सोना खरीदने में सांसद को कहीं कोयला न हाथ लग जाय, नेताओं के भाषण पर ताली बजाने में भी हिचक रहे थे सम्मेलन में जुटे कार्यकर्ता, - पार्टी में आपसी विवाद रहा कार्यक्रम पर भारी, - कार्यकर्तों में उत्साह की दिखी कमी , अफसरशाही के चंगुल से मुक्त कराने की लगी गुहार, पलामू से नागेंद्र शर्मा की रिपोर्ट


पलामू- रेहला के जेबी हाई स्कूल के मैदान में भाजपा का बूथ स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में जुटे विश्रामपुर विधानसभा के कार्यकर्ता नेताओं के भाषण पर ताली बजाने में भी हिचक रहे थे। जिससे कार्यकर्ताओं में साफ नाराजगी दिख रही थी। इतना ही नहीं पांडू का एक कार्यकर्ता दयानंद शुक्ला ने कार्यक्रम के बीच मे ही खड़ा होकर विरोध करते हुए कहा कि कार्यकर्ता को कोई देखने वाला नहीं है। जिसे अनुरोध कर भाजपा नेताओं ने शांत कराया। वावजूद वह अपनी बातों पर कायम था।

सम्मेलन में जुटे कई कार्यकर्ता खुले तौर पर पार्टी की अंदरूनी बात को गिनाते चल रहे थे। इतना ही नहीं इन बातों को तब और बल मिला जब अपने संबोधन में बरडीहा प्रखंड अध्यक्ष ने कहा कि जनता खुश हैं लेकिन कार्यकर्ता खुश नहीं है। वहीं नावा प्रखंड के 20 सूत्री अध्यक्ष ने भी अपने संबोधन में कहा कि कार्यकर्ता छोटी मोटी विवाद को मिटाने के लिए ही यह कार्यकर्ता सम्मेलन रखा गया है। उन्होंने कहा कि संवादहीनता के कारण उत्पन्न विवाद को कार्यकर्ता भूलकर चुनाव की तैयारी में जुट जाएं। सम्मेलन में कई नेताओं ने अपने संबोधन में यहां तक टिप्पणी कर दिया कि सांसद को सोना खरीदने में कोयला हाथ न लग जाय। कुल मिलाकर सम्मेलन में यह साफ परिलक्षित हो रहा था कि सांसद की कार्यशैली से कार्यकर्ता खुश नहीं है। परिणाम स्वरूप आसन्न चुनाव में सांसद को कार्यकर्ताओं का आक्रोश भारी पड़ सकता है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की पंक्ति जिसे उन्होंने अपने चुनाव के संदर्भ में कहा था कि जनता खुश हो और कार्यकर्ता नाखुश तो चुनाव नहीं जीता जा सकता है। श्री बाजपेयी के इन पंक्तियों को भी कई नेताओं ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया । खुद सांसद ने भी अपनेसंबोधन में कहा कि अगर कोई भूल हो गयी है उसे कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर सुलझा लिया जाएगा । उन्होंने कहा कि अगर गलती उनसे हुई है तो उसका असर पार्टी पर नहीं पड़ना चाहिए। वे इसके लिए क्षमा मांगने को तैयार है। कई नेताओं ने भी अपने संबोधन में स्पष्ट तौर पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी को सार्वजनिक किया। कार्यकर्ताओं को पदाधिकारी तरजीह नहीं देते इसपर भी कई नेताओं ने बदलाव की गुहार लगाई।