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पलामू -न्यायालय में मुकदमे का बोझ काफी है।इस कारण मामले का निस्तारण समय पर नही हो पाता। न्यायालय को मामले निपटाने में काफी प्रकिया से गुजरना पड़ता है।इस कारण मामले निपटाने के लिए न्यायालय को पर्याप्त समय नहीं मिलता ।

पलामू -न्यायालय में  मुकदमे का बोझ काफी है।इस कारण मामले का निस्तारण समय पर नही हो पाता। न्यायालय को मामले निपटाने में काफी प्रकिया से गुजरना पड़ता है।इस कारण मामले  निपटाने  के लिए न्यायालय को पर्याप्त समय नहीं  मिलता । ज्यादा से ज्यादा मामले को निष्पादित  करने के लिए बर्तमान समय मे मध्यस्था के माध्यम से मामले निस्तारण में  गति मिल रहा है।यह  काफी सराहनीय है। उक्त बातें पलामू के प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश विजय कुमार ने कही। वे रविवार को व्यवहार न्यायालय परिसर के सर्वर रूम में एक दिवसीय मध्यस्था जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे ।इसके पूर्व उन्होंने कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर किया ।उन्होंने कहा कि एडीआर प्रणाली एक ऐसा प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत केस का निपटारा जल्द से जल्द किया जा सकता है । विवाद को खत्म करने के लिए आर्बिट्रेशन,कोंसिलेसन,मेडिएशन,एवं लोक अदालत उपलब्ध है।उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि न्यायालय मध्यस्था में भाग नहीं लेगा ,बल्कि जब मध्यस्था सफल हो जाएगा तब न्यायालय दोनों पक्षों को नोटिस कर उनकी बातों को सुनेगी।दोनों पक्ष इस  बात के लिए राजी होंगे कि सुलह के आधार पर उनके मामले को समाप्त कर दिया जाए तब न्यायालय डिग्री पास करेगी।उन्होंने कहा कि

 विवादों और झगड़ों को कम करने के लिए जनता में मध्यस्थता के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है ।साथ ही साथ मध्यस्थता केंद्र तेजी से प्रगति करें। तथा लंबित मामलों को सद्भाव पूर्ण तरीके से विवादों को निपटाने के अपने उद्देश्य में सफल हो।उन्होंने कहा कि मध्यस्था का प्रशिक्षण  तभी कामयाब होगा। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता के माध्यम से मामले निपटाने में समय और पैसा बचता है। इससे संतुष्टि बड़ता है । उन्होंने कहा कि मध्यस्ता  उन लोगों के लिए जो सिविल मामलों, तलाक ,दहेज का जल्दी निपटाना चाहते थे उनके लिए कम से कम एक अवसर प्रदान किया है । उन्होंने कहा कि मध्यस्थ का दायित्व है कि दोनों पक्ष को समझा-बुझाकर ठंडे दिमाग से मामले निस्तारण को तैयार करें ।जब भी बात करें उन्हें लगे कि आप उनकी बात को अच्छी तरह सुन रहे हैं ।और उन्हें विश्वास दिलाए कि मध्यस्थता में जो मामला निस्तारण होगा वह आपके हित में होगा ।उन्होंने कहा कि जिले में मध्यस्थता की रेट 45% है ।हमें इसे 70% से ऊपर ले जाना है ।यह तभी संभव है जब अधिवक्ता के साथ साथ मध्यस्थ अपनी कार्य क्षमता को ईमानदारी के साथ प्रस्तुत करेंगे।मौके पर अधिवक्ता संघ के महासचिव सुबोध कुमार सिन्हा ने कहा कि शुरुआती दौर में लोगो को मध्यस्थता के प्रति सोच अच्छी नही थी।लेकिन समय के साथ आज इसकी उपयोगिता बढ़ गई है।इसे ग्रामीण स्तर पर ले जाने की जरूरत है।पी एल भी की भूमिका इसे ग्राम स्तर तक ले जाने में महत्वपूर्ण है।पी एल भी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा से कर रहे है। इस मौके पर कुटुंब न्यायालय के न्यायाधीश बी ड़ी तिवारी,डी जे ,डी के पाठक, आनंद प्रकाश ,पंकज कुमार,सी जे एम संजय कुमार चौधरी, ए सी पी जे एम आसिफ इकबाल, विक्रांत रंजन ,राजेंद्र प्रसाद, रोहित कुमार ,दीपक कुमार, प्राधिकार के सचिव प्रफुल्ल कुमार ,सफदर अली नैयर,अमित गुप्ता,मनोज कुमार, अधिवक्ता डीसी पांडे ,सतीश कुमार दुबे, संतोष कुमार पांडेय, अनुज कुमार त्रिपाठी ,पीएलभी विनय प्रसाद ,मुनेश्वर राम ,इंदु भगत सरिता  कुजूर  समेत दर्जनों लोग उपस्थित थे।