बिहार मैट्रिक परीक्षा : 8 छात्र पैसे लेकर दूसरे के बदले दे रहे थे एक्जाम, मजिस्ट्रेट पहुंचे तो...


नवादा : बिहार विद्यालय परीक्षा समिति हाल के दिनों में कई नकारात्मक कारणों से चर्चा में रहा. जिसमें रिजल्ट घोटाले से लेकर टॉपर्स घोटाला तक शामिल था, लेकिन बोर्ड के नये अध्यक्ष आनंद किशोर के आते ही व्यवस्था में बदलाव की तस्वीर दिखने लगी है. इंटर परीक्षा के सफल आयोजन के बाद बोर्ड मैट्रिक की परीक्षा को पुरी शिद्दत और सुरक्षा के साथ आयोजित करवा रहा है, लेकिन इसके बाद भी कुछ लोग कदाचार करने और मुन्नाभाई बनने से बाज नहीं आ रहे हैं.


कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है बिहार के नवादा जिले में, जहां कुछ लोग पैसे लेकर दूसरे के बदले में परीक्षा दे रहे थे. बोर्ड के अधिकारियों को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, केंद्र पर छापेमारी की गयी और आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया. इसमें शामिल सभी लोग, कोई रिश्तेदारी में परीक्षा दे रहा था, तो किसी ने पैसे ले रखे थे. मामला नवादा नगर थाना क्षेत्र में स्थित गंगा रानी सिन्हा कॉलेज का बताया जा रहा है, जहां पुलिस ने आठ मुन्ना भाई बने छात्रों को गिरफ्तार कर लिया है.


जानकारी के मुताबिक बोर्ड के मजिस्ट्रेट को पता चला कि गंगा रानी सिन्हा कॉलेज में कुछ छात्रों का ग्रुप दूसरे के बदले में परीक्षा दे रहा है, उसके बाद तुरंत इसकी जानकारी के बाद परीक्षा ड्यूटी में लगे मजिस्ट्रेट ने इसकी जांच की और मामला सही पाया गया. उसके बाद जांच के बाद सदर एसडीएम को उस केंद्र पर भेजा गया और पाया गया कि इन मुन्ना भाईयों ने पैसे लेकर और रिश्तेदारी में दूसरे के बदले परीक्षा देने की बात स्वीकारी थी और परीक्षा देने आये थे.


सभी आठों मुन्ना भाई की गिरफ्तारी के लिए मजिस्ट्रेट ने विशेष टीम का गठन किया था. हालांकि, प्रशासनिक पदाधिकारी का कहना है कि केंद्राधीक्षक के खिलाफ भी कार्रवाई की जायेगी, आखिर इतनी बड़ी संख्या में एक ही केंद्र पर इतने लड़के कैसे दूसरे के बदले परीक्षा दे रहे हैं. बताया जा रहा है कि सभी छात्रों के बारे में जांच की जा रही है और पूछताछ की जा रही है.

[9:46 AM, 2/27/2018] Rakesh pandey: बिहार के वर्तमान डीजीपी पीके ठाकुर के रिटायर होने के बाद इस पद पर कौन बैठेगा इसको लेकर कयासों का दौरा समाप्त। पिछले एक महीने से अलग-अलग नाम सामने आ रहे थे। ताजा अपडेट के अनुसार अगले डीजीपी के रूप में A K Verma का नाम तय हो गया है।


जानकारी अनुसार 1984 बैच के आइपीएस अधिकारी वर्मा IB में ज्वाइंट डाइरेक्टर हैं। उनके प्रशासनिक कुशलता को देखते हुए सीएम नीतीश कुमार भी उनसे प्रभावित रहे हैं। वैसे सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्मा के लिए मिथिला क्षेत्र से आने वाले एक प्रभावी और सीएम नीतीश कुमार के खासमखास जद यू नेता पैरवी भी की जा रही थी। जापान यात्रा पर जाने से पहले वर्मा ने सीएम नीतीश कुमार से दिल्ली में मुलाकात भी की थी.


राजनीतिक गलियारे में चल रही बातों के अनुसार सीएम नीतीश कुमार चाहते हैं कि नए डीजीपी का कार्यकाल कम से कम अगले विधान सभा तक हो.


बताते चले कि बिहार के वर्तमान डीजीपी पी के ठाकुर 28 फरवरी को रिटायर होने जा रहे हैं। इस कारण पुलिस महकमे में हलचल बढ़ गई है। नीतीश कुमार को न सिर्फ नये डीजीपी की नियुक्ति करनी है, बल्कि 2019 और 2020 के चुनाव का ख्याल भी रखना है।


ऐसे में, बहुत सारी बातें महत्वपूर्ण हो जाती हैं। संडे 25 फरवरी की शाम से यह खबर तेजी से ब्रॉडकास्ट होनी शुरू हुई थी कि नीतीश कुमार बगैर किसी विवाद में फंसे किसी सीनियर अधिकारी को बिहार पुलिस का डीजीपी बना देंगे।