हिन्दुस्तान सवेरा की ओर ---------------------------- -----से------------अंगद किशोर ---------------------------------------------------------------------- कण कण में प्यार उमड़ता हो तब देख तमाशा होली का। जब फागुन मास बहकता हो तब देख तमाशा होली का। मुंह लाल गुलाबी आंखें हों पंखों सी फड़-फड़ बाहें हों गालों पर रंग बरसता हो तब देख तमाशा होली का। आंखों में जिंदा चाहत हो पर मिलना जहां कयामत हो औ\\\'दिल में अनल सुलगता हो तब देख तमाशा होली का। दूर गगन से पंछी उड़कर आ जाएं जैसे पलकों पर दिलरुबा कोई चहकता हो तब देख तमाशा होली का। सजी सितारों से राहें हों शब में तनहा की आहें हों धीरे से चांद निकलता हो तब देख तमाशा होली का। गूंज रहा हो अंदर-अंदर घूम रहा हो मंजर-मंजर। बातों से रस टपकता हो तब देख तमाशा होली का। जब भरी-भरी पिचकारी हो अंगों से लिपटी साड़ी हो सीने से रंग ढलकता हो तब देख तमाशा होली का।