632 Views

चतरा सीट के माध्यम से बडा संदेश दे सकती है भाजपा

चतरा सीट के माध्यम से बडा संदेश दे सकती है भाजपा

 दिल्ली :. चुनाव में भाजपा किसान पर फोकस कर काम कर रही है. इसलिए भाजपा ने जय प्रकाश नारायण के विचारों को मानने वाले भदोही सांसद और भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह को बलिया से चुनाव लड़ाने का फैसला किया है। बलिया लोकनायक जेपी की जन्मस्थली है। पार्टी के इस रणनीति के बारे में खुलासा करते हुए खुद संसद वीरेंद्र सिंह ने भदोही में कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए इसकी जानकारी दी. जिस तरह लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों के चयन में भाजपा एक एक बिंदु पर ध्यान दे रही है. उससे कई संकेत मिल रहे है. प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी की जो छवि आम जनों के मन बना है वह यही है तमाम तरह की जो राजनीतिक विकृति  आयी है, उसमें सुधार का रास्ता श्री मोदी के नेतृत्व में  ही निकलेगा, भदोही से वीरेन्द्र सिंह मस्त को बलिया भेज कर जय प्रकाश नारायण के विचारों को जनजन तक पहुचाने की योजना के तरफ भाजपा बढ चूकी है तो दूसरी तरफ श्री मस्त भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी है, किसानों के सवाल पर राजनीतिक कर जिस तरह कांग्रेस ने राजस्थान, छत्तीसगढ़, और मध्य प्रदेश में सत्ता से बेदखल किया है उसके बाद पूरे देश में किसानों का सवाल अहम हो चला है. ऐसे में किसान और उससे जुडे मोर्चा पर भाजपा की विशेष नजर बतायी जा रही है, झारखंड के परिप्रेक्ष्य में यदि देखे तो भाजपा चतरा सीट के माध्यम से बडा संदेश देने की तैयारी में है , सूत्रों के मुताबिक यहा पार्टी नये चेहरे पर विचार कर रही है दावेदारों मे भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ज्योतिरीश्वर सिंह  का भी नाम चल रहा है, आज एक तरफ जहां युवाओं  से यह कहा जा रहा है खेती में अपना कैरियर तलाशे तो खेती किसानी को बढावा देने के लिए खेती में आधुनिकता के साथ जोडने पर बल दिया जा रहा है ऐसे में ज्योतिरीश्वर का चेहरा लाकर पार्टी यह संदेश दे सकती है किस तरह वह बदलाव लाना चाहती है खास तौर पर जहां झारखंड में रघुवर सरकार ने किसानों को विदेश भेजकर यह संदेश भी दिया है, ऐसे में यह संभव भी है किसानों के नाम पर ज्योतिरीश्वर के नाम पर मुहर भी लगे, राजनीतिक  जानकार मानते है की गिरिनाथ सिंह के आने के बाद  थोडा सीन भी बदला है लेकिन मोदी और शाह के नेतृत्व में जिस तरह भाजपा निर्णय ले रही है उसमे कोई भी निर्णय हो सकता है क्योकि वर्ष 2014के चुनाव में इंदर सिंह नामधारी जैसा सर्वश्रेष्ठ विकल्प मौजूद रहने के बाद भी  पार्टी ने सुनिल सिंह अनजाने चेहरे पर दांव लगा दिया था जबकी तब नामधारी इलाके के निर्वतमान सासंद थे. 2009 के चुनाव में उन्हे बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीताने में भाजपा कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम रही थी, ऐसे में गिरिनाथ के मामले में भी पार्टी कुछ ऐसा ही करेगी इसकी संभावना प्रबल हो चुकी है ऐसा करके अवसरवाद की राजनीति पर भी भाजपा चोट करेगी, जानकार बताते है की यदि ज्योतिरीश्वर और गिरिनाथ सिंह दोनों में से किसी को एक को चुनना होगा तो मुख्यमंत्री रघुवर दास की पसंद ज्योतिरीश्वर ही होगे यह भी तय है क्योकि ज्योतिरीश्वर रघुवर गुट से माने जाते है, रघुवर भी चाहेगे की अगडी जाति में एक ऐसा नेता को उभार जो उनके गुट से जुडा हो ताकी अगडों में भी यह संदेश जाये की नये लीडरशिप को उभार मिल रहा है, इससे सरयू राय जैसे नेताओं को साइड लाइन किये जाने की दिशा में एक पहल के तौर भी देखा जायेगा, भाजपा में गिरिनाथ का कद बढाकर रघुवर दास दूसरा सरयू राय खडा नही कराना चाहेगे इसलिए चतरा सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ज्योतिरीश्वर सिंह के नाम पर मुहर लगने की संभावना प्रबल  हो गयी है. आगे क्या होगा यह तो आने वाला वक्त बतायेगे लेकिन जो परिस्थिति बनी है उसमें यह।  संभावना जतायी जा रही है क्योकि भाजपा को सीट के साथ अपनी छवी की भी चिंता है