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बाहरी उम्मीदवार की आहट से,भाजपा कार्यकर्ताओं में आक्रोश

भाजपा में बगावत होने की संभावनाओं से इंकार नहीं

डैमेज कंट्रोल में जुटी भाजपा,मुख्यमंत्री 26 को करेंगे कार्यकर्ताओं को संबोधित

महागठबंधन की भाजपा के प्रत्याशी घोषणा पर टिकी है नजर

*चतरा से चन्द्रेश शर्मा*चतरा,आसन्न लोकसभा चुनाव के मद्देनजर महागठबंधन और भाजपा में प्रत्याशी चयन को लेकर अभी भी माथापच्ची हो रही है। रांची, कोडरमा और चतरा में प्रत्याशी उतारने को लेकर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व में मंथन का दौर चल रहा है। राजनीतिक दलों की ओर से स्थानीय बनाम बाहरी प्रत्याशी चयन को लेकर होने वाले नुकसान और फायदे पर चर्चा की जा रही है और जनता का नब्ज टटोलने का प्रयास हो रहा है। अभी भी चतरा सीट को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। भाजपा में राजद समेत अन्य दलों से नेताओ के आने का सिलसिला जारी है। अन्य दलों में व्याप्त अंतर्कलह और विवाद का फायदा पार्टी उठाना चाह रही है। सूत्रों की माने तो राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास चतरा के निवर्तमान सांसद सुनील सिंह का टिकट काटने के लिए किसी भी नए प्रत्याशी को खड़ा करने में कोई कोताही  बरतने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। शायद यही कारण है कि केंद्रीय निर्देश के बाद मुख्यमंत्री रघुवर दास और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता कार्यकर्ताओं के मूड को टटोलने के उद्देश्य से कार्यकर्ता सम्मेलन के बहाने 26 मार्च को चतरा पहुंच रहे हैं और मुख्यालय के इंदुमती टिबड़ेवाल विद्या मंदिर में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में मुख्यमंत्री डैमेज कंट्रोल और देशहित पर अपनी बात रखेंगे। ताकि चुनाव में पार्टी को नुकसान न हो पाए। सूत्रों की माने तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी भाजपा के प्रत्याशी चयन पर कोई खास आपत्ति दिखती नजर नहीं आ रही। समन्यवय के नेताओं की माने तो देश के लिए यह जरूरी है कि मोदी दुबारा प्रधानमंत्री बने। कौन किस दल से आ रहा है,यह कोई मायने नहीं रखता। लेकिन अबकी बार लोकसभा क्षेत्र की जनता बाहरी प्रत्याशी को बर्दाश्त करने के मूड में बिल्कुल भी नहीं दिख रही। आप इसे यूं भी कह सकते हैं कि आम लोग इस बार"बंधुआ मजदूर" की भूमिका में आने के लिए तैयार नहीं है। भाजपा कार्यकर्ताओं की माने तो दूसरे दल से प्रत्याशी लाने से बेहतर होगा कि निवर्तमान सांसद सुनील सिंह को ही टिकट दे दिया जाय। कार्यकर्ता स्पष्ट शब्दों में कहते हैं कि जिन लोगों ने जीवनभर भाजपा को पानी पी पी कर भला बुरा कहा। ऐसे लोगों को वोट देना, जमीर गिरवी रखने के बराबर है। बहरहाल एक ओर जहां भाजपा के वरिष्ठ नेता डैमेज कंट्रोल में लगें हैं,वहीं भाजपा के कद्दावर और समर्पित नेता बिद्रोही तेवर अपनाए हुए हैं। वहीं महागठबंधन ने भी अभी तक चतरा सीट पर पत्ता नहीं खोला है। इनकी निगाह भी भाजपा के गतिविधियों पर टिकी है। जहां एक ओर बीजेपी बिरोधी दलों के लोगों को अपने पाले में लाने की कवायद में लगी हैं। इसी प्रकार महागठबंधन की भी निगाह  बीजेपी के बिद्रोही नेताओं पर टिकी है। रोज ब रोज बदलते घटनाक्रम से यह समझा जा रहा है कि चुनावी महासमर में महागठबंधन की कांग्रेसी सीट पर भी बड़ा उलटफेर हो सकता है।