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्र में एक उनके रिश्तेदार विधायक राधाकृष्ण किशोर को छोड़कर अन्य विधायक आलोक चौरसिया, सत्येंद्र नाथ तिवारी, मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी सभी खिलाफत में ही झंडा उठाये थें. ऐसे में बीडी राम के लिए यह लडाई आसान नही थी. विरोध की इतनी मजबूत घेराबंदी के बाद  यदि बीडी राम टिकट हासिल कर पाने में सफल हुए है तो यह राजनीतिक तौर पर पहली जीत मानी जायेगी, साथ ही बीडी राम के टिकट मिलने के कई राजनीतिक मायने भी है जो आने वाले कल में न सिर्फ पलामू बल्कि पूरे राज्य में देखने को मिलेगा क्योकि राजनीतिक जानकार इसे सिर्फ बीडी राम और ब्रजमोहन राम या फिर शिवधारी राम जी के बीच की लडाई नही मान रहे है बल्कि यह लडाई प्रदेश की राजनीतिक में अपनी ताकत का एहसास कराने का भी है, इससे निकले संदेश आने वाले विधानसभा चुनाव को भी प्रभावित करेगे इससे इंकार नही किया जा सकता