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महिलाओं को अपने जीवन को सुरक्षित करने के लिए संपत्ति के अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है

पलामू-महिलाओं को अपने जीवन को सुरक्षित करने के लिए संपत्ति  के अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है । उक्त बातें ट्रेनर संतोष कुमार पांडेय ने कही। वे रविवार को नालसा मॉडल रूल थ्री  के तहत पुराना डीआरडीए हॉल में पैनल अधिवक्ताओं को प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन लोगों को जानकारी दे रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत में महिलाओं के संपत्ति अधिकारों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है। बल्कि उनकी उपेक्षा की गई है। समय के साथ बढ़ती जागरूकता और आधुनिकीकरण  ने परिदृश्य को  की थोड़ा बेहतर बना दिया है ।उन्होंने कहा कि एक बेटी को बेटों के रूप में अपने पिता की संपत्ति पर विरासत का समान अधिकार है। उसे अपनी मां की संपत्ति में हिस्सा प्राप्त करने का भी अधिकार है। उन्होंने कहा कि 2005 में हिंदु उत्तराधिकार अधिनियम के संशोधन के बाद लिंग के बीच भेदभाव हटा दिया गया है। बेटी को कई तरह के अधिकार दिया गया है। उसे भी बेटों की तरह दायित्व निभाना होगा  उन्होंने  कहा कि महिला चाहे वह बेटी हो या पत्नी हो या हो अपने पुरुष के समान अधिकार पाने की हकदार है ।उसके साथ वैसा ही सम्मान और प्यार होना चाहिए। ऐसा किसी और के साथ होता है। उन्होंने कहा कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 2005 के मुताबिक लड़की चाहे कुंवारी हो या शादीशुदा वह पिता की संपत्ति में हिस्सेदार मानी  जाएगी। उसे पिता के संपत्ति का प्रबंधक भी बनाया जा सकता है । इस  संशोधन का लाभ तभी मिलेगा जब उनके पिता का निधन 9 सितंबर 2005 के बाद हुआ हो। इसके अलावा बेटी शभागिदार तभी  बन सकती है जब पिता और बेटी दोनों 9 सितंबर 2005 को जीवित हो। इस मौके पर बी एन लॉ कॉलेज के प्राचार्य पंकज कुमार ने कहा कि  संपत्ति  दो तरह की होती है एक वह जो खुद अर्जित की गई हो ,और दूसरा जो विरासत में मिली हो ।अपनी कमाई से खरीदी गई संपत्ति स्वार्जित कही जाती है ।जबकि विरासत में मिली गई प्रॉपर्टी पैतृक संपत्ति कह लाती है ।किसी भी पैतृक संपत्ति उनके सभी बच्चों और पत्नी का बराबर का अधिकार होता है। उन्होंने कहा कि किसी भी पुरुष को अपने पिता ,दादा ,परदादा से उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति संपत्ति का हक आता है। बच्चा जन्म के साथ ही पिता के संपत्ति का अधिकारी हो जाता है। पिता की पूरी संपत्ति बेटे को नहीं मिल सकती क्योंकि अगर जीवित है और पिता की संपत्ति में बहन का भी अधिकार है ।उन्होंने पैतृक संपत्ति पाने के अधिकार का भी विस्तार से चर्चा की ।इस मौके पर सरकारी अधिवक्ता अखिलेश्वर प्रसाद  ने भी हिंदू कानून के अनुसार महिलाओं के संपत्ति अधिकार  पर विस्तार से प्रकाश डाला।अधिवक्ता एस  के दाता ने कंज्यूमर पोर्टेक्सन एक्ट पर  विस्तार से प्रकाश डाला। इस मौके पर ट्रेनर सचिंदर कुमार पांडेय ने प्रोफेशनल एथिक्स फ़ॉर लॉयर पर चर्चा की।मैके पर जितेंद्र कुमार उपाध्याय सुनील कुमार मिश्रा ने भी  लोगो को जानकारी दी।इस मौके पर अधिवक्ता आनंद शंकर,मनवर जमा खा,मदन तिवारी,मंधारी दुबे,वीरेंद्र मिश्रा,त्रिपुरारी तिवारी,रामचंद्र सिंह,अनिल पांडेय,शंकर कुमार, समेत दर्जनो पैनल अधिवक्ता उपस्थित थे।