चतरा :जनबल के साथ चलता है धनबल का जोर

चतरा :जनबल के साथ चलता है धनबल का जोर 

रांची :झारखंड की राजनीति में वर्तमान परिवेश में चतरा सीट काफी चर्चित हो चला है. यदि एक नजर चतरा संसदीय क्षेत्र पर डाला जाये तो इस संसदीय सीट पर जनबल के साथ धनबल का जोर चलता है, इस स्थिति के भी पर्याप्त कारण है. पलामू को झारखंड की राजनीतिक राजधानी माना जाता है. पलामू संसदीय क्षेत्र सुरक्षित सीट है. चूकी पलामू का एक बडा भाग चतरा संसदीय क्षेत्र के दायरे में आता है. इसलिए पलामू के कद्दावर नेताओ की नजर इस सीट पर लगी रहती है. वर्ष 2009 के पहले की स्थिति को देखे तो इस इलाके के लोगों को सासंद से यह शिकायत रहती थी वह चुनाव के बाद यदि कदा विशेष अवसर पर ही नजर आते है. लेकिन सासंद के क्षेत्र से गायब रहने का दाग चतरा के सासंद रहते इंदर सिंह नामधारी ने तोड़ जब 2009 में चुनाव जीतने के बाद लगातार क्षेत्र में अपनी उपस्थिति  दर्ज करायी क्योकि नामधारी जनता के इस नब्ज को पकड रहे थे की जनता ने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनकर उन्हे संसद क्यो भेजा है, क्योंकि एक बार वोटर से वोट कर दुबारा चुनाव में आने की जो प्रवृत्ति थी उससे जनता उब चूकी थी नतीजा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामधारी की जीत हुई थी, लेकिन वर्ष 2014-2019 का जो कालखंड रहा उससे फिर से जनमानस में वही भावना जागृत हो गयी है क्योकि चतरा के निवर्तमान सासंद सुनिल सिंह पर भी लगातार क्षेत्र से गायब रहने का आरोप लगा परेशानी यह भी थी नामधारी जैसे कद्दावर नेता की जगह लोगों ने मोदी लहर में सुनिल सिंह को सासंद चुना था उम्मीद भी कुछ इसी तरह की थी, पर सुनिल सिह ने नामधारी की जगह धीरेन्द्र अग्रवाल की राह पकड ली, और उनकी कार्यशैली  से यह लगा कि वह यह मानकर चल रह है कि लहर पर सवार होकर निकल जायेगे. इसी सोच नें आज चतरा सीट को लेकर भाजपा को भी संकट में डाल रखा है क्योकि जनता का फीडबैक भाजपा के पास है तमाम नकारात्मक चर्चा के बीच सच भी यही है भले ही एक सासंद के तौर पर सुनिल सिंह क्षेत्र में अपनी पकड़ ढीली रखी हो लेकिन भाजपा नेता के तौर पर संगठन में उनकी पकड से सब कोई वाकिफ है इसलिए कम मार्क्स लाने के बाद भी वह प्रमोट किये जा सकते है ऐसा भी हो जाये तो कोई आश्चर्य की बात नही होगी, लेकिन वर्तमान में जो राजनीतिक परिस्थिति है उसमें यह संभव नही दिख रहा है. चतरा सीट पर भाजपा प्रयोग का भी मन बना रही है ऐसा सूत्रों का मानना है वैसे राजद के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गिरिनाथ सिंह के आने के बाद राजनीतिक परिस्थिति बदली है लेकिन भाजपा के अंदर इस बात को लेकर चिंतन मनन चल रहा है दूसरे दल के नेताओ को लाकर टिकट देने का क्या असर होगा? इस परिस्थिति में चतरा से टिकट की दौड में चल रहे संभावना उम्मीदवारों में कुछ नाम ऐसे है जिस पर पार्टी नये चेहरे के नाम पर विचार कर सकती है उसमें एक नाम भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ज्योतिरीश्वर सिंह का भी है ,  चतरा की लड़ाई जनबल के साथ धनबल का भी है क्योकि राजद ने महागठबंधन की गांठ खोल सुभाष यादव को अपना प्रत्याशी बनाकर यह स्पष्ट कर दिया है वह किसी भी हाल में इस सीट को जीतना चाहती है। तो कांग्रेस भी पिछे हटने को तैयार नही है।  जो सूचना मिलने रही है उसके मुताबिक कांग्रेस ने इस सीट की जिम्मेदारी राज्यसभा सांसद धीरज साहू को सौप दी है। जो पृष्ठभूमि तैयार हो रही है उसमें जनबल के साथ धनबल का भी जोर चलेगा ऐसे में यदि तमाम परिस्थिति पर  गौर कर भाजपा भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ज्योतिरीश्वर सिंह के नाम पर मुहर लगा सकती है। गोरखपुर में हुए किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन में किसान मोर्चा को भी एक सीट देने की मांग उठी  थी ऐसे में पलामू से ताल्लुक रखने के कारण ज्योतिरीश्वर का भी दावा मजबूत हो सकता है और उनका नाम आना भी कई लोगो को आश्चर्य में डाल रहा है. कुल मिलाकर आज की तिथि चतरा सीट झारखंड के लिए सबसे हाट सीट बन चूका है, भाजपा के निर्णय पर  सभी की नजर लगी है, आगे क्या होगा यह तो भविष्य के गर्भ मे है।