टाटा स्टील, नोआमुंडी में दो दिवसीय किसान सम्मेलन ’वार्ता’ का समापन


संतोष वर्मा। टाटा स्टील द्वारा स्पार्ट्स कॉम्प्लेक्स, नोआमुंडी में चल रहा दो दिवसीय वार्षिक किसान सम्मेलन ’वार्ता’ आज संपन्न हो गया। जैविक खेती के माध्यम से विकास पर केंद्रित इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में किसानों, शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और फैसिलिटेटरों ने हिस्सा लिया। बिरसा एग्रीकल्चर, रांची से शुष्क-भूमि खेती के विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. जेड ए हैदर ने झारखंड और ओडिशा के किसानों के साथ अपने सत्र में बाजरा की खेती के लाभों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पैदा होने वाले नए अवसरों के बारे में बात की। खूंटी से ‘उद्योगिनी’ नामक एक एनजीओ से आये श्री चैतन्य गंजू ने लाह की खेती पर दूसरी कार्यशाला का संचालन किया। श्री गंजू के मुताबिक, लाह ने देश और अंतरराष्ट्रीय बाजार में खुद को स्थापित किया है और किसान मौजूदा रुझानों से संकेत लेकर फ्यूचर रेडी हो सकते हैं।

नोआमुंडी प्रखंड, मुर्गाबेड़ा गांव के 55 वर्षीय अभिमाया नायक ने बताया कि उसने इस साल ’वार्ता’ में शुष्क-भूमि पर खेती के बारे में महत्वपूर्ण ज्ञान हासिल किया। अब उसका फोकस अपनी खेत के करीब शुष्क-भूमि का उपयोग करने पर होगा। अपने विचार साझा करते हुए उसने कहा, “अब मैं अंतर-फसल खेती करने जा रहा हूं, क्योंकि यह खेत के निषेचन में मदद करता है और कम उत्पादन के जोखिम को कम करता है।“

इसी तरह, नोआमुंडी प्रखंड के बरबोर्टा गांव के 40 वर्षीय किसान रमेश पूरती ने बताया कि जैविक खेती पर सत्र बहुत ही शिक्षाप्रद रहा और इस साल वार्ता से प्राप्त जानकारी की वजह से अकार्बनिक से जैविक खेती में परिवर्तन होगा, क्योंकि यह लंबे समय तक खेत के पारिस्थितिक संतुलन को बनाये रखता है। उन्होंने आगे कहा, “जैविक खेती की ओर बढ़ने से मैं और अधिक आत्मनिर्भर बना हो जाऊंगा, क्योंकि यह खाद स्वनिर्मित और अधिक किफायती होगा। इस साल मैं लाह की खेती पर भी ध्यान केन्द्रित करूंगा और इसके लिए नए बाजारों का पता लगाऊंगा, क्योंकि सब्जियों की तुलना लाह का भंडारण काफी बहुत लंबे समय तक किया जा सकता है।“

यह सम्मेलन सभी किसानों के एक शानदार गेट-टुगेदर के साथ संपन्न हुआ।