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छत्तरपुर में विभिन्न महजिदो में ईद-उल- अजहा की नमाज अदा किया.....


प्रतिनिधि छत्तरपुर:- अरविंद अग्रवाल.              .छत्तरपुर:- प्रखंड मुख्यालय में ईद-उल-अजहा की नमाज अदा हर्षोल्लास के साथ किया गया। बतातें है कि बकरीद जिसे बड़ी ईद भी कहा जाता है। आज पूरे भारत में यह त्यौहार 12 अगस्त यानी की सोमवार के दिन मनाया गया। छत्तरपुर के खाटीन  जमा मस्जिद के इमाम मौलाना जुनैद मिस्बाही ने कहा कि जो व्यक्ति सक्षम है उसे अल्लाह के राह में खर्च करना चाहिए वही हाजी करी मनव्वर नूरी ने कहां की अल्लाह की राह में कुर्बानी देकर अल्लाह को राजी करते हैं उन्होंने कहा कि अल्लाह के प्यारे बंदा हजरत इस्माइल अल्ले सलाम को कुर्बानी देकर बुराई पर अच्छाई की जीत हुई ईद उल अजहा के नमाज अदा करने के बाद सभी अपने गिले-शिकवे भूल कर एक दूसरे से गले मिले साथ ही बकरीद की मुबारकबाद दी है। मौके पर अनुमंडल पदाधिकारी नरेंद्र कुमार गुप्ता,सीओ राकेश कुमार तिवारी सहित अन्य प्रशानिक पदाधिकारी के साथ पुलिस के जवान भी जगह जगह पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुस्तैद थे।

कैसे मनाई जाती है बकरीद:-

इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार यह त्योहार हर साल जिलहिज्ज के महीने में आता है।ईद-उल-अजहा के दिन  किसी बकरा की कुर्बानी देते हैं। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग साफ-पाक होकर नए कपड़े पहनकर नमाज पढ़ते हैं। आदमी मस्जिद व ईदगाह में नमाज अदा करते हैं तो औरतें घरों में ही नमाज पढ़ती हैं। नमाज़ अदा करने के बाद ही बकरा की कुर्बानी की प्रक्रिया शुरू की जाती है।कुर्बानी में अल्लाह का नाम लेकर बकरों की बलि दी जाती है। कुर्बानी और गोश्त को हलाल कहा जाता है। बकरे के गोश्त को तीन भागों में बांटकर एक हिस्सा खुद के लिए, एक दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए और तीसरा हिस्सा गरीबों के लिए रखा जाता है।

ऐसे शुरु हुई कुर्बानी देने की परंपरा:- 

एक प्रचलित कहानी के अनुसार, बकरीद का त्योहार पैगंबर हजरत इब्राहिम द्वारा शुरु हुआ था। जिन्हें अल्लाह का पैगंबर माना जाता है। इब्राहिम जिंदगी भर दुनिया की भलाई के कार्यों में लगे रहे।